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चीन में डॉक्टरों की कमी को पूरा कर रहा रोबोट; बीमारी को डायग्नोज करता है, एक्यूरेसी रेट- 90 फीसदी, मेडिकल परीक्षा भी पास कर चुका

चीन में रोबोट डॉक्टरों की कमी को पूरा करने में मदद कर रहे हैं। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दम पर लोगों का इलाज...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 06, 2018, 05:55 AM IST

चीन में डॉक्टरों की कमी को पूरा कर रहा रोबोट; बीमारी को डायग्नोज करता है, एक्यूरेसी रेट- 90 फीसदी, मेडिकल परीक्षा भी पास कर चुका
चीन में रोबोट डॉक्टरों की कमी को पूरा करने में मदद कर रहे हैं। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दम पर लोगों का इलाज भी हो रहा है। इसके पीछे लंबी कवायद है। चीन में अस्पताल में जाना यानी लंबी कतार में खड़ा रहना, लेकिन गुआंगजोऊ में एक अस्पताल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मरीजों की मदद की जा रही है। गुआंगजोऊ सेकंड प्रोविंशियल सेंट्रल हॉस्पिटल में हर काम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग कर रहा है। मरीजों का डायग्नोसिस करना, सीटी स्कैन, मरीज का रिकॉर्ड, ऑपरेशन रूप में जो चीजें सप्लाई की जानी है उन्हें पहुंचाने जैसे काम यहां एआई डॉक्टर कर रहे हैं। दरअसल चीन में हर हजार व्यक्तियों पर 2.3 फिजिशियन हैं। स्विट्जरलैंड में ये संख्या 4.25 जबकि यूके में 2.83 हैं। चीन की तेजी से बूढ़ी होती आबादी के कारण सारा दबाव हेल्थकेयर सेक्टर पर है।

चीन की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी टेंसेंट देश में वॉइस रिक्गनिशन की सबसे बड़ी कंपनी मानी जाती है, जबकि आईफ्लाईटेक गुआंगजोऊ के अस्पताल के साथ काम कर रही है। वीचैट जैसे चैट एप का इस्तेमाल करते हुए टेंसेंट मरीज का प्री-डायग्नोसिस कर देती है। एआई डॉक्टर (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) मरीजों से कुछ सवाल पूछता है। मरीजों के उत्तर के आधार पर तय होता है कि आगे कैसा इलाज करना है। डायग्नोज के मामले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एक्यूरेसी 90% तक रही। करीब 200 रोगों की पहचान ये आसानी से कर लेता है। हॉस्पिटल में पहली बार मरीज की फाइल बनाने के लिए फेशियल रिक्गनिशन किया जाता है। छोटा सा वीडियो बनाकर इसका मिलान चीन की नेशनल पब्लिक सिक्योरिटी सिस्टम से किया जाता है।

कुछ दिन पहले चीन में एक टेक्नोलॉजी रिव्यू समिट में ये सवाल उठाया गया था कि अगर कोई एआई डॉक्टर रोग की पहचान करने में गलती कर दे तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। हालांकि अब इसका जवाब भी चीन ने दिया है। चीन के एक रोबोट ने हाल ही में मेडिकल लाइसेंस की परीक्षा भी पास कर ली है। चीन का रोबोट दुनिया का पहला रोबोट है, जिसने उक्त परीक्षा पास की है।

विशेष अनुबंध के तहत

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में रिपोर्ट: चीन में आबादी ज्यादा, डॉक्टर कम; एआई रोबोट ये कमी पूरी कर रहे हैं

24 सवाल पूछकर रोबोट ने बता दी बीमारी

23 वर्ष की एक महिला जैंग से 24 प्रकार के प्रश्न पूछे गए। जैंग को लग रहा था कि पेटदर्द की उनकी शिकायत पुरानी और जेनेटिक है। एआई ने उनसे कहा कि वे किसी गायनेकोलॉजिस्ट से जाकर मिलें। डेटाबेस को जुटाने के लिए हॉस्पिटल ने पिछले 12 साल के मेडिकल रिकॉर्ड को पहले डिजिटल किया और फिर एक लाख से ज्यादा केस स्टडी की। इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल को इसका प्रशिक्षण दिया। इसके लिए भी 30 करोड़ मेडिकल रिकॉर्ड के डेटा का इस्तेमाल किया गया। चीन के अन्य अस्पतालों से भी 1990 के पहले तक के डेटा लिए गए।

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Web Title: चीन में डॉक्टरों की कमी को पूरा कर रहा रोबोट; बीमारी को डायग्नोज करता है, एक्यूरेसी रेट- 90 फीसदी, मेडिकल परीक्षा भी पास कर चुका
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