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इकलौती बेटी की विधवा मां ने लोक कलाकार पति की याद में स्कूल में बनवाया कक्षाकक्ष

लोक कलाकार के कोई बेटा नहीं, बेटी भी जाती है ससुराल, विधवा प|ी ने स्कूल में कक्षाकक्ष बनाकर यादों को अमर किया ...

Danik Bhaskar | May 12, 2018, 06:30 AM IST
लोक कलाकार के कोई बेटा नहीं, बेटी भी जाती है ससुराल, विधवा प|ी ने स्कूल में कक्षाकक्ष बनाकर यादों को अमर किया

रामसीन. कक्षा-कक्ष का उ्द्घाटन करते अतिथि।

कलाकार तगाराम के बेटा नहीं है, पर हिम्मत नहीं हारी

कलाकार तगाराम के एक ही बेटी है। बेटा नहीं है। शादी के बाद बेटी भी ससुराल चली गई। कलाकार की प|ी अणसी देवी अकेली हो गई। हालांकि, अपने भतीजे को साथ रखा हुआ है, लेकिन स्वयं पति कलाकार की यादों को अमर करने के लिए उन्होंने स्कूल में कक्षाकक्ष बनाने का निर्णय किया। बाद में करीब पांच लाख रुपए की लागत से एक कमरा बनाकर भेंट किया। गुरुवार को पूर्व आईएएस गंगासिह परमार व बीईईओ भंवरसिंह चारण की उपस्थिति में कक्षा कक्ष का उद्घाटन किया गया। परमार ने कहा कि संत भी लोगों के लिए आदर्श थे और उनकी प|ी ने जो संत के सपने को जो पूरा किया, निश्चित तौर पर अन्य समाजबंधुओं के लिए प्रेरणादायी रहेगा। इस अवसर पर प्रधानाचार्य रणाराम गर्ग, प्रधानाध्यापक महेन्द्र कुमार बावल, व्यवस्थापक तेजसिह राठौड़, भानाराम बोस, ओबसिह राठौड़, राणाराम गर्ग, भैराराम देवासी मौजूद थे।

आकाशवाणी में देते थे भजनों की प्रस्तुतियां

कलाकार संत तगाराम ने करीब सौ से अधिक भजनों की रचनाएं की थी। कई बार उन्होंने जोधपुर आकाशवाणी में भी अपनी प्रस्तुतियां दी। रामसीन में भगवान आपेश्वर को समर्पित एक भजन हीरो लादो आपेश्वर थोरे नोम रो..., गीत कलाकार तगाराम का बेहतरीन भजन रहा है