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2019 में लोग यह देखकर वोट नहीं करेंगे कि नेहरू-इंदिरा ने क्या किया, ये देखेंगे कि भाजपा ने क्या वायदे किए थे

Dainik Bhaskar

May 31, 2018, 06:10 AM IST
2019 में लोग यह देखकर वोट नहीं करेंगे कि नेहरू-इंदिरा ने क्या किया, ये देखेंगे कि भाजपा ने क्या वायदे किए थे

जवाब: मैं चुनाव नहीं लडूंगा। किसी दल का प्रचार नहीं करूंगा। मुद्दों पर जरूर बात रखेंगे, फिर वो वर्तमान सरकार के पक्ष में जाए या विरोध में।


जवाब: दिल्ली में 30 जनवरी को मंच लॉन्च किया, तब मैंने कहा था कि इसके कोई पदाधिकारी या सदस्य नहीं होंगे। यह एक आंदोलन है।


जवाब: बहुत सारी गलत बातें हो रहीं हैं, उसके बारे में आवाज उठाई। फिर ये हुआ कि पार्टी में है, पार्टी की ही खिलाफत कर रहे हैं तो पार्टी छोड़ दी।


जवाब: कभी-कभी जुबान फिसल जाती है। हमारी भी फिसली है, पर प्रधानमंत्री की नहीं फिसलनी चाहिए। मर्यादा में रहकर तथ्यात्मक बातें रखें और सत्य से परे बात नहीं करनी चाहिए।


जवाब: मैं सिर्फ कर्नाटक की ही बात नहीं कर रहा हूं। प्रधानमंत्रीजी ने जितने भी भाषण दिए हैं उनमें कई बार दो चीजें हुई हैं- एक, मर्यादा का उल्लंघन। दूसरा, तथ्यों से परे बातें। गुजरात चुनाव में मनमोहन सिंह पर आरोप लगाया कि वे पाक से मिले हुए हैं। वह सर्वथा अनुचित था। मणिशंकर अय्यर ने मुझे भी खाने पर बुलाया था, उस समय तो मैं भाजपा में ही था। मैं जा नहीं पाया। दिल्ली में होता तो जरूर जाता। तो मुझ पर भी आरोप लगता कि पाक के पूर्व विदेश मंत्री के साथ मिलकर षड्यंत्र कर रहे हैं, गुजरात चुनाव में। अभी कर्नाटक में उन्होंने जनभावनाओं को भड़काने के लिए कहा कि जनरल थिमैय्या और जनरल करिअप्पा के साथ कांग्रेस पार्टी ने दुर्व्यवहार किया। पुरानी बातें उठा रहे हैं, सन् 1948, 1950 की। जो तथ्यात्मक दृष्टिकोण से भी गलत हैं। थिमैय्या 1948 में कमांडर इन चीफ नहीं थे। कोई अंग्रेज था। एक महत्वपूर्ण बात कहना चाहता हूं कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में लोग फैसला यह देखकर नहीं करेंगे कि पंडित नेहरू ने क्या किया? इंदिरा गांधी ने क्या किया? वो ये देखकर करेंगे कि भाजपा ने क्या वायदे किए थे? और उनका क्या हुआ? ये होगा मुख्य मुद्दा। उस पर बात करनी चाहिए।


जवाब : नहीं, मैंने एक लेख में देश की आर्थिक स्थिति पर टिप्पणी की थी। उस पर काफी हंगामा मचा। उसके बाद सरकार की तरफ से इसे निचले स्तर पर पहुंचाने का प्रयास हुआ। दूसरे दिन हमारे बेटे ने भी एक लेख लिखा। इस पर एेसा बताने का प्रयास हुआ कि पिता-पुत्र में झगड़ा हो गया है। मैं उससे बचकर निकल गया। दूसरी बात, इस बात को पर्सनल बनाओ कि मुझे नौकरी (पद) चाहिए, ताकि लोग मुद्दे से भटक जाएं। मैंने दोनों को नकार दिया। मैंने ही नहीं, सभी ने नकार दिया।





मोदी सरकार की नीति और कार्य प्रणाली की आलोचना कर रहे पूर्व वित्त और विदेश मंत्री 81 वर्षीय यशवंत सिन्हा से बात की भास्कर के धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया ने।

सवाल: आपके बेटे जयंत बीजेपी से हजारीबाग से चुनाव लड़ेंगे तो आप क्या करेंगे?

जवाब: वो देखेंगे। अभी चुनाव में एक वर्ष का वक्त है। लेकिन एक बात तो स्पष्ट है कि मैं भारतीय जनता पार्टी में नहीं हूं। तो उस पार्टी के लिए वोट कैसे मांग सकता हूं? अभी थोड़ा समय और बीतने दीजिए। इसके बाद हमारा आगे क्या रुख होगा, उनका क्या रुख होगा, वो क्लियर होगा।

विस्तृत इंटरव्यू पढ़ें | पेज 15 पर

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