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तप और साधना मुक्ति मार्ग के अंग : मुनि
जाति पंथ धर्म के नाम पर लड़ने वाला धरती का सपूत नहीं हो सकता : संत कमल मुनि
आमेट | कमल मुनि के आमेट प्रवास के दौरान सोमवार को धर्मसभा में महावीर भवन में कहा कि जाति पंत धर्म के नाम से लड़ने वाला धरती का सपूत नहीं हो सकता। दो दिवसीय आमेट प्रवास पर आए संत ने कहा कि जो लोगों को लड़ाने का काम करें वो देश का सेवक नहीं हो सकता। किसी विषय के बारे में जानकारी नहीं है तो उसे जानने का प्रयास करें न कि उसके खिलाफ लोगों को भ्रमित कर सभी का नुकसान करें। संत ने कहा कि किसी की सहायता करें तो गुप्त करें। लेकिन देश अाैर समाज के लिए कुछ करें तो उसे बताना चाहिए। किसी को भी सन्त की वाणी की बुराई नहीं करनी चाहिए। धर्म मे आने वाले के विचार सकारात्मक हो। कोई भी काम नहीं करने वाले से गलती करने वाला महान है। विधवा शब्द का प्रयोग नहीं करें। संत ने शहीद सैनिकों की प|ियों को वीरांगना शब्द के प्रयोग के बारे में केन्द्र सरकार को अवगत करवाया था। जिसे सरकार ने स्वीकार करते हुए सैनिकों की विधवाओं के लिए वीरांगना शब्द का प्रयोग शुरू किया। धर्म सभा मे घनश्याम मुनि, अरिहंत मुनि, काैशक मुनि, महासती का भी सानिध्य रहा।
देवगढ़ । सौभाग्य मुनि ने मुक्ति मार्ग के चार अंग बताए हैं। ये दान, शील, तप और साधना है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म से ही कुछ ना कुछ लेना शुरू करता है। बचपन, युवावस्था, वृद्धावस्था में भी किसी ना किसी से सहयोग प्राप्त करता है। यह कार्य निपट स्वार्थी है।
वे श्रीगुरु सौभाग्य मदन गौशाला प्रांगण में होली चातुर्मास पर धर्मसभा में प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने बताया कि हमें परोपकार की तरफ भी दृष्टि रखनी चाहिए। अव्यक्त और अनजाने उपकार संस्कार में होते रहते हैं। देना हमारी संस्कृति है, भारतीय संस्कृति में दान और धर्म का अत्यधिक महत्व रहा है। करण और अर्जुन के युद्ध का दृष्टांत बताते हुए उन्होंने करण के दान की अविरल धारा बहाने का प्रसंग सुनाया और कहा कि मृत्यु शैया पर भी करण ने दान वृत्ति नहीं छोड़ी थी। मनुष्य धन संचय करें, लेकिन अति संचय नहीं करें। सादा जीवन उच्च विचार रखते हुए पुरुषार्थ और भाग्य से संपत्ति का अर्जन कर सुकार्य में विसर्जन करना पुनीत कर्म है। सुकून मुनि ने कहा कि जीवन उन्हीं का सार्थक है, जिन्हें जीवन जीने की कला आ गई हो। सभा में साध्वी विद्याश्री, डॉ. राज रश्मि, वरिष्ठ उप प्रवर्तिनी रवि रश्मि ने गो पालन का महत्व समझाया। नारायण सिंह सोलंकी ने निष्काम भाव के त्याग को समझाया। पाली के कवियों ने कविता पाठ किया। संचालन रमेश कंसारा ने किया। प्रवचन के दौरान एसडीएम शक्ति सिंह भाटी, नगरपालिका अध्यक्ष अंजना जोशी, गौशाला ट्रस्ट अध्यक्ष सहित कई लोग मौजूद थे।