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सीमा पर धड़ल्ले से चल रहा कोकीन-नशे का अवैध धंधा, हो रही है मानव तस्करी

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 03, 2018, 05:50 AM IST

सीमा पर धड़ल्ले से चल रहा कोकीन-नशे का अवैध धंधा, हो रही है मानव तस्करी
शशि भूषण प्रवीण वर्मा अतुल उपाध्याय दिग्विजय कुमार की रिपोर्ट

बिहार के हिस्से की भारत-नेपाल की नियंत्रण रेखा (लाइन ऑफ कंट्रोल) पर किसका नियंत्रण है? सशस्त्र सीमा बल का, नेपाल के आर्म्ड पुलिस फोर्स का, कस्टम का, आईबी का, सीमावर्ती जिलों की पुलिस का या फिर इनमें से किसी का नहीं!

सच्चाई है कि नियंत्रण रेखा पर पूर्ण नियंत्रण इनमें से किसी का नहीं है। वैधानिक रूप से पश्चिमी चम्पारण के वाल्मीकिनगर से लेकर किशनगंज के गलगलिया तक भारत-नेपाल के बीच दर्जन भर कारोबारी रास्ते हैं लेकिन हकीकत यह है कि खुली सीमा पर असंख्य चोर दरवाजे हैं। दो सौ से अधिक तो नदी नाले हैं।

नेपाल में इन्हें खोला कहते हैं। भास्कर टीम यहां पहुंची तो देखा कि मित्र राष्ट्रों की जनता की बेरोकटोक आवाजाही की आड़ में इन रास्तों का भरपूर फायदा असामाजिक तत्व उठा रहे हैं। 729 किमी लंबी इस सीमा की दैनिक भास्कर की चार टीमों ने पांच दिनों तक चप्पे-चप्पे की पड़ताल की। टीम ने पाया कि बॉर्डर पर तस्करी, धंधे का रूप धर चुकी है। नशीले पदार्थों, मवेशियों, हथियारों और मानव तस्करी के लिए यह खुली सीमा खतरनाक बन चुकी है। तस्करी की सूची में बिहार में शराबबंदी के बाद शराब और पखवाड़े भर से डीजल-पेट्रोल नए आइटम हैं। बॉर्डर गार्डिंग फोर्स (एसएसबी) के पास राइफल, दूरबीन और नाइट विजन डिवाइस के अलावा कुछ भी नहीं है। मोटर साइकिल तो दूर, साइकिल तक नहीं है। बातचीत में एसएसबी के अधिकारी भी स्वीकार करते हैं कि मौजूदा हालात में सीमा को फुल-प्रूफ बनाना नामुमकिन है। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। बॉर्डर के असंख्य लोगों के पास दोहरी नागरिकता है। लोगों की खेती दोनों ओर है। बिहार के पश्चिमी चम्पारण जिले के सुस्ता से वाल्मीकिनगर होते हुए रक्सौल तक के खुले नेपाल बॉर्डर का 120 किमी का रास्ता नदी-नाले, घने जंगल और पहाड़ों के बीच है। यहां जमकर तस्करी हो रही है। शेष | पेज 6 पर

भास्कर की पांच दिनों की पड़ताल में साफ हो गया कि जंगल स्मगलिंग का ग्रीन कॉरिडोर बन चुका है। हजारों गुप्त रास्ते और पगडंडियां हैं। घने जंगलों में गाड़ियों के पहिए के निशान भी दिखते हैं। इलाके में गंडक नदी ही दोनों देशों की सीमा है। नदी के रास्ते रोजाना तस्कर सुस्ता होते हुए भारत की सीमा में घुस रहे हैं। सुस्ता गांव की सीमा लांघने की परमीशन हमारी पुलिस और एसएसबी को नहीं है। और सीमा भी क्या है? बस एक दो फीट ऊंची मेड़ है, जो रहुआटोला (भारत) और सुस्ता के लोगों ने आपसी सहमति से बना ली है। गंडक नदी का रूट मवेशियों की स्मगलिंग के लिए भी तस्करों की खास पसंद बन गया है। भारत साइड नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की मदद से तस्करों ने कुछ भैंसों को इस तरह ट्रेंड कर दिया है कि वह चरते-चरते बाकी मवेशियों को लेकर नदी पार कर जाती हैं। इन ट्रेंड भैंसों की पहचान है इनके गले में बंधा हुआ घंटा। तस्करों की दुनिया में इन्हें टीम लीडर कहा जाता है। नदी के करार पर चलते हुए हमारा सामना भी तस्करों से हुआ। वे नेपाल से आ रहे थे, पर साथ चल रही एसएसबी की पेट्रोलिंग पार्टी को देखकर वापस नेपाल तरफ भाग गए। सुस्ता में कई लोग ऐसे हैं जिनके पास भारत और नेपाल दोनों देशों की नागरिकता है। सुस्ता ही नहीं, किशनगंज के गलगिलया बॉर्डर के भद्रपुर (नेपाल) तक असंख्य लोगों के पास दोनों देशों की नागरिकता है।



