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जमीन से साढ़े सात मीटर नीचे खुदाई के बाद पुराविदों का दावा

चौहान शासकों की राजधानी रहे नाडोल कस्बे के निकट जूनाखेड़ा का इतिहास और ज्यादा प्राचीन होता जा रहा है। पहले यहां...

Bhaskar News Network| Last Modified - Apr 16, 2018, 05:00 AM IST

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जमीन से साढ़े सात मीटर नीचे खुदाई के बाद पुराविदों का दावा
चौहान शासकों की राजधानी रहे नाडोल कस्बे के निकट जूनाखेड़ा का इतिहास और ज्यादा प्राचीन होता जा रहा है। पहले यहां विक्रमी संवत 1014 व 1036 के चौहान वंश के दो शिलालेख मिले थे। इससे यहां की सभ्यता को एक हजार वर्ष पुराना माना गया। लेकिन अब दो साल से चल रहे उत्खनन में जमीन से साढ़े सात मीटर निकल रही मिट्टी की परतों के आधार पर पुराविदों का दावा है कि यह सभ्यता उससे भी करीब पांच सौ साल पुरानी है। सॉइल डेटिंग के आधार पर इसकी सही आयु का आकलन किया जाएगा। विभाग ने यहां मिली मिट्टी के नमूनों को जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा है। गौरतलब है कि प्राचीन शिलालेखों में नाडोल को नंदपुर,नांदोल,नारदपुर,नाडोल बताया गया है तथा यह चौहान वंशीय शासकों की राजधानी थी। जिसका साम्राज्य जालोर व बाड़मेर तक फैला हुआ था। नाडोल कस्बे के पास से गुजर रही भारमल नदी के पास ही प्राचीन जूनाखेड़ा स्थान है। बताया जाता है कि प्राचीन काल में नदियों के किनारे ही गांव बसे हुए थे। भारमल नदी नाडोल के किनारे स्थित जूनाखेड़ा की पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों से लगातार खुदाई की जा रही है। यहां पर पुराविदों को अन्वेषण एवं उत्खनन में एक पूरी सभ्यता के दस्तावेज स्वरूप कई साक्ष्य यथा सिक्के,शिलालेख तथा मंदिर के अवशेष आदि मिले हैं। यहां पर ईंटों से बने पक्के फर्शदार कमरे और यज्ञ वेदिका, कुल्हड़,ढकनी,सिकारे,टोंटीदार बर्तन आदि भी मिले हैं।

भास्कर एक्सक्लूसिव

सॉइल डेटिंग के लिए मिट्टी के नमूने भेजे लखनऊ प्रयोगशाला में, अब मिला मानव कंकाल, मिट्टी के नक्काशीदार बर्तन

दो साल से चल रहे उत्खनन में अब तक मिल चुके हैं सिक्के, शिलालेख, मंदिरों के अवशेष, यज्ञवेदी, ईंटों से बने पक्के फर्श वाले कमरे, टोंटीदार बर्तन सहित सैकड़ों महत्वपूर्ण अवशेष

चौहान वंश से भी पहले आबाद था नाडोल- जूनाखेड़ा में साढ़े सात मीटर नीचे मिली मिट्टी की परतें 1500 साल पुरानी होने का दावा

जमीन के साढ़े सात मीटर नीचे तक खुदाई में मिल रहे अवशेष

पुराविदों ने यहां लगभग 25 फीट से अधिक गहराई तक खुदाई कर ली है। इस दौरान मिली मिट्टी की परतों के आधार पर पुराविदों ने दावा किया कि जूनाखेड़ा एक हजार नहीं पंद्रह सौ साल पहले से ही बसा हुआ था। पुराविदों को खुदाई में ईंटें, लोहे, कोयले सहित मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े मिले हैं।

एक हजार नहीं, उससे भी 500 साल पहले बसा था नाडोल का जूनाखेड़ा

खुदाई में मिला पांच फीट से ज्यादा लंबाई का कंकाल

जूनाखेड़ा में उत्खनन के दौरान लगातार नए अवशेष मिल रहे हैं। हाल ही पुराविदों को खुदाई के दौरान पांच फीट से अधिक लंबाई का मानव कंकाल मिला है। जबकि कुछ दिनों पूर्व मानव खोपड़ी मिली थी।

यह सभ्यता चौहान वंश से भी पांच सौ साल पुरानी

जूना खेड़ा को अब तक एक हजार साल पहले बसा हुआ बताया जा रहा है। अब 25 फीट गहराई में मिली मिट्टी की परतों के विश्लेषण के बाद यह दावा किया जा सकता है कि करीब पंद्रह सौ वर्ष से भी ज्यादा पुरानी हो सकती है। -डॉ.विनीत गोधल, उत्खनन अधिकारी, नाडोल

उत्खनन में सिक्कों पर ,,प,, लिखा मिला

जूनाखेड़ा प्राचीन स्थल की खुदाई में विभिन्न प्रकार के सिक्के मिले हैं। जिन पर अलग-अलग प्रकार की डिजाइन बनी हुई। कुछ सिक्के मिले हैं, जिस पर सूर्य का प्रतीक उकेरा हुआ है, जबकि कुछ सिक्कों पर ,,प,, लिखा हुआ है। जिससे यह संकेत मिलते हैं कि उस वक्त भी सिक्कों का प्रचलन था।

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