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शिक्षा संस्थानों को स्वायत्तता निजीकरण का कदम तो नहीं?

करंट अफेयर्स पर 30 से कम उम्र के युवाओं की सोच देवेन्द्रराज सुथार, 21 जयनारायण व्यास, विश्वविद्यालय जोधपुर ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 31, 2018, 06:10 AM IST

शिक्षा संस्थानों को स्वायत्तता निजीकरण का कदम तो नहीं?
करंट अफेयर्स पर 30 से कम उम्र के युवाओं की सोच

देवेन्द्रराज सुथार, 21

जयनारायण व्यास, विश्वविद्यालय जोधपुर

devendrasuthar196@gmail.com

स्वायत्तता हासिल करना देश के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों की बहुत पुरानी लालसा है। लेकिन, यह चाहत यथासंभव कम-से-कम प्रशासनिक हस्तक्षेप के प्रसंग में रही है। हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्री ने उच्च शिक्षा से जुड़ी 62 संस्थाओं को स्वायत्त घोषित कर दिया।

इस निर्णय से काफी सवाल उठते हैं। विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रमों की संख्या तो बढ़ती जा रही है, लेकिन उन पाठ्यक्रमों को चलाने के लिए शिक्षकों की भारी कमी हैं। देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में पढ़ने का सपना देखने वाले छात्र-छात्राएं जब यहां दाखिला लेते हंै, तो अपने आप को ठगा हुआ महसूस करते हैं। मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता प्रदान करने का निर्णय विश्वविद्यालयों को खुद के पाठ्यक्रम खोलने, उनके शुल्क निर्धारित करने से लेकर शिक्षकों के चयन और कर्मचारियों के वेतन निर्धारित करने तक का निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासन के हाथों में रहेगा। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी आदि विकसित देशों में स्वायत्त संस्थानों ने उत्कृष्ट शैक्षणिक गुणवत्ता के मानदंड स्थापित किए हैं। लेकिन, उन देशों की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा का तंत्र मुख्यतः सरकार चलाती है और आर्थिक विषमता किसी मेधावी छात्र की विकास यात्रा में अधिक बाधक नहीं बनती। उच्च शिक्षा संरचना में उनके स्कॉलरशिप सिस्टम की कोई तुलना हमारे देश के सिस्टम से नहीं है। हमारे यहां फीस की अधिकता का सीधा-सा मतलब है कि धनी लोग ही अपने बच्चों को उसमें भेज सकते हैं।

हम भारत हैं, अमेरिका, ब्रिटेन नहीं हैं। हमारे देश में आर्थिक विषमता दुनिया में सबसे अधिक है। हमारी नीतियां हमारी परिस्थितियों, हमारे लोगों के अनुसार बननी चाहिए। अपना सिलेबस डिजाइन करने और अपनी परीक्षा प्रणाली विकसित करने की अकादमिक और प्रशासनिक स्वायत्तता स्वागतयोग्य कदम हो सकता है, अगर मनमानी फीस बढ़ाने की छूट न हो। अगर इस मनमानी की छूट दी जा रही है तो यह सीधा-सीधा निजीकरण की ओर बढ़ता कदम है।

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Web Title: शिक्षा संस्थानों को स्वायत्तता निजीकरण का कदम तो नहीं?
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