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पेज 1 का शेष

हालांकि इस कार्रवाई में डॉक्टर को हम नहीं पकड़ पाए। सुनीता बूंदी समेत पूरे प्रदेश के लोगों के लिए इंस्पिरेशन से कम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 11, 2018, 06:55 AM IST

हालांकि इस कार्रवाई में डॉक्टर को हम नहीं पकड़ पाए। सुनीता बूंदी समेत पूरे प्रदेश के लोगों के लिए इंस्पिरेशन से कम नहीं, क्योंकि उसे पहले से दो बेटियां हैं और उसकी मदद से किए गए दोनों डिकॉय में उसे गर्भ में बेटी होने की जानकारी दी जा चुकी थी। आम तौर पर डिकॉय होने के बाद संबंधित महिला की भी यह निगरानी कराई जाती है कि कहीं वह गर्भपात नहीं करा ले, लेकिन सुनीता ने उसी वक्त कह दिया था कि बेटी है तो भी कोई बात नहीं, मैं जन्म दूंगी और ऐसा ही किया। डिकॉय के बाद हुई उसकी बेटी आज 6 महीने की हो चुकी है। उसका पति धनराज पेशे से ड्राइवर है। जो उसकी इस पहल पर हर कदम साथ देता है और कभी पीछे नहीं हटता। धनराज कहता है कि मेरी प|ी के प्रयास से यदि एक बेटी की भी हत्या होने से बचती है तो मुझे उस पर गर्व है। तीनों बेटियों के साथ यह परिवार खुश है।

फिर भी चिकनगुनिया...

उधर फ्रांस की कंपनी सनोफी ने डेंगू से बचाव के लिए वैक्सीन लॉन्च किया है, लेिकन भारत सरकार ने इसे इजाजत नहीं दी है। कंपनी चाहती है कि बिना क्लीनिकल ट्रायल के भारत में इसे इजाजत दे दी जाए, वहीं सरकार का कहना है कि जिन देशों में इसे लॉन्च किया गया है, वहां भी इसके सकारात्मक परिणाम नहीं आए हैं।

राष्ट्रीय मलेरिया संस्थान की निदेशक डॉ. नीना वालेचा बताती हैं कि मैदानी इलाकों में तो मलेरिया के मरीजों की कमी हुई है, लेकिन हिमालयी राज्यों में अब मलेरिया के मामले सामने आने लगे हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से इस तरह की स्थिति हुई है। डॉ.वालेचा ने बताया कि विश्व में अभी तक मलेरिया से बचाव के लिए कोई व्यावसायिक वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। आरटीएस-एस नाम से मलेरिया से बचाव के लिए अफ्रीकी देश में एक वैक्सीन तैयार की गई है, लेकिन यह बहुत कारगर नहीं है।

तलाक के बाद...

वैसे पिछले पांच सालों से डॉक्टर मेघा हरिद्वार में दुघाधारी चैरिटेबल ट्रस्ट के अस्पताल में सेवा कर रही थीं। मगर अब जम्मू में हैं और वहीं अपने लायक काम तलाश रही हैं।

प्रथम विश्वयुद्ध से...

यहां देशभक्ति का जज्बा ऐसा है कि 100 से अधिक युवा फौज में शामिल होने के लिए हर रोज जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। इनका मार्गदर्शन गांव के रिटायर्ड फौजियों द्वारा किया जाता है।

चार पीढ़ियों से कर रहे देश सेवा : काजीबसई गांव के 84 वर्षीय बुजुर्ग हाजी मोहम्मद रफीक बताते हैं कि उनका परिवार चार पीढ़ियों से देश की सुरक्षा के लिए फौज में शामिल रहकर सरहद पर तैनात हैं। उनके पिता अजीज उद्दीन वर्ष 1939 में फौज में शामिल रहे। उनके बाद वे खुद सीमा सुरक्षा बल में तैनात रहे। इसके बाद उनके पुत्र मोहम्मद शफीक ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। वे 2012 में रिटायर हुए। रफीक बताते हैं उनके अलावा गांव के और भी परिवारों में देश सेवा का क्रम पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है। वे कहते हैं कि हमारा गांव देश का संभवत: पहला ऐसा गांव है, जिसके फौजियों ने हर युद्ध में देश का नाम रोशन किया है।

राष्ट्रपति अवॉर्ड व मेडल ले चुके फौजी: इस गांव के युवा फौज में शामिल रहकर अपनी बहादुरी के लिए राष्ट्रपति अवॉर्ड व अन्य बहादुरी मेडल जीत चुके हैं। इनमें मोहम्मद हबीब शाह, हाजी मोहम्मद रफीक, हाजी मोहम्मद अब्बास, रहीसुद्दीन, मोहम्मद गफूर, मोहम्मद शकील, मोहम्मद शाबिर व मोहम्मद नासिर शामिल हैं। रिटायर्ड जवान काजी मोहम्मद असरफ बताते हैं कि 1914 के वर्ल्डवार में इस गांव के दो युवा शामिल थे। जबकि 1940 में 16, 1955 में दो और 1971 में 16 युवा सेना में शामिल रहकर सरहद पर लड़ाई लड़ चुके हैं। कारगिल युद्ध में भी गांव के युवाओं की सक्रीय भागीदारी रही थी।

हर सरहद पर गांव के युवा : रिटायर्ड फौजी शहर काजी मोहम्मद अशरफ बताते हैं कि देश की कोई ऐसी सरहद नहीं जहां गांव के युवा देश की सुरक्षा के लिए पहरेदारी न कर रहे हों। जम्मू कश्मीर, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, नगालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, प.बंगाल, असम, सिक्किम सहित सभी सीमाओं पर गांव के युवा तैनात हैं।

जयपुर जेल में...

आरोपी मनीष ने 4 मार्च को फेसबुक पर अपने साथियों के साथ जेल की वार्ड नंबर 3 की बैरक नंबर 2 और वार्ड नंबर पांच की बैरक की फाेटो शेयर की है। ग्रुप फोटो में 20 से ज्यादा अपराधी हैं। जयपुर सेंट्रल जेल की सुरक्षा के लिए करीब 250 पुलिसकर्मी तैनात हैं। उनमें आरएसी के 51, बॉर्डर होमगार्ड के 70, हाेमगार्ड के 25 और जेल सुरक्षा के 110 जवान हैं। इन पुलिसकर्मियों की आठ-आठ घंटे की तीन शिफ्टों में ड्यूटी होती है। ऐसे में तलाशी और सुरक्षा में इतनी संख्या में पुलिसकर्मियों के लगने के बाद भी जेल में बंद बदमाशों के पास आसानी से मोबाइल फोन पहुंच रहे है।

भरतपुर : 15 वर्षीया...

दोनों आरोपियों ने अश्लील वीडियो भी बना लिया और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर वे कई दिनों तक नाबालिग से दुष्कर्म करते रहे। जब पीड़िता ने मां को सारी कहानी बताई तो आरोपियों ने उसका अश्लील वीडियो वायरल कर दिया। इस मामले में आईपीसी की धारा 376 डी, पास्को एक्ट की धारा 3 व 4 तथा 67 बी आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है।

जांच जारी है, सभी दोषी लोगों को पकड़ा जाएगा: एसपी- नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले की जांच डीग वृत्त अधिकारी अनिल मीणा कर रहे हैं। साथ ही जो अश्लील वीडियो बनाई है उसकी भी गहनता से जांच की जा रही है कि वीडियो बनाने में और भी कितने लोग शामिल हैं। इस प्रकरण में जो भी शामिल हैं, उन सभी को पकड़ा जाएगा। पूरी जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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