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प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल की सबसे बड़ी लापरवाही

जयपुर | जयपुर के एसएमएस अस्पताल ने राज्यपाल कल्याण सिंह को स्वाइन फ्लू से पीड़ित बता दिया। इसके बाद चिकित्सा विभाग...

Dainik Bhaskar

Mar 06, 2018, 06:45 AM IST
प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल की सबसे बड़ी लापरवाही
जयपुर | जयपुर के एसएमएस अस्पताल ने राज्यपाल कल्याण सिंह को स्वाइन फ्लू से पीड़ित बता दिया। इसके बाद चिकित्सा विभाग और राजभवन में हड़कंप मच गया। देर रात राज्यपाल को राज्य सरकार के विशेष विमान से दिल्ली ले जाया गया। अपोलो हॉस्पिटल में जांच की गई। रिपोर्ट आई कि राज्यपाल को स्वाइन फ्लू नहीं है। उन्हें छुट्‌टी भी दे दी गई। बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया आखिर किस अस्पताल की रिपोर्ट सही है। राजभवन ने एसएमएस की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा है कि राज्यपाल स्वस्थ हैं और वे 7 मार्च को पोती की शादी में अलीगढ़ जाएंगे। राजभवन ने कहा-जांच रिपोर्ट को लेकर ऐसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी सरकार को उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए। बता दें कि राज्यपाल को सर्दी-जुकाम की शिकायत थी। रविवार दोपहर एक बजे एसएमएस में सैंपल लिए गए। शाम चार बजे रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्हें दिल्ली ले जाते ही मामला उलझ गया। वहां से रिपोर्ट निगेटिव आते ही सोमवार को प्रदेश के चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ व हैल्थ सैक्रेट्री वीनू गुप्ता ने एसएमएस प्रशासन को तलब कर लिया। राज्यपाल के पहले वाले सैंपल की फिर जांच कराई तो स्वाइन फ्लू पॉजिटिव निकला। हालांकि तब तक दिल्ली की निगेटिव रिपोर्ट के आधार पर राज्यपाल को छुट्‌टी देने की तैयारी भी हो गई। रिपोर्ट पर बवाल के बाद चिकित्सा मंत्री ने विभाग के सचिव आनंदकुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। शेष | पेज 4

कमेटी में उनके अलावा एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. यूएस अग्रवाल और माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. आरके माहेश्वरी भी हैं। यह कमेटी रिपोर्ट की जांच के अलावा राज्यपाल के स्वास्थ्य व जांच की मॉनिटरिंग करेगी।

कॉलेज प्राचार्य डॉ. यूएस अग्रवाल के अनुसार रविवार को मशीन में एक साथ दस सैंपल लगाए गए थे। जिसमें से दो पॉजिटिव आए थे। इनमें एक राज्यपाल कल्याण सिंह का भी सैंपल था।

जांच करा रहे हैं : हमारी रिपोर्ट सही है। हमारे पास एडवांस लैब है और टीम भी एक्सपर्ट है। इसलिए गलती की गुंजाइश कम है। फिर भी हम हर स्तर पर जांच कर रहे हैं। -डॉ. डीएस मीणा, अधीक्षक, एसएमएस

एसएमएस ने राज्यपाल को बताया स्वाइन फ्लू, दिल्ली ले गए तो रिपोर्ट निगेटिव निकली, राजभवन ने कहा-गंभीर मामला, उच्चस्तरीय जांच हो

विधायक को बता दिया था स्वाइन फ्लू

विधायक अमृता मेघवाल काे भी एसएमएस की जांच रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू बताया गया था। करीब 24 घंटे बाद उन्होंने एक निजी अस्पताल में जांच कराई तो स्वाइन फ्लू निगेटिव निकला। तब चिकित्सा विभाग ने दावा किया था कि दवा के असर से ये हुआ है। अब यही सवाल राज्यपाल के मामले में भी उठ रहा है...

दवा लेने से रिपोर्ट निगेटिव तो नहीं आ गई?

फिजिशियन एक्सपर्ट की राय है कि इतनी जल्दी किसी भी दवा से स्वाइन फ्लू निगेटिव नहीं हो सकता। किसी भी दवा का असर आने में कम से 24 से 48 घंटे का समय लगता है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि राज्यपाल को यहां स्वाइन फ्लू पॉजिटिव आ जाए और आठ घंटे बाद की गई जांच में निगेटिव।

बढ़ता खौफ : दो माह में 101 मौतें, 1,144 पॉजिटिव

स्वाइन फ्लू में राजस्थान देश में पहले नंबर पर। जयपुर में इस साल अब तक 732 पॉजिटिव मिल चुके हैं, जबकि 30 मौतें हुई हैं।

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राज्यपाल दरबारा सिंह की लू लगने से मौत हो गई थी तो सीएम बरकततुल्लाह को ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिला

एसएमएस के डॉक्टरों ने तो कल्याण सिंह को स्वाइन फ़्लू से पीड़ित घोषित कर दिया। लेकिन दिल्ली के अस्पताल ने रिपोर्ट दी कि उन्हें स्वाइन फ्लू नहीं है। सवाल तैरने लगे क्या यह प्रदेश के सबसे बड़े ओहदे पर बैठे प्रतिनिधि के जीवन के साथ खिलवाड़ तो नहीं है? मर्ज पुराना है। मुख्यमंत्री बरकततुल्ला खान, राज्यपाल वसंत दादा पाटिल, दरबारा सिंह, निर्मल चंद जैन तक की मौत के कारणों पर भी सवालिया निशान लग चुके हैं। बरकततुल्लाह खान दिल व दमे के मरीज़ थे। लिहाजा, इस रोग से जुड़े सभी उपकरण सीएम हाउस में होने चाहिए थे। लेकिन जिस समय उनको दिल का दौरा पड़ा उस वक़्त सीएम हाउस में ऑक्सीजन का सिलेंडर तक नहीं था। न ही कोई हार्ट स्पेशलिस्ट। उनकी प|ी बदहवास हालत में सिलेंडर और हार्ट स्पेशलिस्ट के लिए अपने मरते पति को छोड़ कर एसएमएस में इनको तलाशती रहीं। और बरक़त साब ने इलाज़ के अभाव में दम तोड़ दिया। क्या कोई कल्पना कर सकता है कि कोई राज्यपाल सिर्फ लू लगने से मर जाए। लेकिन सिर्फ 24 दिन राजस्थान के राज्यपाल रहे दरबारा सिंह की लू लगने से मौत हो गई। शेष | पेज 4

वो मई 1998 में पोकरण में हुए परमाणु परीक्षण के दौरान प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ थे। जयपुर लौटे और बीमार पड़ गए। पोकरण की यात्रा में उनको लू लग गई। मप्र के रहने वाले निर्मल चंद जैन की भी राजस्थान में राज्यपाल के पद पर रहते हुए मृत्यु हुई थी। उनकी मौत के बाद उनकी प|ी को जयपुर की चिकित्सा व्यवस्था को सार्वजनिक रूप से कोसते हुए सुना गया था।

वसंत दादा पाटिल को कई गंभीर बीमारियां थीं। उनकी बीमारी का एसएमएस के डॉक्टर्स अंदाजा ही नहीं लगा सके। बीमारी बेकाबू हो गई। अगर तब के प्रधानमंत्री राजीव गांधी उनको इलाज के लिए जयपुर से मुंबई ले जाने को अपना निजी विमान पवनहंस नहीं भेजते तो दादा के जीवन का जयपुर आखिरी पड़ाव होता।

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