नेपाल से सस्ता पट्रोल लाकर भारत में बेचते हैं

नरकटियागंज के पास बॉर्डर पर गांव-गांव में पेट्रोल की दुकानें हैं। पेट्रोल नेपाल से आता है। वहां पेट्रोल का रेट 67.50 रुपए है, और डीजल 55 रुपए लीटर। गम्हरिया गांव में पट्रोल पंप वाले ने बताया कि गांव के ज्यादातर लोग नेपाल साइड जाकर पेट्रोल भरा लेते हैं। मेरे यहां 12,500 लीटर की टंकी का पेट्रोल 20-25 दिन में बिकता है। कभी-कभी डेढ़ माह भी लग जाते हैं। गांव के कई लोग दिनभर नेपाल साइड से पेट्रोल लाकर बेचते हैं। ऐसी दुकानें संपूर्ण बॉर्डर की बस्तियों में हैं।



कैरियर के जरिए पार होता है कपड़े से कोकीन तक

रक्सौल में रेलवे लाइन पार करने के बाद सिसवा नदी पर पुल है। पुल के उस पार नेपाल सीमा के नो मेंस लैंड पर कुछ महिलाएं समूह में दिखती हैं। महिलाएं अपने शरीर के चारों ओर कपड़े की गांठ बांधे थीं । पता चला कि सभी साड़ी, सलवार-सूट का कपड़ा नेपाल के वीरगंज बाजार पहुंचाने जा रही है। कैमरा देखते ही महिलाएं भड़क गईं। इसी बीच नेपाल पुलिस के जवान उसकी जांच-पड़ताल में जुट गए। गांठ खोलने लगे तो महिलाएं गाली-गलौज पर उतर आईं। बोलने लगी- तीन सेट कपड़ा से क्या हो जाएगा? यहां तो करोड़ों की हेराफेरी हो रही है। 8 सेट कपड़ा के गांठ छुड़ाने के लिए 10 हजार मांग रहे हो? रक्सौल में ही चरस के साथ गिरफ्तार एक महिला लाई गई है। उसे सिकटा में 4 किलो चरस के साथ पकड़ा गया है। वह नेपाल से चरस को कमर में लपेटकर आई थी। सिकटा से बेतिया जाने वाली बस में बैठी थी। तभी गुप्त सूचना के आधार पर एसएसबी ने उसे पकड़ लिया और रक्सौल भेज दिया जहां एसएसबी की महिला विंग है।



बॉर्डर पर शराब की तेज है तस्करी

रक्सौल ब्लॉक के महदेवा गांव में एसएसबी का कैंप है। एक जवान ने शराब तस्करी के नए तरीकों के बारे में बताया। मुसहरवा बॉर्डर के नो मेंस लैंड पर दोनों देशों की ओर से प्राथमिक स्कूल बने हुए हैं। चाय की दुकान में तस्करों का सिंडिकेट किसी बड़ी डील में जुटा था। बताया गया कि इस बॉर्डर के रास्ते भारत से नेपाल ब्राउन शुगर की खेप पहुंचाई जाती है। नो मेंस लैंड पर नेपाल की ओर बनी झोपड़ियों में शराब के अड्डे थे। आदापुर ब्लॉक के बेलदरवा कैंप के उस पार नीलकंठवा गांव है। नो मेंस लैंड पर स्थित एक भारतीय निजी स्कूल में काफी संख्या में नेपाल के बच्चे पढ़ते हैं। मुरतिया बॉर्डर से मवेशियों की तस्करी धड़ल्ले से होती है। कोरैयां बॉर्डर के उस पार भी कोरैयां गांव है। कोरैयां व चंद्रमन बॉर्डर पर तस्कर शराब व खाद की खेप आदान-प्रदान करते दिखे।



मवेशी तस्करी के लिए बदनाम लाई लोखर

सीमा में लाइ लोखर नाम का गांव है। मवेशियों की स्मगलिंग के लिए बदनाम है। यहां एसएसबी के जवान और गांव वालों के बीच कई बार झड़प हो चुकी है। एक बार तो गांव वालों ने जवानों को ढकेलते हुए नेपाल की सीमा में पहुंचा दिया। जवान किसी तरह जान छुड़ाकर वहां से भागे। दरअसल, हथियार समेत बॉर्डर पार करने पर मनाही है।



