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ये है बेघरों का घर, 280 से अधिक विमंदितों, घायलों की 24 घंटे देखभाल करतीं 70 साल पार की 5 सिस्टर, कहते हैं मांओं की मां

Rani News - मां यानी संसार। बिना कुछ कहे जो सबकुछ समझ जाए, वो मां ही है। जीवन की हर परिस्थितियों में जन्म से लेकर आखिरी सांस तक...

Dainik Bhaskar

May 14, 2018, 06:10 AM IST
ये है बेघरों का घर, 280 से अधिक विमंदितों, घायलों की 24 घंटे देखभाल करतीं 70 साल पार की 5 सिस्टर, कहते हैं मांओं की मां
मां यानी संसार। बिना कुछ कहे जो सबकुछ समझ जाए, वो मां ही है। जीवन की हर परिस्थितियों में जन्म से लेकर आखिरी सांस तक जो सेवा को तत्पर रहे, वो मां है। खून के रिश्ते भले न हो, पर अपनों के प्यार से महरूफ विमंदितों, मजबूरों, भटके लोगों और घर से निकाले लोगों की देखभाल करना भी मां से कम नहीं। आज मदर्स डे है। आपको मिलवाते हैं ऐसी ही कुछ मांओं से जो पिछले कई सालों से निस्वार्थ भाव से ऐसे जरूरतमंदों की देखभाल तो कर ही रही हैं, मां की कमी को भी पूरा कर रही हैं। ये है घरों से बेघर लोगों का घर उदयपुर का आशा धाम। यहां उन लोगों को घर और मां-पिता जैसी देखभाल मिलती है। फिलहाल इस घर में राजस्थान के साथ बाहर के भी 280 से अधिक ऐसे मजबूर और जरूरतमंद लोग रह रहे हैं जिन्हें या तो घरवालों ने उन्हें घर से निकाल दिया या वे खुद घरवालों की प्रताड़ना से परेशान होकर यहां आ गए। इनमें अधिकतर लोग विमंदित हैं। इन्हें संभालने के लिए 5 सिस्टर 24 घंटे लगी रहती हैं और घर से निकाले लोगों को मां जैसा प्यार और देखभाल करती हैं। इन्हें सुबह उठाती हैं, नहलाती हैं, खाना खिलाती हैं, उनके साथ खेलती हैं और हर सुख-दुख को एक मां की तरह समझती हैं।

पिछले 20 साल से कर रहीं उन जरूरतमंदों की देखभाल जिन्हें अपनों ने ही कर दिया घर से बेघर, प्रताड़ित भी हुए

सुबह उठाती हैं, नहलाती हैं, खाना खिलाती हैं, साथ खेलती हैं और हर सुख-दुख को एक मां की तरह समझती हैं

70 साल पार हैं सभी सिस्टर, 20 साल से कर रही सेवा

70 साल पार हैं सभी सिस्टर, 20 साल से कर रही सेवा

आश्रम में फिलहाल 5 लोग सिस्टर डेमियन, सिस्टर इगनास, सिस्टर यूजीन, सिस्टर फाबिया, सिस्टर अर्चना, सिस्टर डेनिसा इन विमंदितों की देखभाल करने के साथ इलाज भी करती हैं। सिस्टर इगनास 85 साल की हैं। वे आश्रम में पिछले 20 साल से विमंदितों की देखभाल कर रही हैं। आश्रम के सभी रिकॉर्ड का संग्रह करना, अकाउंट्स का काम करना, कार्याे पर निगरानी रखना इनका काम है। 78 साल की सिस्टर डेमियन ने आश्रम की आधारशिला रखी और 21 साल से संचालन कर रही हैं।

आश्रम में फिलहाल 5 लोग सिस्टर डेमियन, सिस्टर इगनास, सिस्टर यूजीन, सिस्टर फाबिया, सिस्टर अर्चना, सिस्टर डेनिसा इन विमंदितों की देखभाल करने के साथ इलाज भी करती हैं। सिस्टर इगनास 85 साल की हैं। वे आश्रम में पिछले 20 साल से विमंदितों की देखभाल कर रही हैं। आश्रम के सभी रिकॉर्ड का संग्रह करना, अकाउंट्स का काम करना, कार्याे पर निगरानी रखना इनका काम है। 78 साल की सिस्टर डेमियन ने आश्रम की आधारशिला रखी और 21 साल से संचालन कर रही हैं।

आश्रम में विमंदित महिलाएं और सिस्टर। फोटो : राहुल सोनी

यहां कई ऐसे गंभीर घायल भी जिन्हें हर पल देखभाल की जरूरत

इस आश्रम में रहने वालों में हादसों में घायल कई लोग हैं जिन्हें 24 घंटे देखभाल की जरूरत पड़ती है। ये यह सिस्टर मां की तरह इनकी दिन रात सेवा करती हैं। रोज सुबह नहलाकर तैयार करने के साथ समय पर दवाइयां खिलाती हैं।

एक कमरे से शुरू की, लोग बढ़े और अब 3 बीघा में है सेवाधाम

अलीपुरा में किराए के कमरे पर सेवा करनी शुरू की। सड़क किनारे पड़े विमंदितों, हादसों में घायलों, जरूरतमंदों को आसरा दिया और देखभाल शुरू की। लोगों की संख्या बढ़ती गई। एक समाजसेवी ने सज्जन नगर में 3 बीघा जगह दी जिसे आशाधाम आश्रम सोसायटी के नाम से पंजीकृत कर संस्था बनाया गया।

ये है बेघरों का घर, 280 से अधिक विमंदितों, घायलों की 24 घंटे देखभाल करतीं 70 साल पार की 5 सिस्टर, कहते हैं मांओं की मां
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