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म्यूचुअल फंड निवेशकों को राहत, निवेश का खर्च 0.15% कम होगा

म्यूचुअल फंड निवेशकों को सेबी से जल्दी ही राहत मिलने की उम्मीद है। म्यूचुअल फंड कंपनियां (एएमसी) निवेशकों से...

Dainik Bhaskar

Mar 26, 2018, 06:45 PM IST
म्यूचुअल फंड निवेशकों को सेबी से जल्दी ही राहत मिलने की उम्मीद है। म्यूचुअल फंड कंपनियां (एएमसी) निवेशकों से अतिरिक्त खर्च के रूप में 0.20% राशि लेती हैं। पूंजी बाजार रेगुलेटर सेबी इसे घटाकर 0.05% कर सकता है। इसी हफ्ते सेबी की बोर्ड बैठक में इस पर फैसला संभव है। सेबी के एक अधिकारी ने बताया कि 0.05% अतिरिक्त खर्च की सीमा इक्विटी, बैलेंस्ड और डेट, सभी तरह की स्कीमों के लिए होगी। दो साल बाद इसकी समीक्षा की जाएगी।

सेबी ने 2012 में एक्जिट लोड यानी म्यूचुअल फंड की यूनिट बेचते समय लगने वाला शुल्क खत्म किया था, तब इसकी जगह एएमसी को 0.20% अतिरिक्त खर्च वसूलने की इजाजत दी थी। ज्यादातर एएमसी ओपन एंडेड यानी खुली अवधि वाली इक्विटी और बैलेंस्ड स्कीमों में 0.18-0.20% अतिरिक्त खर्च वसूलती हैं। जिस स्कीम की यूनिट को कभी भी खरीदा-बेचा जा सकता है, उसे ओपन एंडेड कहते हैं।

रेगुलेटर म्यूचुअल फंडों से जुड़े डिस्क्लोजर मानकों में भी संशोधन करने पर विचार कर रहा है। इसके तहत एएमसी विभिन्न स्कीमों के लिए निवेशकों से कितना खर्च ले रही हैं, उन्हें रोजाना इसकी जानकारी वेबसाइट पर देनी पड़ेगी। निवेशक के आग्रह पर उन्हें एसएमएस के जरिए नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) की जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी। देश में इस समय 42 म्यूचुअल फंड कंपनियां हैं। इनमें निवेश की गई राशि 22 लाख करोड़ रुपए के आसपास है।


सेबी की बोर्ड बैठक इसी हफ्ते, ये फैसले भी संभव

स्टार्टअप में एंजेल इन्वेस्टमेंट की सीमा दोगुनी हो सकती है

स्टार्टअप्स को शुरू में ज्यादा निवेश मिले, इसके लिए सेबी एंजेल इन्वेस्टमेंट के नियमों में बदलाव कर सकता है। इनके निवेश की अधिकतम सीमा 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए की जा सकती है। न्यूनतम निवेश राशि 25 लाख ही रहेगी। एंजेल फंड के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कम से कम 5 करोड़ रुपए का फंड जरूरी हो सकता है। अभी यह 10 करोड़ है। अभी एंजेल निवेशक अधिकतम तीन साल के लिए किसी यूनिट में पैसे लगा सकते हैं। यह 5 साल हो सकता है। सेबी के पास 398 अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड रजिस्टर्ड हैं। इनमें 114 कैटेगरी-1 के फंड हैं। इनमें 8 एंजेल फंड हैं।

बायबैक नियमों में बदलाव पर कंसल्टेशन पेपर जारी होगा

सेबी की मीटिंग में शेयर बायबैक नियमों में बदलाव पर भी विचार हो सकता है। सूत्र ने बताया कि बायबैक के नए नियमों पर कंसल्टेशन पेपर जारी कर सभी पक्षों से राय मांगी जाएगी। उसके बाद ही नियम तय किए जाएंगे। सूत्र ने बताया कि बायबैक के बाद सिक्योर्ड और अन-सिक्योर्ड कर्ज कंपनी के पेड-अप कैपिटल और फ्री रिजर्व के दोगुना से ज्यादा नहीं होगा। कंपनी किसी से बातचीत के आधार पर बायबैक प्राइस तय नहीं कर सकेगी। दो बायबैक के बीच एक साल का अंतर होना चाहिए। बायबैक के बाद 6 महीने तक शेयर जारी नहीं किए जाएंगे। हालांकि बोनस शेयर जारी किए जा सकेंगे।

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