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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- पुलिस अधिकारी एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट का काम कैसे कर सकता है

Danik Bhaskar | Apr 06, 2018, 06:55 AM IST

नई दिल्ली | दिल्ली में पुलिस को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की शक्तियां देने के मुद्दे पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताते हुए पूछा कि पुलिस अधिकारी एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के तौर पर कैसे काम कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में कहा गया है कि पुलिस की भूमिका जांच की होती है। लेकिन दिल्ली में पुलिस अधिकारियों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की शक्तियां दी जाती हैं। कई मामलों में वह जज के तौर पर काम करते हैं। इन्हें कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों के बेल बॉन्ड मंजूर या खारिज करने के अधिकार भी दिए गए हैं। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच के समक्ष दलील दी कि सीआरपीसी की धारा 21 में पुलिस को ऐसी शक्तियां देने की बात कही गई है। हालांकि, यह दलील नहीं मानते हुए कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील को उचित निर्देश लेने के बाद जवाब दायर करने का निर्देश दिया।

केंद्र ने पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट्स को डिग्री या डिप्लोमा देने का निर्णय भारतीय प्रबंधन संस्थानों के प्रबंधन पर छोड़ा

नई दिल्ली | केंद्र ने पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट्स को डिग्री या डिप्लोमा देने का निर्णय भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) के प्रबंधन पर छोड़ दिया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि मंत्रालय ने संस्थानों को अपने विद्यार्थियों को डिग्री देने की अनुमति दी है। लेकिन इस मुद्दे पर संस्थानों के बीच अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है। वे निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। संसद ने पिछले साल 20 दिसंबर को आईआईएम एक्ट को मंजूरी दी है। इसमें इन संस्थानों को डिग्री पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति दी गई है।