• Home
  • Rajasthan News
  • Rani News
  • लातूर में भूकंप के बाद पुनर्निर्माण कार्य में महिलाओं की
--Advertisement--

लातूर में भूकंप के बाद पुनर्निर्माण कार्य में महिलाओं की

लातूर में भूकंप के बाद पुनर्निर्माण कार्य में महिलाओं की भागीदारी के लिए संघर्ष किया, नौ साल में सात राज्यों की 1.45...

Danik Bhaskar | Jun 11, 2018, 05:45 AM IST
लातूर में भूकंप के बाद पुनर्निर्माण कार्य में महिलाओं की भागीदारी के लिए संघर्ष किया, नौ साल में सात राज्यों की 1.45 लाख महिलाओं को आर्थिक संपन्न बनाया

विनोद यादव | मुंबई

प्रेमा गोपालन पिछले 9 सालों से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में लगी हुई हैं। वे अब तक 7 राज्यों की एक लाख 45 हजार महिलाओं को सशक्त बना चुकी हैं। प्रेमा ने बताया कि महाराष्ट्र के लातूर जिले में आए भूकंप से भीषण तबाही के दौरान उनके पास सविता नाम की महिला आई। उसने कहा- ‘आपने हमारे बर्बाद हुए घर को फिर से तो बना दिया है, पर हम अब दोबारा घर की चहारदीवारी में कैद होकर रहने के इच्छुक नहीं हैं। मैं गांव को फिर खुशहाल बनाने के लिए महिलाओं को एकजुट करना चाहती हूं।’ इसके बाद प्रेमा ने महिलाओं के सशक्तीकरण की ठान ली।

पांच लाख लोगों का विशाल नेटवर्क खड़ा करने वाली स्वयं शिक्षण प्रयोग (एसएसपी) की संस्थापक प्रेमा ने कहा- ‘लातूर में तबाह घरों के पुनर्निर्माण में महिलाओं की भागीदारी और निगरानी की मांग शुरू की। पुनर्निर्माण के लिए नियुक्त 600 इंजीनियरों के साथ 600 ग्रामीण महिलाओं को नियुक्त करने की मांग की। इसके लिए डेढ़ साल तक संघर्ष किया। प्रेमा के साथ जुड़कर कई महिलाओं ने खुद की पहचान बनाई है। यहां प्रस्तुत है ऐसी ही सशक्त महिलाओं की दास्तां...

भूकंप, सुनामी और बाढ़ जैसी विनाशकारी आपदा से परिवार की कमर टूटी, ऐसी महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद कर रहीं महाराष्ट्र की प्रेमा

ओडिशा की ‘सीड मदर’ जमुना किरसानी

आदिवासी बुजुर्ग महिला जमुना किरसानी जब प्रेमा से मिली, तो उनके टैलेंट को पहचाना गया। आज जमुना ओडिशा के मलकानगिरी जिले में ‘सीड मदर’ के रूप में मशहूर हैं। उन्होंने अपनी जैसी 70 आदिवासी महिलाओं को जोड़कर ‘सीड मदर’ की पहचान दिलाई है। जमुना के पास धान के बीज के लगभग 161 किस्म हैं। इसके अलावा दाल, कंद, तेलहन, पालतू जंगली भोजन व साग-साब्जियों की 123 किस्में भी है।

सोलापुर की शिल्पा 7 गांवों की महिलाओं को कर रही ट्रेंड

बेहद गरीब परिवार में जन्मीं महाराष्ट्र के सोलापुर जिले की शिल्पा राजेश विभूते 12वीं तक पढ़ी हैं। उन्होंने कहा- मैं आज 7 गांवों की महिलाओं को उद्योग शुरू करने का प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दे रही हूं। 2005 में आत्मनिर्भर बनने का प्रयास किया, तो लोगों ने ताने मारे कि मैं सफल नहीं हो सकती।’ आज 3 उद्योग चला रही हूं। इसमें अंगूर की रोपवाटिका से 500 महिलाओं को लाभ हो रहा है। दूध व्यावसाय से हर महिला को प्रतिमाह 7 हजार रुपए की आमदनी हो रही है। अब मैं बड़ा दूध संकलन केंद्र शुरू करना चाहती हूं।

विधवा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली प्रियंका

उस्मानाबाद जिले की प्रियंका पासले उन 20 उद्यमी महिलाओं में शामिल हैं , जिन्हें इस साल एसएसपी ने 1 लाख रु. की उन्नति फेलोशिप मिली है। प्रियंका ने कहा- विधवा महिलाएं स्वाभिमान के साथ जी सकें, यही मेरी योजना है। मैं 100 महिलाओं को असहाय स्थिति से उबारकर उन्हें सक्षम बनाने वाली हूं। प्रियंका एसएसपी की 1 लाख 45 हजार सफल महिला उद्यमी में से एक है।