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गृहस्थी सजाएं, जीवन ताजगी से भर जाएगा

जिंदगी को दूल्हा और दुल्हन की तरह सजाए रखना चाहिए। फिर देखो, बासी कुछ नहीं होगा। यह कहावत मुझे नेपाल में एक सेवक ने...

Dainik Bhaskar

Jun 07, 2018, 05:55 AM IST
गृहस्थी सजाएं, जीवन ताजगी से भर जाएगा
जिंदगी को दूल्हा और दुल्हन की तरह सजाए रखना चाहिए। फिर देखो, बासी कुछ नहीं होगा। यह कहावत मुझे नेपाल में एक सेवक ने बातचीत में कही। वह जिस गांव से आया था, वहां लोग आपस में जिस तरह की चर्चा करते हैं, उसने मुझे सुना दी। लेकिन यदि ध्यान दिया जाए तो बात बड़ी गहरी है। दूल्हा और दुल्हन ये संबोधन नहीं, एक विशेष परिस्थिति है, जिंदगी के एक बहुत बड़े परिवर्तन के समय का शृंगार है। इसमें न सिर्फ सजावट, बल्कि एक नयापन, एक ताजगी होती है। आज हमारी गृहस्थी में तनाव और दबाव हैं। क्यों न इस गृहस्थी को दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाएं। यदि ऐसा नहीं करते हैं तो प|ी को लगता है पति चुक गया, पति को लगता है प|ी पुरानी हो गई। पति का पुरानापन, प|ी में नयापन न होना, दोनों के बीच कलह और अतृप्ति का कारण बन जाता है। पांच बड़े कारण होते हैं जब पति-प|ी उलझते हैं। पहला होता है पूरी गृहस्थी एक रुटीन में चली जाती है। रोज-रोज एक जैसा होता रहता है। दूसरा, एक-दूसरे को जान लिया तो नया कुछ नहीं बचा। तीसरा, हस्तक्षेप के कारण चिड़चिड़ापन आ जाता है, चौथी बात यह रिश्ता अपेक्षाओं पर टिका है और पांचवां जिम्मेदारियों के कारण दबाव बन जाता है। इस सबको उस शृंगार से सजाया जाए जिसे दूल्हे या दुल्हन का शृंगार कहा जाता है। एक बार फिर जीवन में ताजगी भरने का प्रयास करते हुए कभी-कभी गृहस्थी को दूल्हा और दुल्हन की तरह सजाइए। वह नयापन, ताजगी जीवन में खुशियां भर देगी।



पं. िवजयशंकर मेहता

humarehanuman@gmail.com



पं. िवजयशंकर मेहता

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