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दुष्कर्म पर सख्ती का जिम्मा संसद पर छोड़ा, हुआ कुछ नहीं

बच्चे मानव सभ्यता का अमूल्य उपहार, इन्हें कुंठाओं की भेंट नहीं चढ़ने दे सकते : सुप्रीम कोर्ट

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:55 PM IST

बच्चे मानव सभ्यता का अमूल्य उपहार, इन्हें कुंठाओं की भेंट नहीं चढ़ने दे सकते : सुप्रीम कोर्ट

बच्चे मानव सभ्यता का अमूल्य उपहार हैं। इन्हें किसी की कुंठाओं की भेंट नहीं चढ़ने दे सकते। बच्ची के साथ हुए घिनौने अपराध की मानसिक पीड़ा लंबे समय तक रहती है। बच्चों के प्रति अपराध रोकना जरूरी है। यह कठोर दंड के प्रावधानों से ही संभव है। संसद ऐसे अपराधों में कठोर दंड तय करे। - चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच

मालीवाल बोलीं- बच्ची का नहीं महिला आयोग का हुआ दुष्कर्म

महिला आयोग अध्यक्ष कटोरा लिए खड़ी है। छह माह में दुष्कर्मियों को फांसी दो। पुलिस के संसाधन, जवाबदेही बढ़ाओ। दो साल में खूब पत्र लिखे, कोर्ट गई, सत्याग्रह किया- कुछ न बदला। बच्ची का नहीं, महिला आयोग का दुष्कर्म हुआ है। -स्वाति मालीवाल, अध्यक्ष, दिल्ली महिला आयोग

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