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जिले के रानी कस्बे

जिले में महिला शिक्षा की जननी सुभद्रा जैन : 61 साल पहले जब बेटियां घर से बाहर भी नहीं निकलती थी, वह गांव-गांव घूमी, रखी...

Dainik Bhaskar

Mar 08, 2018, 06:20 AM IST
जिले के रानी कस्बे
जिले में महिला शिक्षा की जननी सुभद्रा जैन : 61 साल पहले जब बेटियां घर से बाहर भी नहीं निकलती थी, वह गांव-गांव घूमी, रखी विद्याबाड़ी की नींव


जिले के रानी कस्बे के पास छोटे से गांव खीमेल में 61 साल पहले चार बच्चों के साथ महिला शिक्षा की नीव रखी थी सुभद्रा जैन ने। आज जिले की सबसे बड़ी महिला शिक्षण संस्थान विद्याबाड़ी उन्हीं सुभद्रा की सोच का नतीजा है। वे चाहती थीं कि प्रदेश की ख्यात वनस्थली विद्यापीठ जैसी शिक्षण संस्था मारवाड़ में विकसित हो। इसलिए उन्होंने जैन समाज के भामाशाहों को मुहिम में जोड़ा। एक-एक से मिलकर पहले बालवाड़ी की स्थापना की। उसकी नींव एक छोटे से झोंपड़ीनुमा आश्रम में सुभद्रा जैन ने रखी गई थी। लेकिन आज यह संस्था देशभर में महिला शिक्षा, बेटियों की सुरक्षा, अनुशासन और नवाचारों के लिए प्रसिद्ध है। आज जिलेभर के प्रवासी जैन बंधु इस संस्था को चला रहे हैं। अध्यक्ष रतनचंद ओसवाल का कहना है कि भामाशाहों की मदद से जल्द ही संस्था में बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पीजी कोर्सेज, व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं। मारवाड़ की पहली महिला विश्वविद्यालय बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा चुके हैं। उम्मीद है इस साल के अंत तक जिलेवासियों को यह तोहफा भी मिल जाए। वर्ष 1956 में सुभद्रा जैन ने बच्चियों को शिक्षा से जोड़ने की मुहिम शुरू की और अपने पारिवारिक जीवन को त्याग कर एक छोटी सी झोंपड़ी में रहने लगी। यहीं से बालवाड़ी नाम का आश्रम बनाया और 4 बच्चियों के साथ शिक्षा की शुरुआत की। संस्था के पदाधिकारी बताते हैं कि महज दो साल में ही मुहिम से गांवों की बच्चियां जुड़ने लगी और 1958 में इसकी नींव रखी गई। 1960 में बालवाड़ी से इसका नाम विद्यावाड़ी रखा गया और आज यहां हिंदी माध्यम में राजस्थान बोर्ड व अंग्रेजी माध्यम में सीबीएसई बोर्ड के अलावा स्नातक स्तर पर देशभर की करीब 2 हजार से अधिक बच्चियां शिक्षा ले रही हैं।

एक थी सुभद्रा

रानी के पास खीमेल गांव में जिले की पहली महिला शिक्षण संस्था की नींव रखी, अब जैन समाज कर रहा संचालन

घर-परिवार त्यागा, बेटियों की पढ़ाई के लिए एक मंच पर लाई जैन समाज के भामाशाहों को, जीवनभर की कमाई भी सौंप गई संस्था को, जिले की हजारों बेटियां इसी संस्था में पढ़कर सशक्त हुईं, इसीलिए महिला दिवस पर उनके योगदान को याद करना जरूरी

जहां आश्रम था वहीं रखी विद्यावाड़ी की नींव, राष्ट्रपति ने सम्मानित किया था सुभद्रा को

जहां सुभद्रा जैन ने बच्चों को पढ़ाने के लिए बालवाड़ी आश्रम बनाया वहीं पर विद्यावाड़ी की नींव रखी गई। उनके इस समर्पण के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार के साथ 1989 में उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया। शिक्षा जगत में उन्हें मां सुभद्रा जैन की उपाधि दी गई। संस्था परिसर में उनकी प्रतिमा आज भी उनके प्रयासों की याद दिलाती है।

सुभद्रा जैन

4 बच्चों और 1 शिक्षिका से शुरू हुई विद्याबाड़ी में अब 275 से ज्यादा लोग दे रहे सेवाएं

संस्था निदेशक गौरव शर्मा के अनुसार इन 4 बच्चों को वे खुद पढ़ाती थी। इसके बाद जैन समाज ने उनकी मुहिम को आगे बढ़ाया। क्षेत्र के लोग भी आगे आए। अब देशभर के 10 राज्यों की करीब 2 हजार बच्चियां स्कूली व उच्च शिक्षा ले रही हैं। वर्तमान में यहां 185 से अधिक फैकल्टी व 100 से ज्यादा नॉन टीचिंग स्टाफ है।

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