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गर्भपात रैकेट पकड़वाने के लिए अपनी कोख खतरे में डाली

Dainik Bhaskar

Mar 11, 2018, 06:55 AM IST

Rani News - गर्भवती महिलाओं की अवैध सोनाेग्राफी करने वाले डॉक्टर्स और दलालों के रैकेट का भंडाफोड़ करवाने के लिए महिलाएं आगे आ...

गर्भपात रैकेट पकड़वाने के लिए अपनी कोख खतरे में डाली
गर्भवती महिलाओं की अवैध सोनाेग्राफी करने वाले डॉक्टर्स और दलालों के रैकेट का भंडाफोड़ करवाने के लिए महिलाएं आगे आ रही हैं। पीसीपीएनडीटी (प्री-कॉन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक एक्ट) की कार्रवाई में गर्भवती महिलाएंं दलालों और अवैध सोनोग्राफी करने वाले डॉक्टरों का सामना कर उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा रही हैं। राजस्थान में पिछले साल सबसे ज्यादा 42 ऐसे ऑपरेशन चलाए गए। इनमें गर्भवती महिलाएं पीसीपीएनडीटी की टीम के माध्यम से सोनाग्राफी सेंटर्स पर गर्भ के लिंग की जांच कराने पहुंची और जाल बिछाकर ऐसे रैकेट्स का भंडाफोड़ किया। राज्य में पीसीपीएनडीटी सेल के प्रमुख सीनियर आईएएस नवीन जैन कहते हैं कि बगैर डिकॉय महिला के कार्रवाई संभव नहीं है।

इस तरह की कार्रवाई का ही परिणाम है कि राजस्थान के झुंझुनु जिले ने लिंगानुपात में अभूतपूर्व सुधार किया है। 2011 में यहां 1000 लड़कों के मुकाबले महज 837 लड़कियां जन्म ले रही थीं। लेकिन अब प्रति हजार लड़कियों की संख्या सुधरकर 955 हो गई है। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के झुंझुनु से पूरे देश के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाआे अभियान की शुरुआत की है। जानते हैं एेसी कुछ महिलाओं के बारे में जो पीसीपीएनडीटी स्पेशल टीम के साथ उन स्थानों पर भी गईं, जहां जान का खतरा था, लेकिन ये घबराई नहीं और कार्रवाई पूरी होने तक पीछे नहीं हटीं।

दलाल तीन घंटे तक घुमाता रहा, उल्टियां होती रहीं, हार्ट पेशेंट थीं; पर डरी नहीं, कार्रवाई करवाकर मानी

सुनीता राठौर

दलाल आगरा ले गया छुपकर बताई लोकेशन

मिलिए बूंदी की सुनीता राठौर (28) से। 2017 में वे दो अलग-अलग कार्रवाइयों में पीसीपीएनडीटी सेल के साथ नकली ग्राहक बनकर गईं। एक बार तो उनकी जान को खतरा देख टीम के भी हाथ-पांव फूल गए थे। बूंदी के पीसीपीएनडीटी कॉर्डिनेटर राजीव लोचन बताते हैं कि हमें दौसा जिले के एक दलाल के मार्फत कार्रवाई करनी थी। उसमें हम सुनीता को साथ ले गए। दलाल हमें लिंग परीक्षण के लिए आगरा ले गया। वहां से करीब 100 किमी दूर फिरोजाबाद ले गया। शक हुआ तो दलाल ने सुनीता को अकेले ही साथ लिया और अलग-अलग गाड़ियां बदलकर घुमाता रहा। करीब 3 घंटे तक हमें उसकी लोकेशन भी नहीं मिल पाई। हमारी पूरी टीम कांप गई, क्योंकि डिकॉय महिला की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। बाद में किसी तरह मौका पाकर सुनीता ने हमें लोकेशन बताई तो हम पहुंचे और उसे सुरक्षित संभाला तथा दलाल को गिरफ्तार किया। शेष | पेज 7 पर

हालांकि इस कार्रवाई में डॉक्टर को हम नहीं पकड़ पाए। सुनीता बूंदी समेत पूरे प्रदेश के लोगों के लिए इंस्पिरेशन से कम नहीं, क्योंकि उसे पहले से दो बेटियां हैं और उसकी मदद से किए गए दोनों डिकॉय में उसे गर्भ में बेटी होने की जानकारी दी जा चुकी थी। आम तौर पर डिकॉय होने के बाद संबंधित महिला की भी यह निगरानी कराई जाती है कि कहीं वह गर्भपात नहीं करा ले, लेकिन सुनीता ने उसी वक्त कह दिया था कि बेटी है तो भी कोई बात नहीं, मैं जन्म दूंगी और ऐसा ही किया। डिकॉय के बाद हुई उसकी बेटी आज 6 महीने की हो चुकी है। उसका पति धनराज पेशे से ड्राइवर है। जो उसकी इस पहल पर हर कदम साथ देता है और कभी पीछे नहीं हटता। धनराज कहता है कि मेरी प|ी के प्रयास से यदि एक बेटी की भी हत्या होने से बचती है तो मुझे उस पर गर्व है। तीनों बेटियों के साथ यह परिवार खुश है।

सीमा राठौर

सफर में बिगड़ी सेहत, फिर भी बोली-कार्रवाई कराकर लौटूंगी

देई
क्षेत्र की सीमा राठौर भी एक कार्रवाई में डिकॉय रहीं। कार्रवाई के लिए सीमा को बूंदी से गुजरात लेकर जाना पड़ा। रास्ते में उल्टियां शुरू हो गईं। एक बारगी हमें लगा कि कार्रवाई नहीं कर पाएंगे। अधिकारियों ने कार्रवाई को ड्रॉप कर महिला को वापस घर पहुंचाने की बात कही, लेकिन सीमा पीछे नहीं हटी। गुजरात के मोड़सा में उसकी मदद से एक रजिस्टर्ड डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया। उसे भी पहले से बेटी थी और लिंग परीक्षण में भी बेटी ही बताई गई, जिसे बाद में जन्म दिया।

अपनी तीन बेटियों के साथ सुनीता राठौर।

डोली कंवर

2 कार्रवाई में 3 दलाल, 2 डॉक्टर पकड़वाए

लाखेरी
की रहने वाली हैं डोली कंवर। फरवरी, 2017 में दो कार्रवाइयों में जा चुकी हैं। डोली खुद हार्ट पेशेंट है और गर्भवती होने के बाद उन्हें कई बार सांस में तकलीफ भी हुई। लेकिन पीसीपीएनडीटी टीम को जब उनकी जरूरत थी तो उन्होंने कभी मना नहीं किया। बांसवाड़ा और अलवर में उनकी मदद से दो सफल ऑपरेशन हो सके, जिनमें दो डॉक्टर व तीन दलाल गिरफ्तार किए जा सके।

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