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जनहित याचिका पर 13 साल बाद आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने शुक्रवार को इच्छा मृत्यु के लिए लिखी गई वसीयत को कानूनी मान्यता दे दी है। फैसले...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 10, 2018, 06:40 AM IST

सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने शुक्रवार को इच्छा मृत्यु के लिए लिखी गई वसीयत को कानूनी मान्यता दे दी है। फैसले में 5 सदस्यीय बेंच ने कई दार्शनिक बातें भी कीं। इसमें स्वामी विवेकानंद के कथनों के साथ ही मशहूर कवियों की कविताओं का भी जिक्र किया गया। सीजेअाई दीपक मिश्रा ने विवेकानंद की उक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि जीवन एक दिव्य ज्योति की तरह है। इसका सम्मान होना चाहिए। अन्य जजों ने क्या कहा, पढ़ें उनकी बातें...

क्या है इच्छा मृत्यु

इच्छा मृत्यु यानी यूथनेशिया। दुनियाभर में लंबे समय से मर्सी किलिंग(दया मृत्यु) व यूथनेशिया पर बहस चल रही है। इजाजत मांगी जा रही है। मेडिकल में इच्छा-मृत्यु कई तरीके से होती है।

5 तरीके इच्छा मृत्यु के

वॉलंटरी एक्टिव यूथनेशिया: मरीज की मंजूरी के बाद जानबूझकर ऐसी दवा देना, जिससे उसकी मौत हो जाए। यह केवल नीदरलैंड और बेल्जियम में वैध है।

इनवॉलंटरी एक्टिव यूथनेशिया : मरीज खुद अपनी मौत की मंजूरी देने में असमर्थ हो, तब उसे मरने के लिए दवा देना। यह दुनिया में गैरकानूनी है।

पेसिव यूथनेिशया: मरीज की मृत्यु के लिए इलाज बंद करना। भारत में सुप्रीम कोर्ट ने इसी का अधिकार दिया है।

एक्टिव यूथनेिशया : ऐसी दवा देना, ताकी मरीज को राहत मिले। पर बाद में मौत हो जाए। यह कुछ देशों में वैध है।

असिस्टेड सुसाइड: सहमति के आधार पर डॉक्टर मरीज को ऐसी दवा देते हैं, जिसे खाकर आत्महत्या की जा सकती है।

16 जनवरी, 2006: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेडिकल काउंसिल को केस में शामिल किया। डॉक्यूमेंट्स भी मांगे।

31 जनवरी: 2007: सुप्रीम कोर्ट केस में शामिल सभी पक्षों से डॉक्यूमेंट्स जमा करने का कहा।

सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय बेंच ने इच्छा मृत्यु पर फैसले में कई दार्शनिक बातें कीं

जस्टिस सिकरी|रोते हुए आते हैं सब, हंसता हुआ जो जाएगा वो सिकंदर...

चार जजों के बहुमत के खिलाफ जस्टिस एके सिकरी ने अपना अलग नजरिया पेश किया। फैसले में कहा है कि किसी की जिंदगी लेने का अधिकार किसी दूसरे को नहीं दिया जा सकता। उन्होंने एक फिल्म के गीत ‘रोते हुए आते हैं सब, हंसता हुआ जो जाएगा। वो मुकद्दर का सिकंदर जानेमन कहलाएगा।’ का जिक्र किया। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू, बौद्ध, जैन धर्म में इच्छा मृत्यु नहीं है।

दुनिया के 21 देशों में अलग-अलग तरीके से इच्छा मृत्यु का अधिकार, भारत 22वां देश

मुंबई के दंपती मांग रहे इच्छा मृत्यु

मुंबई की 86 साल के नारायण व 78 साल की इरावती लावते पति-प|ी हैंं। इन्होंने कुछ समय पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिख कर इच्छा मृत्यु की मांग की थी। पर जवाब नहीं मिला। वे रिटायर्ड कर्मचारी हैं। पत्र में कहा था कि हम निःसंतान हैं, बीमारी से पीड़ित नहीं हैं। पर वे अपनी देखभाल नहीं कर सकते हैं। अब वे खुदकुशी करना चाह रहे हैं। इरावती ने पति से कहा है कि वो उन्हें 31 मार्च के बाद गला दबाकर मुक्त कर दें।

