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मर्जी से हुई शादी रद्द करने का हक कोर्ट को नहीं : सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने सिर्फ हदिया के निकाह से जुड़े केस पर फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट निगरानी में एनआईए लव जिहाद मामले की जांच...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 09, 2018, 06:25 AM IST

मर्जी से हुई शादी रद्द करने का हक कोर्ट को नहीं : सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने सिर्फ हदिया के निकाह से जुड़े केस पर फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट निगरानी में एनआईए लव जिहाद मामले की जांच जारी रखेगा। उधर हदिया के पिता ने कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की बात कही है।

केरल के हदिया-शैफीन 287 दिन बाद फिर बने पति-प|ी

भास्कर न्यूज | नई दिल्ली

केरल लव जिहाद केस से चर्चित हुई हदिया उर्फ अखिला अशोकन और शैफीन जहां का निकाह बहाल हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया। दोनों 287 दिन बाद फिर पति-प|ी की तरह साथ रह सकेंगे। केरल हाईकोर्ट ने 24 मई 2017 को दोनों का निकाह रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए कहा कि ‘दो वयस्कों की मर्जी से हुई शादी में दखल का हक किसी कोर्ट के पास नहीं है। कोई तीसरा पक्ष ऐसी शादी में अड़ंगा नहीं डाल सकता।’ चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने यह भी साफ कर दिया कि एनआईए लव जिहाद से जुड़े आपराधिक पहलुओं की जांच जारी रखेगी। जरूरत पड़ने पर हदिया के पति शैफीन को गिरफ्तार भी किया जा सकता है। हदिया उर्फ अखिला ने दिसंबर 2016 में इस्लाम कबूल कर शैफीन से निकाह किया था। युवती के पिता केएम अशोकन ने इसे लव जिहाद बताते हुए बेटी का जबरन धर्म बदलवाने का आरोप लगाया था।

केरल हाईकोर्ट की दलीलें खारिज

हदिया ने माना कि उसने मर्जी से इस्लाम कबूला था: सुप्रीम कोर्ट

एनआईए जांच जारी रखेगा, शैफीन की गिरफ्तारी भी संभव

हदिया तो अच्छा-बुरा समझने की स्थिति में नहीं थी: केरल हाईकोर्ट

हदिया से बातचीत के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि वह अच्छा-बुरा समझने की हालत में नहीं है। लगता है कि उसका ब्रेनवाश हुआ है।

हदिया जब सही-गलत समझने की स्थिति में नहीं है तो शैफीन से निकाह का निर्णय सही कैसे हो सकता है?

पुलिस ने कहा है कि हदिया जैसी लड़कियां धर्मांतरण के बाद सीरिया भेजी जा रही हैं। हदिया ने भी सीरिया जाकर भेड़ पालने की बात कही थी।

हदिया ने कहा कि उसने मर्जी से इस्लाम कबूला और शैफीन से शादी की। हाईकोर्ट के पास असीम शक्तियां हैं। पर शादी रद्द करने के लिए नहीं। एनआईए की रिपोर्ट में कुछ संगठनों द्वारा धर्मांतरण की बात तो सामने आई है। पर इससे यह साबित नहीं होता कि निकाह कानून के अनुसार अमान्य है। हदिया के पिता भी ऐसा सबूत पेश नहीं कर पाए।

पिता बोले- बेटी को एक आतंकी के पास भेजना मेरे लिए दर्दनाक

अपनी बेटी को एक आतंकी के पास भेजना किसी भी पिता के लिए बेहद दर्दनाक होता है। अपना दर्द बता नहीं सकता। रिव्यू पिटीशन डालेंगे।' -केएम अशोकन (हदिया के पिता)

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Web Title: मर्जी से हुई शादी रद्द करने का हक कोर्ट को नहीं : सुप्रीम कोर्ट
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