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मध्यप्रदेश: टीकमगढ़ के गांव में सौ साल की महिला 60 साल से बेटियों को बचाने में जुटी, लड़कों से ज्यादा लड़कियां; महिलाओं पर अपराध भी शून्य

राजीव रंजन श्रीवास्तव | टीकमगढ़ मध्यप्रदेश का टीकमगढ़ जिला राज्य के 900 से कम लिंगानुपात वाले 10 जिलों में शामिल है।...

Dainik Bhaskar

May 07, 2018, 05:45 AM IST
मध्यप्रदेश: टीकमगढ़ के गांव में सौ साल की महिला 60 साल से बेटियों को बचाने में जुटी, लड़कों से ज्यादा लड़कियां; महिलाओं पर अपराध भी शून्य
राजीव रंजन श्रीवास्तव | टीकमगढ़

मध्यप्रदेश का टीकमगढ़ जिला राज्य के 900 से कम लिंगानुपात वाले 10 जिलों में शामिल है। पर इसी जिले का गांव हरपुर मढ़िया बेटियों के मामले में अव्वल है। यहां 678 पुरुषों पर 743 महिलाएं हैं। इलाके में इसे ‘बेटियों का गांव’ के नाम से जाना जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह हैं गांव की बुजुर्ग महिला शुगररानी। लोग कहते हैं कि उनकी उम्र सौ साल से ज्यादा हो चुकी है। वे करीब साठ साल से कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए काम कर रही हैं। असर ये हुआ कि 1421 की आबादी वाले गांव के हर घर में बेटियां हैं। गांव वाले कहते हैं कि हमारे यहां बेटों की चाहत में बेटियाें की संख्या नहीं बढ़ी है, बल्कि ज्यादा बेटियां होना गांव में गर्व की बात मानी जाती है। शुगररानी का गांव में इतना सम्मान है कि किसी की शादी भी उनसे पूछे बिना तय नहीं होती। गांव के सरपंच मनोज वंशकार बताते हैं कि गांव में मान्यता है कि बेटियों के कारण विपत्तियां नहीं आती। 52 साल के इंदल सिंह को सात बेटियां हैं। दो की शादी हो चुकी हैं। बाकी पढ़ रही हैं। तीन बेटियां वंदना, ज्योति और आराधना हाईस्कूल टॉपर हंै। गांव 80% साक्षर है। बच्चे पढ़ाई के लिए छह किमी दूर हाईस्कूल जाते हैं।

शुगररानी

हरपुरा मढ़िया गांव में बेटी के जन्म पर जश्न मनाते हैं; 678 पुरुषों पर 743 महिलाएं


शनिवार को गांव के ही अमान राजपूत के यहां बेटी जन्मी तो जश्न मनाया गया।

गांव में किसी भी बच्चे का जन्म ऑपरेशन से नहीं हुआ

गांव के किसी भी परिवार में बच्चे का जन्म ऑपरेशन से नहीं हुआ है। सभी डिलीवरी सामान्य हुई हैं। गांव में एक परिवार ऐसा भी है, जिसमें 21 बेटियां हैं। ये महेंद्र सिंह और उनके चार भाइयों का परिवार है।

जनपद अध्यक्ष कामिनी गिरि ने बताया कि हरपुरा मढ़िया आदर्श गांव घोषित है। यहां महिलाओं के खिलाफ अपराध नहीं होते हैं। गांव में बाहरी आदमी जाए तो पूरी जानकारी देना पड़ती है। बताना होता है कि कहां से और क्यों आया है।


युवा पीढ़ी अपना रही परिवार नियोजन

गांव के प्राण सिंह बताते हैं कि कभी यह सोच नहीं रही कि बेटा ही हो। हां लाेगों ने परिवार नियोजन की तरफ ध्यान नहीं दिया। कई परिवारों में 8 से 10 लड़कियां हैं। पर अब युवा पीढ़ी अब इसको लेकर गंभीर है। 20 साल की रानी पटेल ने बताया कि युवाओं का मानना है कि छोटे परिवार में बच्चों की परवरिश ज्यादा अच्छे से की जा सकती है।

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