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शहजादा संग बादशाह ने 10 क्विंटल गुलाल से बांटी सुख-समृद्धि व्यापारी तिजोरी में रखकर आज शुभ मुहूर्त में शुरू करेंगे कारोबार

बादशाह की सवारी रवाना होने से पहले धानमंडी परिसर में बादशाह ने सैकड़ों शहरवासियों को शगुन रूपी खर्ची बांटी। यह...

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 09:10 AM IST
शहजादा संग बादशाह ने 10 क्विंटल गुलाल से बांटी सुख-समृद्धि व्यापारी तिजोरी में रखकर आज शुभ मुहूर्त में शुरू करेंगे कारोबार
बादशाह की सवारी रवाना होने से पहले धानमंडी परिसर में बादशाह ने सैकड़ों शहरवासियों को शगुन रूपी खर्ची बांटी।

यह है मान्यता

यह परंपरा 165 वर्ष से भी अधिक पुरानी बताई जाती है और लगातार इस परंपरा का निर्वाह किया जा रहा है। हालांकि अजमेर में यह परंपरा कुछ समय बंद रहीं है। इस परंपरा के पीछे एक कहानी प्रचलित है। कहानी के अनुसार एक बार बादशाह अकबर शिकार के लिए जंगल में गया तो उसका सामना खूंखार डाकुओं से हो गया। डाकू अकबर पर भारी पड़े और अकबर संकट में फंस गया। लेकिन तभी अकबर के साथ चल रहे सेठ टोडरमल अग्रवाल ने अपनी समझदारी से अकबर को डाकुओं से बचा लिया। टोडरमल ने न केवल अकबर की जान बचाई बल्कि माल भी लुटने नहीं दिया। टोडरमल के इस काम से खुश होकर अकबर ने ढाई दिन के लिए सेठ टोडरमल अग्रवाल को मुगल सल्तनत का बादशाह बना दिया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। टोडरमल को ढाई दिन के लिए बादशाह बनाने की खबर जब बीरबल को मिली तो वह खुशी से झूम उठे। इसलिए बादशाह की सवारी के आगे बीरबल के प्रतीक के तौर पर ब्राह्मण समुदाय के व्यक्ति को रखा जाता है। सवारी शुरू होने से पहले बीरवल बादशाह को सलाम करता है। इसी परंपरा का निर्वहन पाली और ब्यावर में भी किया जा रहा है।

राजनीति में अलग-अलग, पर सामाजिक तौर पर हैं एक

पाली. शहर में होली पर्व को लेकर शनिवार को निकाली गई बादशाह की सवारी में भाजपा के सरकारी उपमुख्य सचेतक मदन राठौड़ व कांग्रेस के पूर्व विधायक भीमराज भाटी दोनाें एक साथ पहुंचे। एक बारगी आयोजकों के बीच गांवशाही गैर का झंडा किसे थमाएं, कई लोग असमंजस की स्थिति में आ गए। पर कुछ ही देर में दोनों दिग्गज नेताओं ने एक दूसरे कहा भले ही हम राजनीति के अखाड़े में अलग-अलग है, पर सामाजिक तौर पर एक है। गौरतलब है कि मदन राठौड़ व भीमराज भाटी दोनों एक ही जाति के है। पर एक भाजपा नेता तो दूसरा कांग्रेस नेता है।

बादशाह की सवारी के बाद गुलाल रूपी खर्ची इकट़टा करती महिला।

गुलाली खर्ची से बाजार की सड़कें हुए रंगीन

धुलंडी के दूसरे दिन निकाली गई बादशाह की सवारी के दौरान मुख्य मार्ग लाल गुलाल से पूरी तरह से रंगीन हो गया। खर्ची लेने के लिए शहर के हर क्षेत्र के लोग धानमंडी पहुंचे। जहां बादशाह की सवारी निकलने पर लुटाई गई गुलाली खर्ची को लेने के लिए लोगों में उत्सुकता साफ दिखाई दी। इस दौरान सड़क पर गिरी गुलाली खर्ची से पूरी सड़कें भी रंगीन हो गई।

10 क्विंटल गुलाल से करोड़ों की खर्ची बांटी

बादशाह की सवारी के दौरान बादशाह ने 10 क्विंटल गुलाल से करोड़ों रुपए की खर्ची लोगों में बांटी। मान्यता के अनुसार खर्ची हो तिजोरी में रखने पर बरकत होती है।

बाजार भाव भी बोलते हैं बादशाह और शहजादा

धानमंडी स्थित नगर सेठ भैरू जी मंदिर में बादशाह और शहजादा सोना, चांदी और अनाज आदि के भाव भी बोलते हैं। यह परंपरा सवारी के साथ चली आ रही है। ऐसा माना जाता है कि पूर्व में जो भाव ये बोल देते थे उसी भाव से व्यापार होता था।

तीन समाजों के सहयोग से बने बीरबल, बादशाह व शहजादा

इस आयोजन में माहेश्वरी, अग्रवाल व पुष्करणा समाज द्वारा बीरबल, बादशाह व शहजादा बनाए गए। जिसमें पुष्करणा समाज द्वारा शनि पुष्करणा को बीरबल बनाया गया। माहेश्वरी समाज की आेर से आनंद माहेश्वरी को शहजादा व अग्रवाल समाज द्वारा रमेश बंसल को बादशाह बनाया गया।

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