नेपाल से बिहार आई गाड़ियों का हिसाब-किताब नहीं

भारत की कोई गाड़ी नेपाल में प्रवेश करती है तो भंसार, सुविधा, यातायात जैसी तमाम औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। लेकिन नेपाल से बिहार आने वाली गाड़ियों का सिर्फ नंबर नोट होता है। गाड़ी लौटी या नहीं इसका कोई हिसाब नहीं है। बॉर्डर पर एसएसबी को पेट्‌टी सीजर (छोटे-मोटे सामान की जब्ती) की मनाही है। ऐसा इसलिए कि जरूरत का सामान अवैध नहीं माना जाता। और एसएसबी के मैंडेट में बॉर्डर की आबादी का विश्वास हासिल करना है।

प्रणाम सर भी एक कोड वर्ड

बाॅर्डर के बच्चे इस तरह ट्रेंड हैं कि एसएसबी जवानों को देखते ही समवेत स्वर में जोर से चिल्लाते हैं-प्रणाम सर! हमने एसएसबी के एक अफसर से कहा-सीमावर्ती गांव के बच्चे आप लोगों को सम्मान की निगाह से देखते हैं। अफसर ने हमें घूरते हुए कहा- यह सम्मान नहीं, अवैध कारोबार में शामिल लोगों के लिए एलर्ट सिग्नल है कि एसएसबी गश्ती पर है।

सिर्फ 11 कारोबारी रास्ते हैं, लेकिन खुली सीमा पर असंख्य चोर दरवाजे हैं

अवैध रूप से बदली जा रही है मुद्रा, नेपाल से पेट्रोल लेकर बेच रहे हैं यहां

निगरानी करने वाली फोर्स के पास साइकिल तक नहीं

सीमा पर जहां-जहां आबादी है, वहां-वहां कैरियर सिस्टम है। कैरियर यानी माल को बॉर्डर पार कराने वाले लोग। इस तरह महिलाएं साड़ी में कपड़े और दूसरे सामान छिपाकर तस्करी करती हैं।

बॉर्डर पर चल रहा है बट्‌टा बाजार, 80 सेंटर सिर्फ रक्सौल में

रक्सौल कस्टम कार्यालय के सामने से रेलवे गुमटी के उस पार तक सड़क किनारे खुले में मनी एक्सचेंज की स्टॉल कतार में है। स्टॉल पर 500, 200, 100, 50,10 रु. के नए-नए नोट की गड्डी सजाकर रखी गई है। हमें नेपाल से लौटा भारतीय समझ, मनी एक्सचेंजर ने नोट बदलने के लिए अपने पास बुलाया। कैमरे का फ्लैश चमका तो सब स्टॉल बंद करने लगे। पता चला कि सभी अवैध तरीके से यहां मनी एक्सचेंज का काम करते हैं। 100 रु. में चार रु. कमीशन लेते हैं। नियमत: नेपाल के वीरगंज में स्थित नेपाल राष्ट्र बैंक में ही नोट बदले जाते हैं। पर, वहां 5000 से अधिक इंडियन करेंसी नहीं दी जाती है। मनी एक्सचेंज की स्टॉल पर ऐसी कोई लिमिट नहीं है। नेपाल राष्ट्र बैंक में 160 रु. का नेपाली नोट देने पर 100 रु. का भारतीय नोट मिलता है। जबकि, रक्सौल में अवैध तरीके से खुले मनी एक्सचेंज सेंटरों पर 164 रु. नेपाली नोट देने पर 100 रु. का भारतीय नोट दिया जाता है। यहां 80 सेंटर इस धंधे में शामिल हैं।

मानव तस्करी का नया रूट, इस साल ही 23 मामले

खुटौना प्रखंड की पंचायत लौकहा भारत-नेपाल सीमा से बिल्कुल सटी हुई है। अधिकृत रास्ते से यहां भारत से सेब, अंगूर और धान जाता है। थोड़ी ही दूरी पर बलान नदी है। अभी सूखी हुई है। यह नेपाल और भारत के बीच मानव तस्करी का नया रूट है। हफ्ते भर पहले नेपाल से भारत लाई गई छह लड़कियों को एसएसबी ने नदी क्षेत्र में पकड़ा है। लौकहा से छह महीने पहले दिल्ली के लिए बस सेवा शुरू होने के बाद यहां तस्करी बढ़ी है। इन दिनों नेपाल से ज्यादा मानव तस्करी बॉर्डर इलाके के भारतीय गांवों से देश के ही अन्य शहरों की ओर हो रही है। इसे रोकने के लिए एसएसबी ने सोनबरसा, पूर्वी चम्पारण, सीतामढ़ी, मधुबनी और जोगबनी में जागृति बस की शुरुआत की है। मकसद, लोगों को जागरूक करना है। 2018 में यहां ह्यूमन ट्रैफिकिंग के 23 मामले सामने आए हैं।

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