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सरकारी बीएड कॉलेज में केवल एक शिक्षक, फिर भी राजस्थान विश्वविद्यालय ने थमा दी संबद्धता

प्रदेश में सरकारी व निजी बीएड कॉलेज एनसीटीई और राज्य सरकार के तय मापदंडों को पूरा कर रहे हैं या नहीं? इसकी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 25, 2018, 06:05 AM IST

प्रदेश में सरकारी व निजी बीएड कॉलेज एनसीटीई और राज्य सरकार के तय मापदंडों को पूरा कर रहे हैं या नहीं? इसकी मॉनिटरिंग का कोई सिस्टम नहीं है। न तो राज्य सरकार को इसकी परवाह और ना ही कॉलेजों को संबद्धता देने वाले विश्वविद्यालयों को। चिमनपुरा और कालाडेरा के दो सरकारी बीएड कॉलेजों को हाल ही राजस्थान विश्वविद्यालय की संबद्धता देकर इसे साबित भी कर दिया है कि प्रदेश में बीएड कॉलेजों के लिए तय नियम और शर्तें केवल कागजों में ही चल रही हैं। बीएड कॉलेज में 16 शिक्षक जरुरी है, लेकिन चिमनपुरा बीएड कॉलेज में केवल एक शिक्षक और कालाडेरा में 6 शिक्षकों के होते हुए भी विवि ने आगामी सत्र के लिए संबद्धता जारी कर दी।

बीएड कॉलेजों को विवि से संबद्धता लेने के लिए कॉलेज आयुक्तालय से जारी एनओसी की जरूरत होती है। आयुक्तालय में पहली बार एनओसी लेते समय एनसीटीई के नियम और शर्तों के आधार पर दस्तावेज जमा करवाने पर एनओसी मिल जाती है। हर साल उन्हीं शर्तों के आधार पर कॉलेज की एनओसी का नवीनीकरण कर दिया जाता है। भले ही कॉलेज में शर्तों की पालना नहीं हो रही है या नहीं। आयुक्तालय से जब सूचना मांगी मांगी गई कि कितनी कॉलेजों ने शर्तें पूरी की या नहीं। आयुक्तालय का जवाब हैरान करने वाला था। आयुक्तालय ने लिखित में जवाब दिया कि ऐसा कोई पत्र नहीं जारी नहीं होता, जिससे पता चले कि किस कॉलेज ने शर्त पूरी की या नहीं। सवाल उठता है कि जब नियम और शर्तों की पालना की मॉनिटरिंग ही नहीं होती, तो हर साल एनओसी के समय शर्तें रखने की औपचारिकता क्यों निभाई जा रही है?

रियलिटीचैक

चौंकाने वाला सच : प्रदेश के बीएड कॉलेज एनसीटीआई के मापदंडों को पूरा कर रहे हैं या नहीं? मॉनिटरिंग का सिस्टम न कॉलेज निदेशालय और ना ही विश्वविद्यालय में

सात सरकारी बीएड कॉलेजों में शिक्षकों की स्थिति

कॉलेज का नाम शिक्षक शिक्षक

2015 में 2018 में

सेठ आरएल सहरीया राजकीय महाविद्यालय, कालाडेरा, जयपुर 07 06

बाबा भगवान दास राजकीय महाविद्यालय, चिमनपुरा, जयपुर 04 01

श्री गोविंद सिंह गुर्जर राजकीय महाविद्यालय, नसीराबाद, अजमेर 05 02

एसपीएम राजकीय महाविद्यालय, भोपालगढ़, जोधपुर 06 06

राजकीय महाविद्यालय, खैरवाड़ा, उदयपुर 06 05

राजकीय उच्च अध्ययन शिक्षण संस्थान, बीकानेर और अजमेर इनमें एनसीटीई के मापदंडों की पालना तो दूर यहां तो स्कूली शिक्षक पढाई करवा रहे हैं।

दो उदाहरण...जो बताते हैं कि नियमों का पालन केवल कागजों में

बाबा भगवान दास राजकीय महाविद्यालय, चिमनपुरा, जयपुर

इस बीएड कॉलेज में पिछले साल 4 शिक्षक थे। सरकार से एनओसी मिलने पर राजस्थान विवि की संबद्धता प्राप्त हो गई। विवि ने संबद्धता जारी करते समय पिछले साल 15 दिसंबर 2017 तक नियमों का पालन करने के निर्देश दिए थे। इस साल कॉलेज में 4 की जगह एक शिक्षक रह गया। लेकिन विवि ने बिना किसी शर्त के आगामी सत्र के लिए कॉलेज को संबद्धता दे दी है।

सेठ आरएल सहरीया राजकीय महाविद्यालय, कालाडेरा, जयपुर

इस बीएड कॉलेज में पिछले साल तक 7 शिक्षक थे। कॉलेज को विवि ने 15 दिसंबर 2017 तक स्टाफ पूरा करने की शर्त के साथ संबद्धता दी थी। इस बार शिक्षकों की संख्या 6 रह गई। इसके बावजूद कॉलेज को संबद्धता दे दी गई। इस शर्तें के साथ की कॉलेज में 7 शिक्षकों की कमी है, जिसको 15 जून तक पूरा करना होगा। कॉलेज में 10 शिक्षकों की कमी है।

इन शर्तों के साथ जारी होती है एनओसी

बीएड कॉलेज की वेबसाइट हो। आयुक्तालय को आधारभूत संरचनाओं के दस्तावेज देने होते हैं। कक्षा कक्ष, प्रयोगशाला का माप और चित्र प्रस्तुत करना होता है। कोर्स में नामांकित छात्रों की संख्या के साथ कुल सीट और प्रवेशित सीट की संख्या बतानी होती है। एनसीटीई के नियम 2014 के तहत अनुमोदित शैक्षिक और अशैक्षिक स्टाफ की सूची उपलब्ध करानी होती है।

आयुक्तालय एनओसी भले ही जारी करता हो, लेकिन वास्तव में कॉलेजों में शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं। इसकी कोई जांच नहीं हो रही है। सूचना के अधिकार के तहत जांच के दस्तावेज मांगे गए तो आयुक्तालय ने ऐसे दस्तावेज होने से साफ इंकार कर दिया। आयुक्तालय की इसी लापरवाही के चलते बीएड कॉलेज मनमानी कर रहे हैं और कॉलेजों में नियमों का पालन नहीं हो रहा। - डॉ. जितेंद्र शर्मा, रिटायर व्याख्याता (शिक्षा)

प्रथम बार एनओसी जारी की जाती है तो दस्तावेजों का निरीक्षण किया जाता है। इसके बाद पहले से संचालित बीएड कॉलेजों की एनओसी के नवीनीकरण के लिए निरीक्षण नहीं कराया जाता है। अगर किसी कॉलेज की शिकायत आती है तो ही जांच की जाती है। - संयुक्त निदेशक (निजी संस्था) कॉलेज शिक्षा

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