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ड्रोन: सिर्फ दुश्मन ही नहीं ढूंढता है लोगों की जान भी बचाने में लगा

तूफान मारिया ने जब प्योर्तो रिको में तबाही मचाई थी, तब यहां के करीब 50 लाख लोग बहुत बुरी हालत में हफ्तों रहे। ऐसे में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 03, 2018, 05:50 AM IST

तूफान मारिया ने जब प्योर्तो रिको में तबाही मचाई थी, तब यहां के करीब 50 लाख लोग बहुत बुरी हालत में हफ्तों रहे। ऐसे में ड्रोन ने न केवल बिजली बहाल करने में मदद की, वरन इन लोगों को कम्युनिकेशन में भी मदद की। ड्रोन ने सेल टावर की भूमिका निभाई। एटी एंड टी ने फ्लाइंग कॉऊ नाम से एक ड्रोन तैयार किया, जिसने 40 मील दूर तक से लोगों को डेटा उपलब्ध कराने में मदद की। कंपनी के मानवरहित एयरक्राफ्ट सिस्टम के प्रोग्राम डायरेक्टर आर्ट प्रेगलर का कहना है कि उनकी टीम ने फ्लाइंग कॉऊ को ऑपरेट किया। इसे वहां पर ‘सेल ऑन व्हील्स’ के तौर पर लिया गया। इसी की मदद से इंटरनेट कनेक्शन मिल सका और उड़ने वाला सेल टावर का प्रयोग हकीकत बना।

दुश्मन के खात्मे का काम: अमेरिकी सेना ने ड्रोन का प्रयोग 2001 में सबसे पहले किया था। तब अफगानिस्तान में अल- कायदा को खत्म करना उद्देश्य था। तब से सेना में ड्रोन एक अहम अंग है। 2017 में करीब 30 लाख ड्रोन पूरी दुनिया में बिके हैं। 10 लाख ड्रोन अमेरिका में फेडरल एविएशन एडमिनस्ट्रेशन में रजिस्टर्ड हैं।

आज कंज्यूमर ड्रोन हेलिकॉप्टर के समान खड़ी उड़ान भरते हैं। ये रिमोट कंट्रोल प्लेन की तरह हैं। लेकिन उससे ज्यादा अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी वाले जिसमें जीपीएस, वाई-फाई, सेंसर। इसका उपयोग टेक्नोलॉजी के जानकार किसान भी करने लगे हैं, ताकि वे फसलों पर स्प्रे आदि की निगरानी कर सकें। अमेरिका में 1 लाख 22 हजार लोगों के पास ड्रोन उड़ाने का प्रमाणन है।

जान बचाने के काम: इतना ही नहीं ड्रोन जान भी बचा रहे हैं। कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क में ड्रोन की मदद से गुम हो चुके 65 लोगों को बचाया गया। कारोबार में इसका उपयोग रियल इस्टेट में लोग कर रहे हैं। साथ ही पिज्जा की डिलीवरी में भी ये उपयोग में आता है। एमेजॉन भी डिलीवरी को कुछ ही देर में पहुंचाने के लिए ड्रोन का उपयोग करने जा रहा है। इसमें सेहत के लिए उपयोगी चीजों को तत्काल डिलीवर कर सकेंगे। फेसबुक इस समय ड्रोन पर काम कर रहा है ताकि दुनिया के दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की जा सके।

अपराधी भी इस्तेमाल कर रहे हैं: हवा में उड़ते हुए निगरानी करने वाले ड्रोन की मदद से नशीली दवाओं के तस्कर नशे को जेल तक पहुंचा देते हैं। अमेरिका की सेना इस पर अरबों रुपया खर्च कर रही है कि किसी भी तरह से ये आतंकियों का हथियार न बन जाए। कुछ लोग इनके उड़ने से अपनी निजता में हस्तक्षेप मानते हैं। इसका भी तरीका चीन के डीजेआई ने निकाला है। इनका कहना है कि कुछ क्षेत्र ऐसा तय किया जाए, जहां इन्हें उड़ाने की अनुमति हो और कुछ निषिद्ध क्षेत्र घोषित किए जाए।

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