--Advertisement--

मौसम का नहीं, यह लापरवाही का जानलेवा बवंडर

राजस्थान में बुधवार शाम आए मौत के तूफान ने 40 लोगों की जान ले ली। ये जानें बचाई जा सकती थीं...बशर्ते राज्य का मौसम...

Dainik Bhaskar

May 04, 2018, 06:15 AM IST
मौसम का नहीं, यह लापरवाही का जानलेवा बवंडर
राजस्थान में बुधवार शाम आए मौत के तूफान ने 40 लोगों की जान ले ली। ये जानें बचाई जा सकती थीं...बशर्ते राज्य का मौसम विभाग तूफान आने से पहले सरकार, आपदा प्रबंधन और सभी कलेक्टरों को अलर्ट भेजकर सचेत कर देता। हैरानी देखिए... मौसम विभाग को तूफान का पूर्वानुमान करीब 10 घंटे पहले से था, लेकिन विभाग ने महाखतरे का यह अलर्ट अपनी वेबसाइट पर डालकर औपचारिकता पूरी कर ली। जबकि नियमाें के अनुसार उसे खतरे का यह पूर्वानुमान सरकार सहित सभी संबंधित विभागों को भेजना था। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि यह लापरवाही इसलिए हुई, क्योंकि जयपुर स्थित मौसम विभाग के केंद्र का राडार ही काम नहीं कर रहा था। इसलिए पूर्वानुमान को वो चार्ट ही तैयार नहीं हो पाया, जो कलेक्टरों को भेजा जाता है।

भास्कर को कलेक्टरों ने बातचीत में बताया : उन्हें मौसम विभाग ने कोई अलर्ट भेजा ही नहीं। आपदा राहत के सचिव हेमंत गेरा ने कहा-संभावित खतरे की जानकारी मौसम विभाग कलेक्टरों को देता है और कलेक्टर हमें। इस मामले में कोई जानकारी ही फॉरवर्ड नहीं हुई। उधर, भरतपुर कलेक्टर डॉ. एनके गुप्ता ने भी माना-उन्हें मौसम विभाग से खतरे का कोई अलर्ट नहीं मिला। दरअसल, यही वजह रही...आपदा राहत की कोई तैयारी ही नहीं हो पाई।

12 राज्यों में आंधी-तूफान-बारिश, 130 से ज्यादा मौतें, 300 से ज्यादा घायल

राज्य में 40 मौतें ; मौसम विभाग को 10 घंटे पहले से पता था, पर खतरे का अलर्ट किसी को भी नहीं भेजा

मौसम विभाग की बला से कोई मरे या जीए...वह हर चेतावनी सिर्फ साइट पर डालता रहा...

नियमों के अनुसार कलेक्टरों, आपदा प्रबंधन को जानकारी देना मौसम विभाग का जिम्मा है

पहली चेतावनी

मौसम विभाग ने बुधवार सुबह 10 बजे वेबसाइट पर जिलेवार चेतावनी डाली, जिनमें उत्तर व पूर्वी जिलों में मेघगर्जन व अंधड़ की चेतावनी दी।

दूसरी चेतावनी

हर तीन घंटे में चेतावनी अपडेट की गई, जिसमें 3 बजे कुछ पूर्वानुमान नहीं था, लेकिन बुधवार शाम 6 बजे चेतावनी डाली गई। इसके दो घंटे बाद ही प्रदेश में जानलेवा बवंडर आ गया। तीन जिलों में जमकर तबाही मचाई।

इतनी मौतों के बावजूद लगातार दूसरे दिन किसी को खतरे की सूचना नहीं भेजी...सिर्फ अपनी उस साइट पर खतरे का अलर्ट डाला...जिस साइट पर कोई जाता तक नहीं है

तूफान में टीन-टप्पर सूखे पत्तों की तरह उड़ गए। बवंडर के दौरान अलवर के बहरोड़ में ट्रक के नीचे दबने से एक की मौत।

कहां, कितनी मौतें

प्रदेश में बुधवार शाम आए तेज तूफान से मरने वालों की संख्या 22 से बढ़कर 40 हो गई है।

सबसे ज्यादा 19 मौतें भरतपुर में

10 मौतें अलवर में

10 धौलपुर में

01 झुंझुनूं में

206 लोग घायल हुए हैं। 100 से ज्यादा पशुओं की मौत की सूचना है। आंधी-तूफान से बिजली तंत्र को 40 से 50 करोड़ रुपए का नुकसान। 1500 फीडरों में भारी क्षति पहुंची।

चार्ट नहीं बना सके...इसलिए कलेक्टरों को सूचना नहीं भेज सके : मौसम विभाग


मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री राजे ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रु की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। प्रभावित जिलों में मंत्री भेजे गए हैं। शुक्रवार को सीएम भी दौरा करेंगी।

अगले 4 दिन तक खतरा

अगले 24 घंटे में अलवर, भरतपुर, दौसा, जयपुर, सवाई माधोपुर में मेघगर्जन-आंधी।

48 घंटे में... झुंझुनंू, करौली, टोंक, हनुमानगढ़, नागौर, गंगानगर में आंधी-बारिश।

अगले 4 दिन में... बीकानेर, जैसलमेर, जालौर, चूरू, भीलवाड़ा, बूंदी, बाड़मेर व जोधपुर में तेज अंधड़ आने की चेतावनी।

उत्तर प्रदेश में 73 मौतें सिर्फ आगरा में ही 43 मौतें

मौसम के इस पलटे मिजाज का 12 राज्यों पर असर पड़ा। यूपी, राजस्थान, मप्र, झारखंड, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली में धूल भरी आंधी आई। तो तेलंगना, बंगाल और आंध्र प्रदेश में आंधी के साथ बारिश हुई। इसमें 130 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। 300 से ज्यादा घायल हैं। हजारों मकान- फसलों को भारी नुकसान हुआ है।

सूचनाओं को दबाने से नहीं, ज्यादा से ज्यादा शेयर करने पर टलते हैं खतरे, अमेरिका और ब्रिटेन इसलिए मिसाल

अमेरिका : नेशनल वेदर सर्विस चेतावनियां सार्वजनिक स्थलों (एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशन आदि) पर रेडियो, टीवी के जरिए जारी करती है। बाढ़, लोकल स्टॉर्म, ट्रॉपिकल साइक्लोन और विंटर स्टॉर्म जैसे मौसमी हालातों को उनके संभावित खतरे के आधार चेतावनियां जारी की जाती हैं।

ब्रिटेन : मौसम विभाग फ्लैश वार्निंग और एडवांस वार्निंग देता है। तीन रंग के कोड वाले वार्निंग लेवल होते हैं, जिनको सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जाता है। आपदा की तीव्रता की चेतावनी के तौर पर ट्रैफिक सिग्नल की तरह अलग-अलग रंग की लाइट्स जलती हैं।

X
मौसम का नहीं, यह लापरवाही का जानलेवा बवंडर
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..