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हृदय प्रत्यारोपण दे सकता है जीवन

Rani News - यदि किसी व्यक्ति का हृदय बिलकुल भी ठीक से काम न कर पा रहा हो और व्यक्ति मरणासन्न अवस्था में पहुंच गया हो ऐसे में...

Dainik Bhaskar

Jun 09, 2018, 06:05 AM IST
हृदय प्रत्यारोपण 
 दे सकता है जीवन
यदि किसी व्यक्ति का हृदय बिलकुल भी ठीक से काम न कर पा रहा हो और व्यक्ति मरणासन्न अवस्था में पहुंच गया हो ऐसे में हार्ट ट्रांसप्लांट के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचता। इसके अतिरिक्त हृदय में जन्मजात दोष और बेहद गंभीर बीमारी की हालत में भी हार्ट ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। लेकिन हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद भी व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है।

कब जरूरी है हार्ट ट्रांसप्लांट

यदि किसी व्यक्ति का हृदय विफलता के अंतिम चरण में पहुंच गया हो, इस्कीमिक हृदय रोग ( Ischemic heart disease), कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy), जन्मजात हृदय विकार (Congenital heart disease) आदि।

यदि किसी व्यक्ति में हृदय प्रत्यारोपण के बिना जीने की संभावना एक साल से ज्यादा न हो।

व्यक्ति को ऐसी दूसरी परेशानियां न हों जिससे उसकी जिंदगी पर असर पड़े।

यदि डॉक्टर को इस बात का पूरा विश्वास हो कि उसके मरीज के हृदय प्रत्यारोपण के बाद पहले के मुकाबले ज्यादा अच्छी जिंदगी जी सकता है।

कुछ केन्द्रों पर हृदय प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों को सर्जरी से 4 से 6 महीने पहले धूम्रपान और एल्कोहल का सेवन न करने की शख्त हिदायत भी दी जाती है।

हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद

एक बार हृदय प्रत्यारोपण के बाद स्वास्थ्य की प्रकिया हृदय की बाकी सर्जरी के जैसी ही चलती है। इस सर्जरी के बाद आपको 1 से 2 हफ्ते अस्पताल में ही डॉक्टर और नर्स की देखभाल में बिताने होते हैं। इसके अलावा आपको और कितने दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है यह आपके खुद के स्वास्थ्य और स्थिति पर निर्भर करता है। अस्पताल में रहने के दौरान ही आप कार्डियक पुनर्वास कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं। इसके बाद जब डॉक्टर निश्चिंत हो जाए कि आपके शरीर ने आपके हृदय को स्वीकार कर लि या है और अब वह उसके साथ सक्रिय हो रहा है तो डॉक्टर आपको घर जाने की इजाजत दे देंगे। इसके बाद आप खुशी-खुशी घर जा सकते हैं।

कार्डियक पुनर्वास

कार्डियक पुनर्वास वह प्रकिया है, जिसमें आप सर्जरी के बाद धीरे-धीरे सामान्य होने की तरफ बढ़ते हैं। हालांकि आपका हृदय शुरुआत में आपके कार्यों के प्रति थोड़ा अलग तरह से व्यवहार कर सकता है। हो सकता है कि आपके हृदय का स्पंदन पहले की तरह ना बढ़े और हो सकता है कि इसका स्पंदन स्तर ज्यादा सहज हो जाए। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि जो तंत्रिकाएं आपके हृदय को पहले नियंत्रित करती थी सर्जरी के दौरान उन्हें काट दिया गया हो।

जोख़िम या दुष्प्रभाव

शरीर द्वारा किसी और के हृदय को अस्वीकार कर देना।

कहीं हृदय को अस्वीकार तो नहीं कर दिया गया है इसके लिए डॉक्टर को लगातार मरीज के हृदय के उत्तकों की जांच (बायोप्सी), इकोकार्डियोग्राफी (ECG, EKG) या रक्त की जांच द्वारा करनी पड़ती है। इस स्थिति में यदि शरीर, हृदय को स्वीकार नहीं कर पाता तो मरीज को नियमित तौर पर इम्यूनोसप्रेससेंट्स या स्टेरॉयड (Immunosuppressants or steroids) दवाई का प्रयोग करना पड़ता है। इन दवाइयों के जोख़िम भी बहुत गंभीर हो सकते हैं।

संक्रमण

मृत्यु

धमनियों का रुकना यानि धमनीकलाकाठिन्य (Atherosclerosis), जो दाता के हृदय से ही शुरू हो सकता है। यह आम तौर पर एक जटिलता है और अगर यह जटिलता किसी में देखने को मिले तो यह काफी लम्बे समय तक चल सकती है।

सर्जरी के बाद रखें ख़ास खयाल

हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद दिनचर्या में बदलाव करना आवश्यक हो जाता है। सर्जरी के बाद आपको बेहद सख्ती के साथ नियमित तौर पर दवाइयां लेनी होगी और नियमित रूप से होने वाली जांच (बायोप्सी)भी करानी होगी। इस जांच में हृदय टिश्यू द्वारा हृदय के स्वीकृत और अस्वीकृत होने की जानकारी मिलती है। इस तरह डॉक्टर को यह पता चलता है कि ट्रांसप्लांट किया हुआ हृदय किस तरह काम कर रहा है और आपको कितनी देखभाल तथा आराम की जरूरत है। इसके साथ ही आप क्षमता के आधार पर अपने काम भी कर सकते हैं।

