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गणेश टेकरी में मिले बच्चे का नाम सिद्धार्थ रखा, राजकीय शिशु गृह में आया नया मेहमान

2 वर्ष पहले
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नाथद्वारा| पिछले दिनों शहर के गणेश टेकरी पर मिले बच्चे का बुधवार को नामकरण हुआ। राजकीय शिशु गृह में पहली बार नवजात बालक असुरक्षित रूप से प्राप्त हुआ, जो जीवित रहने में सफल रहा। बालक 31 जुलाई शाम को गणेश मंदिर के पास लाल कपड़े के थेले में प्राप्त हुआ। बालक को प्राथमिक सुविधाएं राजकीय गोवर्धन चिकित्सालय देने के बाद राजकीय आरके चिकित्सालय राजसमंद को रेफर किया। बालक का वजन 1.8 किलाे तथा गले में नाखुन या ब्लेड से किया गया 1-1.50 सेमी. घाव था। निमोनिया के लक्षण भी थे। बुधवार को स्वस्थ बालक को राजकीय आरके चिकित्सालय राजसमंद से स्थानान्तरित किया। इसे सिद्धार्थ नाम दिया गया। बाल कल्याण समिति राजसमंद के आदेश अनुसार बालक के प्रवेश व आॅनलाइन पोर्टल संबंधी कार्यवाही शुरू की। 15 दिन की समयावधि में जैविक माता-पिता यदि वैध आपत्ति मय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करते हैं तो बालक विधिक रूप से स्वतंत्र घोषित कर दिया जाएगा। विधि मुक्त बालकों को इच्छुक माता-पिताओं को दत्तक रूप में पुनर्वासित किया जाता है। गृह अधीक्षक डाॅ. टी.आर. आमेटा ने बताया कि बालकों के सुरक्षित परित्याग के लिए जिले में 2 स्थान पर पालना गृह लगाये है इनमें से एक राजकीय आरके चिकित्सालय राजसमंद अाैर दूसरा राजकीय गोवर्धन चिकित्सालय नाथद्वारा में है। यहां पर यदि कोई बालको का परित्याग करता है तो न सिर्फ उसकी गोपनीयता रहती है, वरन परित्यक्त बालकों के जीवित रहने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसके साथ-साथ पुलिस भी केवल रोजनामचा में इंद्राज करती है। असुरक्षित रूप से त्यागने पर धारा 315, 317 में प्राथमिकी दर्ज की जाती है। इसमें अधिकतम 10 साल की सजा अाैर जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है। गृह कार्डिनेटर प्रकाश चंद्र सालवी ने अपील की है कि इस प्रकार से नवजात बालकों का सुरक्षित परित्याग करें। ताकि गोपनीयता बनी रहे अाैर जीवित रहने की संभावना भी बढ़ सके।

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