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 मदर ऑफ ऑल बॉल

रूस में फीफा वर्ल्ड कप में जो गेंद इस्तेमाल होगी, उसका नाम टेलस्टार-18 है। इसे फीफा की पार्टनर कंपनी और 1970 से वर्ल्ड...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 04, 2018, 05:55 AM IST

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    रूस में फीफा वर्ल्ड कप में जो गेंद इस्तेमाल होगी, उसका नाम टेलस्टार-18 है। इसे फीफा की पार्टनर कंपनी और 1970 से वर्ल्ड कप में गेंद सप्लाई कर रही एडिडास ने डिजाइन किया है। इस कंपनी ने लगातार 13वीं बार वर्ल्ड कप की गेंद डिजाइन की है। इसका नाम एडिडास द्वारा 1970 में डिजाइन किए गए पहले बॉल टेलस्टार के नाम पर टेलस्टार-18 रखा है। 1970 के दशक में ब्लैक एंड व्हाइट टीवी चलन में थे। खेल के दौरान टीवी दर्शकों को गेंद आसानी से दिखे, इसलिए इसमें पहली बार सफेद के साथ काले पैनल का इस्तेमाल किया गया था।

    गेंद से स्मार्ट फोन कनेक्ट हो सकेगा

    टेलस्टार-18 में एनएफसी चिप लगी है। इस चिप के जरिए गेंद को स्मार्ट फोन से कनेक्ट कर खेल से जुड़े कई अहम स्टैट हासिल किए जा सकते हैं। यह गेंद आम लोगों और खिलाड़ियों के खरीदने के लिए उपलब्ध है।

    पाकिस्तान की कंपनी ने बनाई है गेंद

    टेलस्टार-18 का प्रोडक्शन पाकिस्तान के सियालकोट स्थित कंपनी फॉरवर्ड स्पोर्ट्स ने किया है। यह कंपनी गेंद बनाने के लिए दुनियाभर में मशहूर है। कंपनी हर महीने 7 लाख गेंद बनाती है। 1994 से यह एडीडास के साथ काम कर रही है। 2014 और 2018 वर्ल्ड कप के लिए भी इसी कंपनी ने गेंद बनाया था।

    21वें फुटबॉल वर्ल्ड कप का इंतजार खत्म होने को है। ठीक 10 दिन बाद, यानी 14 जून से 32 देश की टीम खिताबी जोर-आजमाइश शुरू करेगी। रूस में होने वाले इस टूर्नामेंट में पहली बार वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) का इस्तेमाल होगा। सभी मैच चिप लगी ‘टेलस्टार-18’ बॉल से खेले जाएंगे। 32 दिन चलने वाले टूर्नामेंट का फाइनल 15 जुलाई को होगा। मेजबान रूस ने इस टूर्नामेंट के आयोजन पर 12 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

    पहली बार चिप लगी गेंद से होगा वर्ल्ड कप, 1970 की थीम पर पाकिस्तान में बनी है गेंद

    3 हजार साल पहले फुटबॉल जैसा खेल शुरू हुआ, तब गेंद के तौर पर दुश्मनों का कटा सिर इस्तेमाल होता था

    दुनिया की सबसे पुरानी गेंद साढ़े 4 सौ साल पुरानी

    यह तस्वीर दुनिया की सबसे पुरानी फुटबॉल गेंद और ट्रॉफी की है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो म्यूजियम में रखी है। यह गेंद इंग्लैंड स्टर्लिंग कैसल के क्वीन चैंबर में मिली थी। माना जाता है कि यह 1540 के दशक में बनी थी। इसमें चमड़े का प्रयोग हुआ है। स्कॉटलैंड में फुटबॉल 1497 से खेला जाता रहा है। उस दौर में गोल्फ के साथ-साथ फुटबॉल भी शाही खेल होता था। राजा-रानी का पूरा परिवार इसमें शामिल होते थे।

    1930 में फाइनल का पहला हाफ एक टीम तो दूसरा हाफ दूसरी टीम की गेंद से खेला गया...

    1930ऑफिशियल बॉल नहीं थी। फाइनल में पहला हाफ अर्जेंटीना की गेंद टिएंटो से और दूसरा हाफ उरुग्वे की गेंद टी-मॉडल से हुआ। 1934 की गेंद का नाम फेडरडेल था।

    फीफा कहता है- नियमबद्ध फुटबॉल चीन की देन

    फुटबाॅल की सबसे पुरानी गेंद करीब साढ़े चार सौ साल पहले की उपलब्ध है, लेकिन फुटबॉल का इतिहास करीब तीन हजार साल पुराना है। पहले युद्ध जीतने पर विरोधियों के कटे हुए सिर को किक करने जैसा खेल प्रचलन में था।

    ऐतिहासिक संदर्भों से जो तथ्य मिलते हैं, उसके मुताबिक गेंद के तौर पर मानव या जानवरों की खोपड़ी, जानवरों के ब्लाडर, कपड़ों को सिल कर बनाए गट्‌ठर का इस्तेमाल होता रहा है।

