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संतों का संदेश : सफलता के लिए जिज्ञासा, धैर्यता, नेतृत्व की क्षमता, एकाग्रता जरूरी
देवगढ़ | होली चातुर्मास के तहत श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि ने गुरुवार को धर्म सभा में कहा कि मनुष्य की चिंतना शक्ति विचार को तथा कर्मठता, शक्ति प्रयोग को प्रेरित करती है। यह दोनों शक्तियां अनमोल हैं। इनके अभाव में जीवन सफल नहीं हो सकता है। उन्होंने अध्यात्म ज्ञान, चिंतन का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि कर्मठता शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकते। यथासमय उनका प्रयोग कर व्यक्ति पूरा लाभ प्राप्त कर सकता है। मुनि ने क्रोध को शांत करने के लिए संयम, साधना, क्षमा, दया, परोपकार, जैसे गुणों काे अपनाना चाहिए। सीता स्वयंवर में परशुराम के क्रोध को श्रीराम ने संयम भाव से शांत किया। सुकन मुनि ने कहा कि व्याधि, वंदना, जीवन को हताश करती है। प्रभु की वाणी शेरनी के दूध के सम्मान है, जिसका उपयोग कर साधना कर व्यक्ति मानव जीवन को सार्थक बना सकता है। अच्छे लोगों के मौन होने से बुरे लोगों की बुराइयां बढ़ रही है। डाॅ. वरुण मुनि ने बताया कि सफलता पाने के 4 गुण जिझासा, धैर्यता, नेतृत्व की क्षमता, एकाग्रता है। धर्मसभा में वीरभद्रसिंह चूंडावत, केसरीमल बुरड़, सुजानमल बुरड़, पंकज कोठारी, लेहरसिंह मेहता, महेन्द्र मेहता, गौतम जैन, मदनलाल भंडारी, अर्जुनलाल जीनगर, सुनील श्रीमाल, अंजना जोशी, रेखा सोनी सहित कई श्रावक मौजूद थे।