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नाथद्वारा में बादशाह की सवारी, सीढ़ियां दाढ़ी से साफ करने की परंपरा निभाई

एक वर्ष पहले
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शहर में श्रीजी प्रभु की होली सहित संग गली-मोहल्लों में करीब 40-50 होलियाें का दहन हुआ। सोमवार शाम को मंदिर से खर्च भंडारी, मशालची की अगुवाई में कीर्तनकार, सेवावाले, ब्रजवासी कीर्तन, रसिया का गान करते हुए होली मगरा पहुंचे। जहां पर होली की परिक्रमा लगाकर मुहूर्त में दहन किया गया। श्रीजी प्रभु की होली जलते ही पूरे शहर में कई होलियां जल उठी। होली मगरा पर मेला भरा। धुलंडी पर नगरवासियों सहित गुजराती वैष्णवों ने भी खूब गुलाल उड़ाया। धुलंडी पर शाम को गुर्जरपुरा मोहल्ले से ठाट-बाट से बादशाह की सवारी निकाली गई। बादशाह ने जामा, पायजामा की मुगली पोशाक पहनी। बादशाही दाढ़ी-मूंछ तथा आंखों में काजल लगाया। बादशाह बना कलाकार श्रीजी की छवि थामे पालकी पर सवार था। बादशाह के पीछे पारंपरिक वेशभूषा पहने दो हूरमा बादशाह के चंवर ढुलाते चल रहे थे। सवारी में सजे-धजे ऊंटो, घोड़ों पर बच्चोें कई स्वांग धारण कर बैठे थे। सवारी की अगवानी में श्रीनाथ बैंड के कलाकार बांसुरी वादन करते चल रहे थे। सबसे आगे घोड़े पर सेनापति बैठा था। गुर्जरपुरा से सवारी सीधे बड़ा बाजार पहुंची, जहां पर ब्रजवासियों ने बादशाह को गालियां देने की परंपरा निभाई। सवारी मंदिर की परिक्रमा लगाती हुई श्रीजी मंदिर पहुंची, जहां पर बादशाह बने कलाकार ने अपनी दाढ़ी से सूरजपोली की सीढ़ियां साफ कर बरसों की परंपरा का निर्वाह किया। इसके बाद मंदिर के परछना विभाग के मुखिया ने बादशाह को पैरावणी भेंट की। ब्रजवासियों ने मंदिर में भी बादशाह बने कलाकार को गालियां सुनाई तथा रसिया गान किया। इसके बाद सभी को भांग के पकौड़े बांटे गए। होली पर श्रीजी प्रभु की नगरी में वैष्णवों की कतार रही। गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश से कई वैष्णव दर्शन करने पहुंचे।

शयन दर्शन में प्रभु द्वारिकाधीश के सामने उड़ाया गुलाल

राजसमंद | द्वारिकाधीश मंदिर में होली पर ठाकुरजी काे विशेष शृंगार धराया गया। पीठाधीश्वर गोस्वामी बृजेश कुमार महाराज ने ठाकुरजी के श्री मस्तक पर केसरी खिड़की की श्वेत पाग, जिस पर सादा चंद्रिका, श्वेत चाकदार बागा, वैसी सूतन, केसरी कटी का पटका, सोने के आभरण, चार कर्णफूल, लाल रेशमी ठाड़े वस्त्र धराए। इसके बाद राजभोग में ठाकुरजी को पांच रंग से होली खेलाई गई। शाम को भोग आरती दर्शन के बाद द्वारकाधीश मंदिर से पीठाधीश्वर की आज्ञा से द्वारकाधीश मंदिर अधिकारी भगवतीलाल पालीवाल, सहायक अधिकारी गणेशलाल सांचीहर, समाधानी राजकुमार गौरवा, मंदिर पुरोहित पंडित बिंदु लाल शर्मा, कोठा प्रभारी कमलेश पालीवाल, गिरीश रावल द्वारकाधीश मंदिर बैंड की धुन पर लवाजमे के साथ होली थड़ा पहुंचे। होली की पूजा-अर्चना की गई। कुमावत समाज के पंच, पटेलों की मौजूदगी में होली की परिक्रमा की। मुहूर्त में होलिका का दहन किया गया। ठाकुरजी के शयन दर्शन में प्रभु के सम्मुख गुलाल उड़ाया। मंगलवार को डोल उत्सव पर ठाकुरजी को विशेष शृंगार धराया। डोल के दर्शन में ठाकुरजी को डोल तिबारी में झूले में विराजित किया गया। यहां तृतीय पीठाधीश्वर बृजेश कुमार महाराज तृतीय, पीठ राजकुमार वेदांत कुमार गोस्वामी ने प्रभु के साथ श्रद्धालुओं पर जमकर गुलाल उड़ाया।

देवगढ़ | महल में विदेशी पर्यटकों ने होली खेली। नगर के बड़ी होली थान, बांडी होली, देवगढ़ महल, गुजरी दरवाजा, सोलंकी दरवाजा पर होली दहन किया गया।

कुंभलगढ़ | गांवों में मुहूर्त में होलिका दहन किया। कुंभलगढ़ दुर्ग घूमने पहुंचे पर्यटकों ने भी दुर्ग भ्रमण के बाद होली खेलने का आनंद लिया। बुधवार को केलवाड़ा थाने पर पुलिस जवानों ने होली खेली।

लसानी | गांव में मुख्य होलिका दहन रावला चौक में पंडित भंवरलाल पुरोहित के मंत्रोच्चार के साथ होली की पूजा-अर्चना करवाकर होलिका दहन किया। ब्रह्मपुरी, आखरिया चौक, खटीक मोहल्ला, न्यू कॉलोनी आदि में होलिका दहन किया गया।

केलवा | कस्बे में होलिका दहन, धुलंडी पर्व मनाया। कस्बावासियों ने जमकर गुलाल खेला।

श्रीजी की हवेली में रसिया गान को विराम : डोल माई झूलत है ब्रजनाथ, संग शिभित वृषभान नंदिनी ललिता विशाखा साथ... के भाव से मंगलवार को श्रीनाथजी हवेली में डोलोत्सव मनाया गया। श्रीलालन प्यारे को श्रीजी प्रभु के सम्मुख विराजित किया गया। श्रीजी प्रभु के श्रीचरणों में नूपुर धराए गए। राजभोग झांकी में ध्रुव बारी के नीचे डोल बांधा गया। इसे अधिवासित कर श्रीलालन प्यारे को विराजित किया। डोलोत्सव पर राजभोग की चार झांकियों के दर्शन खुले। चारों झांकियों में गोस्वामी विशाल बावा ने बाल स्वरूपों को गुलाल-अबीर से फाग खेलाया।

नाथद्वारा. शहर में मंदिर की होली के साथ एक साथ जलती होलियां। तस्वीर में शिव प्रतिमा भी दिख रही है। फोटो : भूपेश दुर्गावत

राजसमंद. शहर में जेके माेड़ स्थित द्वारिकाधीश मंदिर की हाेलिका दहन करते हुए। मौजूद लोग।

नाथद्वारा. नवधा सीढ़ियों काे बुहारने जाता बादशाह।
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