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आमतौर पर मैं एक ही डायरेक्टर के साथ दोबारा काम नहीं करता : डैनी

डै नी डेन्जोंगपा अपनी शर्तों पर फिल्में करने के लिए जाने जाते हैं। एक जमाना था जब वे साल भर में 6-7 फिल्मों में काम...

Dainik Bhaskar

May 29, 2018, 06:05 AM IST
आमतौर पर मैं एक ही डायरेक्टर के साथ दोबारा काम नहीं करता : डैनी
डै नी डेन्जोंगपा अपनी शर्तों पर फिल्में करने के लिए जाने जाते हैं। एक जमाना था जब वे साल भर में 6-7 फिल्मों में काम किया करते थे लेकिन कुछ वर्षों से वे एक-दो फिल्मों में ही दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, अब वे बैक टू बैक तीन फिल्मों में दिखाई देने वाले हैं। हािलया रिलीज ‘बायोस्कोपवाला’ के अलावा वे ‘मणिक‍र्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी’ और ‘बैटल ऑफ सारागढ़ी’ में दिखाई देंगे।

डैनी बताते हैं,

 कंगना रनौट की फिल्म ‘मणिकर्णिका : द क्वीन अॉफ झांसी’ में मैं गुलाम मोहम्मद गौस खान का किरदार निभा रहा हूं। वे झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के खास रक्षक थे। झांसी पर जब अंग्रेजों ने हमला किया था तब गौस खान ने ही अंग्रेजों के दांत खट्टे किए थे। इसके अलावा राजकुमार संतोषी की ‘बैटल ऑफ सारागढ़ी’ में मैं अफगान सरदार का रोल प्ले कर रहा हूं। उसने हजारों जंगी पश्तून और आदिवासियों की सेना लेकर 36वीं सिक्ख रेजीमेंट से लोहा लिया था। फिल्म में रणदीप हुड्डा भारतीय सेना के प्रमुख की भूमिका में हैं। 

इस साल फरवरी में जब आनंद एल राय ने राजकुमार संतोषी के साथ फिल्म करने का ऐलान किया तो लगा कि रणदीप स्टारर यह फिल्म अभी और आगे खिसकेगी और ऐसा हुआ भी। इसी टॉपिक पर अक्षय कुमार की ‘केसरी’ भी बन रही है, जिसकी शूटिंग ऑलमोस्ट कम्पलीट है। ऐसा माना जा रहा था कि ‘बैटल ऑफ सारागढ़ी’ डिब्बा बंद हो जाएगी। मगर डैनी ने उन खबरों को कोरी अफवाह करार देते हुए कहा, ‘हम बहुत जल्द ही इस फिल्म की शूटिंग शुरू करने वाले हैं। राजकुमार दूसरे ऐसे डायरेक्टर होंगे, जिनके साथ मैं सबसे अधिक फिल्में करूंगा। वरना मैं आमतौर पर एक ही डायरेक्टर के साथ दोबारा काम नहीं करता।’

अपनी फिल्मों के अफगानी कनेक्शन के बारे में डैनी बताते हैं,

‘फिल्मों के जरिए मेरा अफगान कनेक्शन रहा है। फिरोज खान के साथ ‘धर्मात्मा’ और अमिताभ बच्चन के संग ‘खुदा गवाह’ तो अफगानिस्तान पर ही बेस्ड थीं। हमने वहां तब शूटिंग की थी जब वहां तालिबान का साया था। यह बड़ा ही रोमांचक अनुभव था। ‘बायोस्कोपवाला’ की शूटिंग के लिए हम अफगानिस्तान नहीं गए। हमने लद्दाख में ही सेट बनाया। ‘बैटल ऑफ सारागढ़ी’ के साथ भी शायद ऐसा ही हो। इसके लिए भी हम अफगानिस्तान नहीं जाएंगे। वहां जाने के चक्कर में ही मुझे ‘शोले’ छोड़नी पड़ी थी पर मुझे इसका मलाल नहीं है। वह इसलिए क्योंकि उस फिल्म के बाद अमजद खान की प्राइस काफी बढ़ गई थी। उनके बाद नंबर टू विलेन मैं ही था तो ऑटोमैटिकली मेरी भी फीस बढ़ गई थी।’