इन देशों में है अधिकारस्विट्जरलैंड, नीदरलैंड्स, लक्जमबर्ग, अलबानिया, कोलंबिया, जर्मनी, जापान, कनाडा, बेल्जियम, ब्रिटेन, आयरलैंड, चीन, न्यूजीलैंड, इटली, स्पेन, डेनमार्क, फ्रांस, रोमानिया, फिनलैंड में इच्छा मृत्यु का अधिकार है। इसके अलावा अमेरिका के 7 और ऑस्ट्रेलिया के एक राज्य में भी इसका कानून है। कई देशों में मामला कोर्ट में चल रहा है।

7 मार्च 2011: सुप्रीम कोर्ट ने कोमा में जी रहीं अरुणा शानबाग की ओर से दायर याचिका स्वीकार की। जर्नलिस्ट पिंकी की याचिका पर कहा कि परिवार की इजाजत पर ही अरुणा को इच्छा मृत्यु दी जा सकती है।

जस्टिस अशोक भूषण|सम्मान के साथ मरने का हक हमारा मौलिक अधिकार

जस्टिस अशोक भूषण ने चीफ जस्टिस के फैसले का समर्थन किया। फैसले में कहा है कि सम्मान के साथ मरने का अधिकार हमारा मौलिक अधिकार है। यह हक पूर्व में सुप्रीम कोर्ट की सवैधानिक पीठ ज्ञान कौर एक मामले में दे चुकी हैं। एक वयस्क व्यक्ति जो मृत्यु के कगार पर हो, वह इच्छा मृत्यु के लिए इलाज से इनकार कर लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने के लिए कह सकता है।

13 जनवरी 2014: चीफ जस्टिस पी सतशिवम के नेतृत्व में 3 जजों की बेंच ने मामले की अंतिम सुनवाई शुरू की।

फरवरी, 2015: सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथनेशिया यानी इच्छा मृत्यु की याचिका को संविधान पीठ में भेजा।

भारत का सबसे चर्चित मामला

बात, 27 नवंबर 1973 की है। अरुणा शानबाग मुंबई के अस्पताल में नर्स थीं। सोहनलाल वहां वार्ड ब्वॉय था। 23 साल की अरुणा चेंजिंग रूम में गई थीं। यहां सोहन ने अरुणा को दबोच लिया। चेन से करुणा का गला दबाकर दुष्कर्म की कोशिश की। इससे अरुणा के दिमाग की नसें फट गईं। अरुणा कोमा में चलीं गईं। आरोपी सोहन को 7 साल की सजा मिली। जर्नलिस्ट पिंकी विरानी द्वारा 2011 में अरुणा के लिए की गई इच्छा मृत्यु की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दी।

दुनिया का सबसे चर्चित मामला

अमेरिकी की टेरी शियावो दुनियाभर में कई साल चर्चा में रहीं। टेरी 1990 में घर में हार्ट फेल होने की वजह से गिरीं और कोमा में चली गईं। 10 साल के बाद उसके पति ने डॉक्टरों से कहा कि वे टेरी का लाइफ सपोर्ट निकाल दें। देश में बहस छिड़ी कि यदि लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटा दिया जाएगा तो इच्छा मृत्यु को मान्यता मिल जाएगी। मामला अमेरिकी संसद कांग्रेस तक गया, जहां बहस हुई। कोई फैसला आता, उसके पहले ही 18 मार्च 2005 को टेरी की मौत हो गई।

जस्टिस चंद्रचूड|जीवन व मृत्यु अलग नहीं, मौत जीवन का आखिरी पड़ाव है

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने फैसले में कहा है कि जीवन और मृत्यु अलग नहीं हैं। हमारा जीवन लगातार और हर क्षण बदलता रहता है। हमारे शरीर का बदलाव हर पल होता है, लाखों सेल हर वक्त बनते रहते हैं। दिमाग कभी नहीं रुकता, सोचने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। जीवन को कभी मौत से अलग करके नहीं देख सकते। जो है उसे मरना है। मौत जीवन का आखिरी पड़ाव है।

अरुणा 42 साल तक कोमा में रहीं, लेकिन कोर्ट ने इच्छा मृत्यु नहीं दी

टेरी शियावो की इच्छा मृत्यु के लिए अमेरिका की संसद में बहस हुई

15 फरवरी 2016: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह मामले में विचार कर रहा है।

11 अक्टूबर 2017: सीजेआई दीपक मिश्रा की बेंच ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा।

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