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नसीमा ने कहा- अफगानिस्तान में महिलाओं का खेलना, बॉर्डर पर लड़ने जैसा; पता नहीं होता कि प्रैक्टिस के बाद घर लौटेंगी या नहीं

पति को मेरा खेल पसंद नहीं था। उसने तलाक दे दिया। अब बच्चे और बूढ़े पिता की जिम्मेदारी मुझ पर है। अब मैं पैसों के लिए...

Dainik Bhaskar

May 07, 2018, 05:45 AM IST
नसीमा ने कहा- अफगानिस्तान में महिलाओं का खेलना, बॉर्डर पर लड़ने जैसा; पता नहीं होता कि प्रैक्टिस के बाद घर लौटेंगी या नहीं
पति को मेरा खेल पसंद नहीं था। उसने तलाक दे दिया। अब बच्चे और बूढ़े पिता की जिम्मेदारी मुझ पर है। अब मैं पैसों के लिए खेलती हूं। - नसीमा

उदयपुर एशियन पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में काबुल की नसीमा कुर्बानी ने सिल्वर मेडल जीता

निखिल शर्मा | उदयपुर

अफगानिस्तान में तालिबान के आतंक के कारण महिलाओं पर खेलने से लेकर तमाम तरह की पाबंदियां हैं। इसके बावजूद यहां की महिलाएं ना सिर्फ खेल रही हैं, बल्कि मेडल भी जीत रही हैं। एशियन पावरलिफ्टिंग में सिल्वर जीतने वाली नसीमा कुर्बानी बताती हैं, ‘अफगानिस्तान की लड़कियाें का खेलों में करिअर बनाना बॉर्डर पर लड़ने जैसा खतरनाक है। हम अपने देश में खौफ के साए में खेलते हैं। पता नहीं होता कि खेलने के कारण ही कब गला काट दिया जाए? प्रैक्टिस के लिए निकलते हैं तो पता नहीं होता कि शाम को घर लौटेंगी या नहीं। यह खौफ सिर्फ तालिबान का नहीं है। कट्‌टरपंथी परिवार भी मुश्किलें खड़ी करते हैं। जब मैं खेलों में आई तो पति ने तलाक दे दिया। अब एक साल के बच्चे और बूढ़े पिता की जिम्मेदारी मुझ पर है। इसलिए जिम में चपरासी का काम कर पैसे जुटाती हूं। साथ ही पावरलिफ्टिंग करती हूं। पर घरवाले साथ नहीं देते। उन्हें पैसे चाहिए। पर वे चाहते हैं कोई भी काम कर पैसे कमाऊं, मगर पावरलिफ्टिंग नहीं करूं।’

महिलाओं के लिए दुनिया के दो सबसे खराब देश अफगानिस्तान और ईरान से 4 लड़कियों की कहानी

तालिबान के खौफ में रहती हैं महिला खिलाड़ी

फोटो - अमित राव

डर है कि तालिबानी आ गए तो मेडल कहां छिपाऊंगी: सादिया

अफगानिस्तान की सादिया कहती हैं, ‘हमें डर लगा रहता है कि तालिबानी आ गए तो मेडल कहां छिपाएंगे। लगातार धमकियां मिलती हैं। पावरलिफ्टिंग रुकवाने के लिए मेरी बहन को किडनैप तक किया गया था। भारत का माहौल अच्छा है। अगर यहां प्रोफेशनल पावरलिफ्टिंग होती, तो मैं यहीं रहकर खेलती।’

उदयपुर एशियन चैंपियनशिप, ईरान की महिलाएं पहली बार खेलने उतरीं, हिजाब पहनकर पावरलिफ्टिंग की

 मरियम परिवार को बिना बताए ही प्रैक्टिस करती हैं, 2 मेडल जीतीं

ईरान की महिलाएं पहली बार एशियन पावरलिफ्टिंग में हिस्सा ले रही हैं। पावरलिफ्टिंग में कपड़े छोटे और आरामदायक होने चाहिए। ईरानी महिलाओं को ऐसे कपड़ों की इजाजत नहीं है। वे हिजाब पहनती हैं। सिर्फ चेहरा और हथेलियां बिना ढके रख सकती हैं। चैंपियनशिप में दो मेडल जीतने वालीं 32 साल की मरियम कहती हैं, ‘ईरान में महिलाओं की नेशनल पावरलिफ्टिंग नहीं होती। वह तो नेशनल यूनियन ने हमें यहां भेज दिया। मैं परिवार को बिना बताए जिम में प्रैक्टिस करती हूं। अगर उन्हें पता चल गया होता तो मुझसे पावरलिफ्टिंग छुड़वा देंगे।’

मरियम

बेटी पर पाबंदियां बर्दाश्त नहीं हुई, तो खेलने लगीं निकजाद

तीन महीने पहले पावरलिफ्टिंग शुरू करने वालीं 40 साल की फेतेहमे निकजाद कहती हैं, ‘मेरी 14 साल की उम्र में शादी हो गई थी। अभी 24 साल की बेटी है। मैंने खेल, संगीत से लेकर कपड़े पहनने तक तमाम तरह की पाबंदियां झेली हैं। पर बेटी को पाबंदियों में जकड़ा देख कुछ करने की इच्छा हुई। तब मैंने खेलने का निर्णय लिया। जिम के बहाने पावरलिफ्टिंग शुरू की। बेटी को भी खेलने को कहा। अब यहां गोल्ड जीतकर साबित कर दिया है कि महिलाओं को भी पुरुषों की तरह बराबरी मिले तो वे अपने देश और समाज को तेजी से आगे ले जा सकती हैं।’

निकजाद

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