यदि किसी व्यक्ति का हृदय बिलकुल भी ठीक से काम न कर पा रहा हो और व्यक्ति मरणासन्न अवस्था में पहुंच गया हो ऐसे में हार्ट ट्रांसप्लांट के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचता। इसके अतिरिक्त हृदय में जन्मजात दोष और बेहद गंभीर बीमारी की हालत में भी हार्ट ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। लेकिन हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद भी व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है।

कब जरूरी है हार्ट ट्रांसप्लांट

यदि किसी व्यक्ति का हृदय विफलता के अंतिम चरण में पहुंच गया हो, इस्कीमिक हृदय रोग ( Ischemic heart disease), कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy), जन्मजात हृदय विकार (Congenital heart disease) आदि।

यदि किसी व्यक्ति में हृदय प्रत्यारोपण के बिना जीने की संभावना एक साल से ज्यादा न हो।

व्यक्ति को ऐसी दूसरी परेशानियां न हों जिससे उसकी जिंदगी पर असर पड़े।

यदि डॉक्टर को इस बात का पूरा विश्वास हो कि उसके मरीज के हृदय प्रत्यारोपण के बाद पहले के मुकाबले ज्यादा अच्छी जिंदगी जी सकता है।

कुछ केन्द्रों पर हृदय प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों को सर्जरी से 4 से 6 महीने पहले धूम्रपान और एल्कोहल का सेवन न करने की शख्त हिदायत भी दी जाती है।

हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद

एक बार हृदय प्रत्यारोपण के बाद स्वास्थ्य की प्रकिया हृदय की बाकी सर्जरी के जैसी ही चलती है। इस सर्जरी के बाद आपको 1 से 2 हफ्ते अस्पताल में ही डॉक्टर और नर्स की देखभाल में बिताने होते हैं। इसके अलावा आपको और कितने दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है यह आपके खुद के स्वास्थ्य और स्थिति पर निर्भर करता है। अस्पताल में रहने के दौरान ही आप कार्डियक पुनर्वास कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं। इसके बाद जब डॉक्टर निश्चिंत हो जाए कि आपके शरीर ने आपके हृदय को स्वीकार कर लि या है और अब वह उसके साथ सक्रिय हो रहा है तो डॉक्टर आपको घर जाने की इजाजत दे देंगे। इसके बाद आप खुशी-खुशी घर जा सकते हैं।

कार्डियक पुनर्वास

कार्डियक पुनर्वास वह प्रकिया है, जिसमें आप सर्जरी के बाद धीरे-धीरे सामान्य होने की तरफ बढ़ते हैं। हालांकि आपका हृदय शुरुआत में आपके कार्यों के प्रति थोड़ा अलग तरह से व्यवहार कर सकता है। हो सकता है कि आपके हृदय का स्पंदन पहले की तरह ना बढ़े और हो सकता है कि इसका स्पंदन स्तर ज्यादा सहज हो जाए। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि जो तंत्रिकाएं आपके हृदय को पहले नियंत्रित करती थी सर्जरी के दौरान उन्हें काट दिया गया हो।

जोख़िम या दुष्प्रभाव

शरीर द्वारा किसी और के हृदय को अस्वीकार कर देना।

कहीं हृदय को अस्वीकार तो नहीं कर दिया गया है इसके लिए डॉक्टर को लगातार मरीज के हृदय के उत्तकों की जांच (बायोप्सी), इकोकार्डियोग्राफी (ECG, EKG) या रक्त की जांच द्वारा करनी पड़ती है। इस स्थिति में यदि शरीर, हृदय को स्वीकार नहीं कर पाता तो मरीज को नियमित तौर पर इम्यूनोसप्रेससेंट्स या स्टेरॉयड (Immunosuppressants or steroids) दवाई का प्रयोग करना पड़ता है। इन दवाइयों के जोख़िम भी बहुत गंभीर हो सकते हैं।

संक्रमण

मृत्यु

धमनियों का रुकना यानि धमनीकलाकाठिन्य (Atherosclerosis), जो दाता के हृदय से ही शुरू हो सकता है। यह आम तौर पर एक जटिलता है और अगर यह जटिलता किसी में देखने को मिले तो यह काफी लम्बे समय तक चल सकती है।

सर्जरी के बाद रखें ख़ास खयाल

हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद दिनचर्या में बदलाव करना आवश्यक हो जाता है। सर्जरी के बाद आपको बेहद सख्ती के साथ नियमित तौर पर दवाइयां लेनी होगी और नियमित रूप से होने वाली जांच (बायोप्सी)भी करानी होगी। इस जांच में हृदय टिश्यू द्वारा हृदय के स्वीकृत और अस्वीकृत होने की जानकारी मिलती है। इस तरह डॉक्टर को यह पता चलता है कि ट्रांसप्लांट किया हुआ हृदय किस तरह काम कर रहा है और आपको कितनी देखभाल तथा आराम की जरूरत है। इसके साथ ही आप क्षमता के आधार पर अपने काम भी कर सकते हैं।

दैिनक भास्कर एवं

हिंदुस्तान जिंक का

संयुक्त प्रयास

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