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बाघ टी-91 की मुकंदरा में शिफ्टिंग

कोटा/जयपुर | 5 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार हाड़ौती के मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघ की दहाड़ गूंज गई। वन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 04, 2018, 06:25 AM IST

कोटा/जयपुर | 5 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार हाड़ौती के मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघ की दहाड़ गूंज गई। वन विभाग ने बूंदी की रामगढ़ सेंचुरी में घूम रहे बाघ टी-91 को मुकंदरा में शिफ्ट कर दिया है। मुकंदरा को 9 अप्रैल 2013 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था।

रामगढ़ सेंचुरी के बांदरा पोल वनक्षेत्र में टी-91 बाघ को सुबह 5:15 बजे ट्रेंक्यूलाइज किया गया। सुबह 8:30 बाघ का हैल्थ चेकअप हुआ। डॉ. राजीव गर्ग की हरी झंडी पर उसे वहां से रवाना किया गया। रामगढ़ सेंचुरी से मुकंदरा तक का रूट पुलिस ने पूरी तरह सील कर दिया। वन विभाग के काफिले ने रामगढ़ सेंचुरी से मुकंदरा तक 165.3 किलोमीटर का सफर तय किया। इधर नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने बाघ को ले जाने की मंजूरी नहीं दी है। एनटीसीए का आरोप है कि बाघ को इस तरह शिफ्ट करना एक्ट का वायलेशन, जो सरासर गलत है। इस पर वन विभाग ने कहा कि विशेष परिस्थिति में ऐसा कर सकते हैं... आगे से एनटीसीए से मंजूरी लेंगे।

हाड़ौती क्षेत्र के लोगों को बाघ टी-91 के मुकंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान में सफलतापूर्वक ट्रांस लोकेशन पर बधाई। बाघ के इस क्षेत्र में आने से जन और जंगल, दोनों को फायदा होगा। -वसुंधरा राजे, मुख्यमंत्री

एनटीसीए के मेंबर सेक्रेट्री डॉ. देवब्रत स्वाईं से सवाल-जवाब

आपकी आपत्ति के बावजूद रणथंभौर से मुकंदरा में बाघ शिफ्ट हो गया?

हां, मेरे को पता लगा। अब वन विभाग बाघ सुरक्षा की सारी जिम्मेदारी लेगा।

ऑब्जेक्शन का क्या मतलब रहा, अब एनटीसीए क्या कर सकता है?

हम कुछ एक्शन लेंगे। ये सब गलत है। एक्ट का वायलेशन है।

इससे पहले भी ऐसा हुआ?

ये लोग नहीं मानेंगे तो कोर्ट तो है ही।

जब कोर्ट को करना है तो फिर एनटीसीए का क्या मतलब

हम लीगली, फाइंनेंशियली कार्रवाई कर सकते हैं। हम भी देखते हैं कि ये कहां तक जा सकते हैं।

चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जीवी रेड्डी से सवाल-जवाब

एनटीसीए आपत्तियां लगा रहा था, वन विभाग ने बाघ को शिफ्ट कर दिया?

विशेष परिस्थितियों में बाघ को ट्रंकुलाइज करके छोड़ने की शक्तियां हैं, उन्हीं का प्रयोग करते हुए इसके आदेश दिए।

अभी मुकंदरा में और भी बाघ ले जाने हैं, उनको भी ऐसे ही करेंगे?

नहीं, उनसे पहले हम एनटीसीए से बात करेंगे।

सुरक्षा को लेकर क्या प्रबंध किए हैं?

जर्मनी की तकनीक वाला रेडियो कॉलर लगाया है। जिससे एक बार जीपीएस लोकेशन और करीब सात-आठ किलोमीटर में सिग्नल मिलते रहेंगे। हमारी टीमें तैनात रहेगी।

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