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भारत ने पाक के उप उच्चायुक्त काे तलब किया, गिलगित-बाल्टिस्तान को खाली करने को कहा

नई दिल्ली | भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि बाल्टिस्तान सहित पूरा जम्मू-कश्मीर हमारा है और इस पर कोई दखल मंजूर नहीं...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 28, 2018, 05:40 AM IST

नई दिल्ली | भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि बाल्टिस्तान सहित पूरा जम्मू-कश्मीर हमारा है और इस पर कोई दखल मंजूर नहीं होगा। पाक को यह इलाका खाली कर देना चाहिए। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में पाक के उप उच्चायुक्त सैयद हैदर शाह को तलब किया व पाक के गिलगित-बाल्टिस्तान आदेश-2018 को लेकर विरोध जताया। शाह को साफ बताया कि 1947 में अधिग्रहण के बाद से ही गिलगित, बाल्टिस्तान सहित समूचा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर राज्य की सीमा क्षेत्र के किसी भी हिस्से में बलपूर्वक एवं गैरकानूनी रूप से छेड़छाड़ को मंजूर नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान को गैरकानूनी रूप से कब्जे में लिए गए हिस्सों की सीमा क्षेत्र में बदलाव करने की बजाए, तुरंत उन्हें खाली करना चाहिए। भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में लोगों की आजादी एवं शोषण का मुद्दा भी उठाया।

विरोध प्रदर्शन, पुलिस से झड़प में कई लोग घायल

गिलगित-बाल्टिस्तान के नागरिक संगठन और लोग पाकिस्तान सरकार के इस आदेश का विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच शनिवार को झड़पें हुईं, जिनमें कई लोग घायल हुए हैं। इस दौरान पुलिस ने लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

क्या है गिलगित-बाल्टितान आदेश

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खकान अब्बासी ने 21 मई को गिलगित-बाल्टिस्तान आदेश-2018 जारी किया। इसके तहत स्थानीय निकायों को पाकिस्तान सरकार के अधीन कर लिया गया है। इसके जरिए पाकिस्तान ने इस भारतीय क्षेत्र को अपना पांचवां प्रांत घोषित करने की कोशिश की है।

अफगान सीमा से लगे फाटा के खैबर पख्तूनख्वा में विलय के विधेयक को मंजूरी

पेशावर| पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा की विधानसभा ने रविवार को अफगानिस्तान की सीमा से लगे संघ शासित कबायली इलाके (फाटा) के राज्य में विलय संबंधी विधेयक को दो-तिहाई बहुमत से मंजूरी दे दी।



ऐतिहासिक कदम से अंग्रेजों के जमाने की 150 साल पुरानी व्यवस्था बदल जाएगी। अंग्रेजों ने कबायली इलाके को अफगानिस्तान से सीधे टकराव को टालने के लिए बफर जोन की तरह बनाया था। विधेयक के पास हो जाने से सात एजेंसियां और 6 सीमावर्ती इलाके खैबर पख्तूनख्वा में मिलकर मुख्यधारा में शामिल हो जाएंगे। इससे कबायली आबादी को विधानसभा में प्रतिनिधित्व मिल जाएगा।

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