    चीन के हान साम्राज्य (करीब 2250 साल पहले) में जानवरों के चमड़े से बनी गेंद से फुटबॉल जैसा खेल प्रचलन में था। फुटबॉल की वैश्विक संस्था फीफा इसे फुटबॉल के सबसे पुराने नियमबद्ध फॉर्मेट के तौर पर मान्यता देती है। वहां से यह दुनियाभर में फैला।

    मध्यकाल में जानवरों (विशेषकर सूअर) के ब्लाडर को चमड़े से कवर किया जाने लगा ताकि गेंद को बेहतर शेप मिल सके। 19वीं शताब्दी में रबड़ के ब्लाडर बनने तक फुटबाल की गेंद बनाने की यही प्रक्रिया जारी रही।

    1938में एलन गेंद आई। पहली बार किसी कंपनी ने वर्ल्ड कप में गेंद की ब्रांडिंग की। दूसरे विश्व युद्ध के कारण 1942 और 1946 में वर्ल्ड कप का आयोजन नहीं हुआ।

    1970में टेलस्टार आई। ब्लैक एंड व्हाइट टीवी पर गेंद बेहतर तरीके से दिखे, इसलिए ब्लैक एंड व्हाइट गेंद बनाई । 1974 में डरलास्ट, 1978, 1982 में टैंगो गेंद आई।

    1986एजटेका आई। पहली आर सिंथेटिक गेंद से मैच हुए। 1990 में यूनिको, 1994 में क्वेस्त्रा, 1998 में ट्राई कलर, 2002 में फेवरनोवा, 2006 में टीम जीस्ट का इस्तेमाल।

    पहली रबर गेंद 1836 में गुडईयर ने बनाई थी

    1836:ब्रिटेन के चार्ल्स गुडईयर ने पहली बार जानवर के ब्लाॅडर की जगह रबर की गेंद बनाई। उन्होंने इसका पेटेंट भी कराया था।

    1862:एचजे लिंडन ने रबर के फुलाए जाने वाले ब्लाडर बनाए। उनकी प|ी फुटबॉल के लिए जानवरों के ब्लाडर फूंक कर फुलाती थीं। उन्हें फेफड़े की बीमारी हो गई। तब लिंडन ने रबर के फुलाए जा सकने वाले ब्लाडर बनाए।

    1863:उस समय नए-नए अस्तित्व में आए इंग्लिश फुटबॉल एसोसिएशन ने फुटबॉल के नियम बनाए। हालांकि, उन नियमों में गेंद के आकार के बारे में कुछ नहीं कहा गया था।

    1872:नियम संशोधित किए गए। तय किया गया कि गेंद निश्चित रूप से गोल होगी (स्फेरिकल)। इसका सरकमफेरेंस 27 से 28 इंच (68.6 सेंटीमीटर से 71.1 सेंटीमीटर) होगा। यही नियम आज भी जारी है।

     पाली, सोमवार, 4 जून, 2018

    2010में जबुलानी आई। इसमें 8 पैनल थे। इससे शॉट की ट्रैजेक्टरी का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया। गोलकीपरों बहिष्कार करने वाले थे। तो 2014 में ब्रजूका गेंद लाई गई।

    फ्रेंडली मुकाबले

    वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी फ्रेंडली मैच में ऑस्ट्रिया पर बढ़त लेकर भी हारा

    ऑस्ट्रिया के हिंटरगेर (बीच में) गोल के बाद।

    ऑस्ट्रिया ने 2-1 से हराया, जर्मनी के खिलाफ 32 साल में पहली जीत

    बर्लिन| मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी को फ्रेंडली मैच में बढ़त के बावजूद हार का सामना करना पड़ा। ऑस्ट्रिया ने उसे शनिवार रात 2-1 से हराया। ओजिल ने 11वें मिनट में गोल कर जर्मनी को बढ़त दिलाई। पर वह बढ़त कायम नहीं रख सका। ऑस्ट्रिया के लिए हिंटरगेर ने 53वें और शूफ ने 69वें मिनट में गोल किए। जर्मन कोच जाेकिम लो ने इस मैच में थॉमस म्युलर, मैट्स हमेल्स और टोनी क्रूज को आराम दिया था। जर्मन कप्तान नेऊर भी सितंबर-17 के बाद पहली बार मैच खेल रहे थे। यह ऑस्ट्रिया की जर्मनी पर 32 साल में पहली जीत है।

    वर्ल्ड कप की टीमों के फ्रेंडली मैच

    बेल्जियम  पुर्तगाल 0 ऑस्ट्रिया 2  जर्मनी 1

    नॉर्वे 3  आइसलैंड 2 स्वीडन 0  डेनमार्क 0

    इंग्लैंड 2  नाइजीरिया 1

    बेल्जियम के कोम्पनी चोटिल, वर्ल्ड कप में खेलना तय नहीं

    बेल्जियम के विन्सेट कोम्पनी पुर्तगाल से फ्रेंडली मैच के दौरान चोटिल हो गए। मैनचेस्टर सिटी के कप्तान कोम्पनी, मैच के 55वें मिनट में पुर्तगाल के गेल्सन मार्टिन्स से टकरा गए। इससे उन्हें ग्रोइन इंजरी हो गई। उन्हें तुरंत मैदान से बाहर जाना पड़ा। अब उनका स्कैन कराया जाएगा। इसके बाद ही उनके आगे खेलने पर फैसला होगा।

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