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जेट एयर भी एयर इंडिया को खरीदने वाली कंपनियों की दौड़ से बाहर हुई

नई दिल्ली | एयर इंडिया को खरीदने की दौड़ से जेट एयरवेज भी बाहर हो गई है। नरेश गोयल के नेतृत्व वाली इस एयरलाइन ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 11, 2018, 05:05 AM IST

नई दिल्ली | एयर इंडिया को खरीदने की दौड़ से जेट एयरवेज भी बाहर हो गई है। नरेश गोयल के नेतृत्व वाली इस एयरलाइन ने मंगलवार को यह घोषणा की। इससे पहले इंडिगो ने 5 अप्रैल को एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया में भाग नहीं लेने का ऐलान किया था। सरकार ने घाटे में चल रही एयर इंडिया और इसकी दो सब्सिडियरी के विनिवेश की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। लेकिन अब यह योजना हिचकोले खाती दिखाई दे रही है। एयर इंडिया की हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) देने की अंतिम तारीख 14 मई है।





योग्य बिडर्स की घोषणा 28 मई को होगी। एयर इंडिया की जिन दो सब्सिडियरी का विनिवेश होना है उनमें मुनाफे में चल रही एयर इंडिया एक्सप्रेस और एआईएसएटीएस शामिल हैं। एआईएसएटीएस एयर इंडिया और सिंगापुर की कंपनी एसएटीस लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है।

सरकार ने हाल में प्रिलिमनरी इन्फॉर्मेशन मेमोरेंडम जारी किया था। इसमें एयर इंडिया में सरकार की 76% तक हिस्सेदारी बेचने और इसका मैनेजमेंट कंट्रोल निजी कंपनियों को हस्तांतरित करने का जिक्र था। जेट एयरवेज के डिप्टी सीईओ और सीएफओ अमित अग्रवाल ने कहा, ‘हम एयर इंडिया के निजीकरण के फैसले का स्वागत करते हैं। लेकिन शर्तों और हमारी समीक्षा के आधार पर हमने इस प्रक्रिया में भाग नहीं लेने का फैसला किया है।’ हालांकि उन्होंने इस फैसले के पीछे की वजहों का खुलासा नहीं किया। पिछले महीने सूत्रों ने कहा था कि जेट एयरवेज, एयर फ्रांस-केएलएम और डेल्टा एयरलाइंस का कंसोर्टियम एयर इंडिया में सरकारी की हिस्सेदारी खरीदने के इच्छुक हैं।

इंडिगो के बाद ऐसा फैसला करने वाली दूसरी एयरलाइन, मुश्किल में पड़ गई है विनिवेश योजना

निवेशकों ने रुचि नहीं ली तो सरकार ने पवन हंस की नीलामी रद्द की

सरकार ने हेलीकॉप्टर सर्विस प्रोवाइडर पवन हंस में रणनीतिक विनिवेश की पुरानी बोली प्रक्रिया रद्द कर दी है। इसके लिए पिछले साल अक्टूबर में जारी प्रिलिमनरी इन्फॉर्मेशन मेमोरेंडम वापस ले लिया है। सरकार ने यह फैसला पर्याप्त बोलीकर्ताओं के नहीं आने की वजह से लिया है। पवन हंस नागरिक विमानन मंत्रालय और सरकारी कंपनी ओएनजीसी का संयुक्त उपक्रम है। इसमें ओएनजीसी की 49% हिस्सेदारी है।

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