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एग्जि़ट टेस्ट से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी

करंट अफेयर्स पर 30 से कम उम्र के युवाओं की सोच दिवाकर झुरानी, 27 द फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी टफ्ट...

Danik Bhaskar | Apr 18, 2018, 05:15 AM IST
करंट अफेयर्स पर 30 से कम उम्र के युवाओं की सोच

दिवाकर झुरानी, 27

द फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी

टफ्ट यूनिवर्सिटी, अमेरिका

linkedin.com/in/diwakar-jhurani-14452717

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में नेशलन मेडिकल कमीशन बिल में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी है। एक महत्वपूर्ण संशोधन यह है कि एमबीबीएस की अंतिम परीक्षा सरकार आयोजित करेगी। इसे नेशलन एग्ज़िट टेस्ट (नेक्स्ट) कहा जाएगा। जो इसे पास करेंगे, उन्हें ही एमबीबीएस की डिग्री मिलेगी। इससे योग्य छात्र ही डॉक्टर बनेंगे और उनकी गुणवत्ता में सुधार होगा।

इसी सिद्धांत पर हम सभी यूनिवर्सिटी डिग्रियों के लिए एग्जि़ट टेस्ट क्यों नहीं कराते? विभिन्न सर्वे में निष्कर्ष निकला है कि 20 फीसदी इंजीनियरिंग ग्रेजुएट ही ऐसे होते हैं, जिन्हें जॉब दिया जा सकता है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की मुताबिक भारत ने 2014 में करीब 25 हजार पीएचडी धारी दिए, जो दुनिया में चौथी सबसे बड़ी संख्या है। लेकिन, प्रकाशित शोधपत्रों के मामले में भारत का स्थान पहले दस देशों में भी नहीं है। साफ है कि हमारे ग्रेजुएट की गुणवत्ता दूसरे देशों की तुलना में काफी खराब है। चार तरह से सभी डिग्रियों के लिए एग्जि़ट टेस्ट मददगार होगा। एक, भ्रष्टाचार काफी कम होगा, क्योंकि निजी संस्थान रिश्वत देकर सरकारी मान्यता नहीं ले सकेंगे। उनकी गुणवत्ता एग्जि़ट टेस्ट पास करने वाले छात्रों की गुणवत्ता से तय होगी और इस तरह अधिमान्यता का ज्यादा महत्व नहीं रहेगा। दो, एग्जि़ट टेस्ट संस्थानों की गुणवत्ता का सटीक आकलन करेगा। जहां कॉलेज में एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण होगा पर एग्जि़ट टेस्ट से पता चलेगा कि वे संस्थान पिछड़ी श्रेणी के छात्रों को सामान्य श्रेणी के बराबर ला पाए हैं या नहीं। तीन, इससे गुणवत्ता वाले शैक्षणिक संस्थानों में सीटों के अभाव की समस्या सुलझा देंगे। अभी तो आईआईटी या अन्य श्रेष्ठ यूनिवर्सिटी में प्रवेश की स्पर्धा बहुत कड़ी है। एग्जि़ट टेस्ट इसे घटा देगा, क्योंकि छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर उन संस्थानों की गुणवत्ता आकी जाएगी, न कि उनके बारे में बनी आम धारणा के आधार पर। चार, एग्जि़ट टेस्ट जॉब मार्केट को अधिक न्यायपूर्ण बनाएगा। अभी तो कंपनियां शीर्ष रैंक वाले कॉलेजों या व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर भरती करते हैं। एग्जि़ट एग्ज़ाम से कंपनियों को छात्रों का स्पष्ट चित्र प्रस्तुत करेगा। फिर कॉलेज चाहो जो हो।