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दो साल में एक हजार से ज्यादा बच्चों को मिल चुकी है जिम्मेदारी

हंगरी: बुडापेस्ट के इस रेलवे स्टेशन को स्कूली बच्चे चलाते हैं; ताकि वो जिम्मेदारी और टीमवर्क की अहमियत समझ सकें;...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 28, 2018, 05:40 AM IST

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    हंगरी: बुडापेस्ट के इस रेलवे स्टेशन को स्कूली बच्चे चलाते हैं; ताकि वो जिम्मेदारी और टीमवर्क की अहमियत समझ सकें; टॉप ग्रेड पाने वाले बच्चों को ही मौका


    दो साल में एक हजार से ज्यादा बच्चों को मिल चुकी है जिम्मेदारी

    बुडापेस्ट| तस्वीर दुनिया के सबसे प्यारे रेलवे स्टेशन की है। राजधानी बुडापेस्ट की बुडा पहाडियों पर चल रहे इस रेलवे स्टेशन को 10 से 14 साल की उम्र के बच्चे चलाते हैं। टिकट बिक्री, टीटी, गार्ड और सिग्नल से लेकर सारी जिम्मेदारी ये बच्चे ही संभालते हैं। बाकायदा ये बच्चे रेड, ब्लू और व्हाइट ड्रेस में रहते हैं और आर्मी कैप पहनते हैं। ये पहल इसलिए शुरू की गई है, ताकि बच्चे टीमवर्क में काम करना और जिम्मेदारी उठाना सीखें। इन स्कूली बच्चों को हर 15 दिन पर और कुछ खास अवसरों पर रेलवे स्टेशन की जिम्मेदारी मिलती है। इसके लिए टॉप ग्रेड लाने वाले बच्चों को ही मौका दिया जाता है। बच्चे इस वजह से खासी मेहनत करते हैं, ताकि उनके अच्छे नंबर आएं और उन्हें ट्रेन संभालने का मौका मिले। बीते एक-दो साल में करीब 1000 से ज्यादा बच्चे इस मुहिम में शामिल हो चुके हैं। इस मुहिम के शुरू होने के बाद से बच्चों की पढ़ाई भी सुधरी है।

    इंजीनियर्स और रेलवे कर्मचारी रखते हैं बच्चों पर नजर

    यात्रा के दौरान 40-50 मिनट तक बच्चे ही संभालते हैं टिकट बिक्री से सिग्नल तक की जिम्मेदारी

    ये बच्चे रेलवे के इंजीनियर्स और ट्रेन चालक की निगरानी में ही स्टेशन का सारा कामकाज संभालते हैं।

    अगला स्टेशन 11 किमी दूर है। ये 40 से 50 मिनट का सफर रहता है। दूसरे स्टेशन पर भी बच्चे ही काम संभालते हैं।

    बच्चे इस वजह से खासी मेहनत करते हैं, ताकि उनके अच्छे नंबर आएं और उन्हें ट्रेन संभालने का मौका मिले।

    हर15 दिन में एक बार स्टेशन का जिम्मा मिलता है, रेलवे इंजीनियर व कर्मचारी देते हैं बच्चों को ट्रेनिंग

    यात्रियों का टिकट चेक करता हुआ बच्चा (ऊपर)। और ट्रेन को सिग्नल दिखाता हुआ स्कूली बच्चा।

    बच्चों द्वारा इस स्टेशन को चलाने के लिए इस स्टेशन को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी शामिल किया गया।

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Web Title: दो साल में एक हजार से ज्यादा बच्चों को मिल चुकी है जिम्मेदारी
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