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जयपुर जेल में ठगों का नेटवर्क, मोबाइल से ठगी, पकड़े गए, फिर नीमराना में की वारदात

Danik Bhaskar | May 09, 2018, 06:10 AM IST



हेमसिंह चौहान | नीमराना

बदमाश पुलिस के तौर-तरीके समझ जाएं तो कानून का कैसा मखौल बना देते हैं यह नीमराना के पेट्रोल पंप मालिक से 31 मार्च को हुई 75 हजार रुपए की ठगी की जांच में सामने आया है। दरअसल नीमराना से पहले वैसी ही तीन वारदातें जनवरी 2018 में चुरू, पाली व सिरोही जिलों में हो चुकी हैं। सिरोही पुलिस ने मामला खोला तो पता चला कि ठगी मोबाइल कॉल के जरिये जयपुर केंद्रीय जेल से की थी। जेल में बंद दो बदमाश और गलता गेट से उनके दो साथियों को गिरफ्तार भी किए, लेकिन वापस उसी जेल में पहुंचा दिया, जहां से नेटवर्क ऑपरेट हो रहा था। नतीजा ये रहा कि 2 माह बाद नीमराना में एएसपी के नाम से कॉल कर पेट्रोल पंप संचालक से 75 हजार रुपए ठगे गए। इस कॉल की लोकेशन जयपुर सेंट्रल जेल में निकली। तो पुलिस के होश उड़े हुए हैं। खामियों का खुलासा होने के डर से नीमराना और चुरू पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही।

गिरोह में दो भाई, एक जेल में दूसरा बाहर जो तलाशता है शिकार : गिरोह में शामिल अनमोल रतन व जयपुर सेंट्रल जेल में बंद मोनू उर्फ धीरज सगे भाई हैं। अनमोल जेल से बाहर रहकर शिकार तलाशता है। वह किसी बाहरी व्यक्ति को झांसे में लेकर अकाउंट नंबर धीरज व राजीव को देता था। फिर ये लोग शिकार को फोन करते। अलग-अलग खाता नंबर देकर उसमें रकम डलवा लेते। अनमोल इस पैसे को खाता धारकों से निकलवा लेता।

बड़ा सवाल :जयपुर जैसी सेंट्रल जेल से बदमाश फोन पर पुलिस अधिकारी बन कॉल और ठगी कर रहे हैं। पुलिस उनका कुछ नहीं बिगाड़ पा रही।

भास्कर इन्वेस्टिगेशन: टल सकती थी नीमराना की वारदात

भास्कर ने तीनों जिला पुलिस की पड़तालों के तार जोड़े तो पता चला कि प्रदेश पुलिस में समन्वय की कमी और जयपुर जेल में मोबाइलों पर कमजोर निगरानी को बदमाशों ने वरदान बना लिया है। तालमेल होता तो नीमराना की ठगी टाली जा सकती थी, क्योंकि सिरोही पुलिस ने दो माह पहले ही वारदात का खुलासा कर दिया था। फिर चुरू की ठगी भी जयपुर सेंट्रल जेल से जुड़ी। इसके बावजूद अन्य जिलों की पुलिस ने एहतियात नहीं बरता। इससे पाली में पूर्व प्रधान राजेंद्रसिंह कछवाहा से एक युवक ने खुद को एएसपी ज्योतिस्वरूप शर्मा बताकर 25 हजार रुपए और फिर नीमराना में ठगी कर ली गई। नीमराना पुलिस ने तो थाने से महज 200 मीटर दूर शहीद नरेंद्र यादव पेट्रोल पंप संचालक से 31 मार्च को हुई ठगी की एफआईआर ही 17 अप्रेल को दर्ज की।

ये हैं खामियां, जिनसे मिल रही बदमाशों को ताकत