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क्रिकेट को फिक्सिंग से बचाने के लिए स्टिंग ऑपरेशन के आरोपों की जांच जरूरी

रुआती हिचकिचाहट के बाद ही सही, आईसीसी अल जजीरा के स्टिंग ऑपरेशन के बाद उठे सवालों की जांच करने को तैयार हो गई है।...

Dainik Bhaskar

Jun 03, 2018, 05:55 AM IST
रुआती हिचकिचाहट के बाद ही सही, आईसीसी अल जजीरा के स्टिंग ऑपरेशन के बाद उठे सवालों की जांच करने को तैयार हो गई है। उसने इसके लिए अल जजीरा से वह वीडियो भी मांगा है, जो प्रसारित किया गया। आईसीसी ने उससे असंपादित वीडियो भी मांगा है और उसकी यह मांग उचित भी है। अक्सर मीडिया संगठन अपने सूत्र का खुलासा करने से बचते हैं। अल जजीरा ने भी कुछ ऐसा ही तर्क दिया, ‘स्टिंग में जो खुलासे किए गए हैं, उस पर आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है। आईसीसी खुद जांच के दायरे में आ सकती है। इसलिए उसे पूरे सबूत देना ठीक नहीं होगा।’ यह भी कहा जा रहा है कि कतर का यह चैनल एक और स्टिंग ऑपरेशन की योजना बना रहा है।

अल जजीरा की स्टिंग में मुख्य रूप से दो बातें सामने आईं। पहली, भारत-श्रीलंका गॉल टेस्ट की पिच फिक्स करने की कोशिश हुई। दूसरी, भारत दौरे पर इंग्लैंड के तीन और ऑस्ट्रेलिया के दो क्रिकेटरों ने फिक्सिंग करने के लिए बात की। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के क्रिकेट बोर्ड अपने क्रिकेटरों का बचाव कर रहे हैं। वे स्टिंग पर सवाल उठा रहे हैं। पर आईसीसी पर मामले की जांच कराने का दबाव बन रहा है। भारत और श्रीलंका भी जांच में सहयोग देने को तैयार हैं। वैसे भी यह स्टिंग ऑपरेशन व्यक्तिगत या किसी एक खिलाड़ी के खिलाफ नहीं है। जब मामले की जांच कराई जाएगी तो उसमें यह भी देखा जाएगा कि वीडियो से छेड़छाड़ तो नहीं की गई है। इसलिए जांच से पीछे हटना ठीक नहीं होगा। वैसे भी अगर हम क्रिकेट में पिछले दो दशक में सामने आए तीन सबसे बड़े घोटालों या फिक्सिंग की बात करें तो एेसा किसी क्रिकेट बोर्ड या आईसीसी की सक्रियता से नहीं हुआ है।

साल 2000 (हैंसी क्रोन्ये मामला) और 2013 (आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग) का पता सबसे पहले पुलिस को लगा। वह भी तब, जब वह किसी और मामले की जांच के लिए फोन पर कुछ लोगों की बातें सुन रही थी। 2010 में पाकिस्तान के सलमान बट, मोहम्मद आमिर और मोहम्मद आसिफ द्वारा की गई स्पॉट फिक्सिंग, स्टिंग ऑपरेशन के जरिए सामने आई।

वास्तविकता यह है कि क्रिकेट बोर्ड आैर आईसीसी की अपनी सीमाएं हैं। बोर्ड या आईसीसी प्रशासनिक संगठन हैं, जांच एजेंसी नहीं हैं। आईसीसी ने एंटी करप्शन यूनिट जरूर बनाई है, पर वह बेअसर साबित हुई है। सभी यह मानते हैं कि भ्रष्टाचार खेल को नुकसान पहुंचा रहा है और यह इसे बर्बाद भी कर सकता है। दरअसल, फिक्सिंग सभी खेलों के लिए खतरा है। पर अन्य खेलों के मुकाबले लंबे फॉर्मेट की वजह से क्रिकेट में यह खतरा बढ़ जाता है। आखिर में, मेरा मानना है कि खेलों में यदि किसी भी तरह के भ्रष्टाचार की आशंका सामने आए तो उसकी जांच होनी चाहिए। आईसीसी और अल जजीरा ने अब जांच के लिए बातचीत शुरू की है। उन्हें आपसी असहमति दूर कर मामले की गहराई से जांच करानी चाहिए। यह भी जरूरी है कि यह जांच, आंतरिक एजेंसी की बजाय बाहरी एजेंसी से कराई जाए, ताकि किसी तरह की लीपापोती की संभावना से बचा जा सके।

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