अमित कर्ण | मुंबई

डै नी डेन्जोंगपा अपनी शर्तों पर फिल्में करने के लिए जाने जाते हैं। एक जमाना था जब वे साल भर में 6-7 फिल्मों में काम किया करते थे लेकिन कुछ वर्षों से वे एक-दो फिल्मों में ही दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, अब वे बैक टू बैक तीन फिल्मों में दिखाई देने वाले हैं। हािलया रिलीज ‘बायोस्कोपवाला’ के अलावा वे ‘मणिक‍र्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी’ और ‘बैटल ऑफ सारागढ़ी’ में दिखाई देंगे।

डैनी बताते हैं,

 कंगना रनौट की फिल्म ‘मणिकर्णिका : द क्वीन अॉफ झांसी’ में मैं गुलाम मोहम्मद गौस खान का किरदार निभा रहा हूं। वे झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के खास रक्षक थे। झांसी पर जब अंग्रेजों ने हमला किया था तब गौस खान ने ही अंग्रेजों के दांत खट्टे किए थे। इसके अलावा राजकुमार संतोषी की ‘बैटल ऑफ सारागढ़ी’ में मैं अफगान सरदार का रोल प्ले कर रहा हूं। उसने हजारों जंगी पश्तून और आदिवासियों की सेना लेकर 36वीं सिक्ख रेजीमेंट से लोहा लिया था। फिल्म में रणदीप हुड्डा भारतीय सेना के प्रमुख की भूमिका में हैं। 

इस साल फरवरी में जब आनंद एल राय ने राजकुमार संतोषी के साथ फिल्म करने का ऐलान किया तो लगा कि रणदीप स्टारर यह फिल्म अभी और आगे खिसकेगी और ऐसा हुआ भी। इसी टॉपिक पर अक्षय कुमार की ‘केसरी’ भी बन रही है, जिसकी शूटिंग ऑलमोस्ट कम्पलीट है। ऐसा माना जा रहा था कि ‘बैटल ऑफ सारागढ़ी’ डिब्बा बंद हो जाएगी। मगर डैनी ने उन खबरों को कोरी अफवाह करार देते हुए कहा, ‘हम बहुत जल्द ही इस फिल्म की शूटिंग शुरू करने वाले हैं। राजकुमार दूसरे ऐसे डायरेक्टर होंगे, जिनके साथ मैं सबसे अधिक फिल्में करूंगा। वरना मैं आमतौर पर एक ही डायरेक्टर के साथ दोबारा काम नहीं करता।’

अपनी फिल्मों के अफगानी कनेक्शन के बारे में डैनी बताते हैं,

‘फिल्मों के जरिए मेरा अफगान कनेक्शन रहा है। फिरोज खान के साथ ‘धर्मात्मा’ और अमिताभ बच्चन के संग ‘खुदा गवाह’ तो अफगानिस्तान पर ही बेस्ड थीं। हमने वहां तब शूटिंग की थी जब वहां तालिबान का साया था। यह बड़ा ही रोमांचक अनुभव था। ‘बायोस्कोपवाला’ की शूटिंग के लिए हम अफगानिस्तान नहीं गए। हमने लद्दाख में ही सेट बनाया। ‘बैटल ऑफ सारागढ़ी’ के साथ भी शायद ऐसा ही हो। इसके लिए भी हम अफगानिस्तान नहीं जाएंगे। वहां जाने के चक्कर में ही मुझे ‘शोले’ छोड़नी पड़ी थी पर मुझे इसका मलाल नहीं है। वह इसलिए क्योंकि उस फिल्म के बाद अमजद खान की प्राइस काफी बढ़ गई थी। उनके बाद नंबर टू विलेन मैं ही था तो ऑटोमैटिकली मेरी भी फीस बढ़ गई थी।’

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आमतौर पर मैं एक ही डायरेक्टर के साथ दोबारा काम नहीं करता : डैनी
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