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ट्रम्प की डील करने की क्षमता का परीक्षण है किम से वार्ता

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 05:45 AM IST

मार्क लैन्डलर, व्हाइट हाउस संवाददाता

डोनाल्ड ट्रम्प को अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से ही दुनिया एक ऐसे लीडर के तौर पर जानती है, जिसकी रूचि डील करने में ज्यादा रहती है। इसका बड़ा कारण यह है कि वे उस ट्रम्प ग्रुप के मालिक रहे हैं, जो दुनियाभर के रियल एस्टेट में बड़ा नाम है। यह अलग बात है कि व्हाइट हाउस में आने का बाद ट्रम्प को अपने कामकाज से दूरी बनानी पड़, लेकिन विश्व नेताओं एवं अन्य बड़ी हस्तियों के साथ मेल-मुलाकात के समय उनका अंदाज ‘डीलमेकर’ का ही होता है। आज दुनिया की निगाहें ट्रम्प और उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग उनकी कल यानी 12 जून को सिंगापुर में होने वाली वार्ता पर है। दोनों देशों के मुख्य सलाहकारों, मंत्रियों की कई दौर की चर्चाओं के उतार-चढ़ाव के बाद अब वह अवसर आया है, जिससे दुनिया का वातावरण बदल सकता है।

इस वार्ता के लिए अमेरिका और उत्तर कोरिया के उद्देश्य अब तक स्पष्ट हैं। उत्तर कोरिया चाहता है कि उस पर से प्रतिबंध हटाए जाएं, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था वैश्विक मुख्य धारा में आ सके। अमेरिका चाहता है कि पहले वह अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करे और अपने परमाणु हथियार एवं मिसाइलें समर्पित कर दे। उत्तर कोरिया को अमेरिका से अपनी सुरक्षा का वादा भी चाहिए, क्योंकि उसका मानना है कि वह अब तक परमाणु हथियारों के बल पर ही सुरक्षित है। हाल ही में व्हाइट हाउस ने संवादताओं के साथ बातचीत में कहा कि वे उत्तर कोरियाई लीडर किम जोंग उन के साथ वार्ता करने के लिए तैयार हैं और इसकी तैयारी वे कर चुके हैं। परन्तु उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ऐसी कोई तैयारी करने की जरूरत नहीं है, जो इसके पहले अमेरिका के वरिष्ठ नेता करते रहे हैं। यहां बातचीत के उस अपरंपरागत तरीके की बात आती है, जो वे अब तक की जिंदगी में अपनाते रहे हैं।

1960 के दशक का एक किस्सा कई नेताओं को याद होगा, जब अमेरिकी एवं सोवियत नेताओं ने मिलकर परमाणु हथियारों से होने वाला विनाश नहीं बढ़ाने का समझौता किया था और दोनों पक्ष उस पर कायम रहे थे। दूसरी बात यहां ट्रम्प और किम के बीच होने वाली वार्ता भी दुनिया के लिए एतिहासिक अवसर है, वैसे ही एक खतरे को खत्म करने का। हालांकि, ट्रम्प के राष्ट्रपति कार्यकाल पर सबसे बड़ा खतरा परमाणु हथियारों का ही है। ट्रम्प प्रॉपर्टी डेवलपर से राष्ट्रपति बने हैं और निश्चित ही सिंगापुर पहुंचने की तैयारी पूरी कर चुके हैं। कल यानी 12 जून को वे वहां किम जोंग उन से मिलने वाले हैं। किम के साथ उनकी यह मुलाकात लंबे समय से प्रत्याशित बातचीत की उनका कला का परीक्षण साबित होगी। वे भी स्वयं को ‘डील मैन’ कहलाना पसंद करते थे। वे अपनी टीम में पूर्व राष्ट्रपतियों की तरह ज्यादा सलाहकार, राजनयिक एवं विदेश मंत्री को महत्व नहीं देते। इस तरह के ज्यादा मुद्‌दों-विषयों को वे स्वयं देखना चाहते हैं। मीडिया के सामने आने की बजाय वे ट्वीट कर देते हैं और बात दुनिया तक पुहंच जाती है। संभव है कि वे डील करने की अपनी क्षमता एवं कला के जरिये दशकों पुरानी राजनयिक रूढ़िवादिता के टुकड़े-टुकड़े कर दें। यह तभी माना जाएगा जब उत्तर कोरिया के साथ कोई डील हो जाती है। यहां डील का मतलब उसके परमाणु कार्यक्रम के अंत से है। ट्रम्प के लिए यह ऐसा कदम और अवसर है, जो उनके तीन पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों को नहीं मिला।

डोनाल्ड ट्रम्प के वर्तमान एवं पूर्व सलाहकार बताते हैं कि वे उत्तर कोरिया को लेकर बेचैन रहते हैं। उनकी यह स्थिति तब से है जब चुनाव जीतने के ठीक दो दिन बाद पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें दो घंटे तक बंद कमरे में कुछ बातें समझाई थीं। मई 2016 में जब ट्रम्प राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में थे, तब उन्होंने उत्साह के साथ कहा था कि वे उत्तर कोरियाई लीडर किम जोंग उन के साथ बैठकर बात करना चाहेंगे।

यहां बड़ी भूमिका विदेश मंत्री माइक पोम्पियो की है, जो पिछले दिनों दो बार गोपनीय रूप से उत्तर कोरिया की यात्रा कर चुके हैं। पूर्व में सीआईए के डाइरेक्टर रह चुके पोम्पियो मानते हैं कि ट्रम्प पूरी तरह तैयार हैं। वे ऐसे लीडर हैं, जिनके व्यक्तित्व के बारे में कोई नहीं जानता, लोग भी उन्हें अच्छी तरह नहीं जानते हैं, मुझे लगता है कि वे सिंगापुर में कोई सरप्राइज़ दे सकते हैं। © The New York Times

दैनिक भास्कर से विशेष अनुबंध के तहत

ट्रम्प ने राष्ट्रपति चुनाव के पहले ही कहा था कि वे किम जोंग उन के साथ वार्ता चाहते हैं। व्हाइट हाउस में कार्यभार संभालने के बाद से उन्होंने उत्तर कोरिया पर अधिक दबाव बनाने की रणनीति बना ली थी, इसलिए समझा जा सकता है कि वे इस वार्ता के लिए पहले से तैयार हैं।

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Web Title: ट्रम्प की डील करने की क्षमता का परीक्षण है किम से वार्ता
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