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जूनाखेड़ा नाडोल में खुदाई कार्य बंद, 118 दिनों में 300 से अधिक मिले अवशेष

नाडोल कस्बे के प्राचीन जूनाखेड़ा स्थल की पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा 118 दिनों की खुदाई के बाद 30 अप्रैल से...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 04, 2018, 06:15 AM IST

जूनाखेड़ा नाडोल में खुदाई कार्य बंद, 118 दिनों में 300 से अधिक मिले अवशेष
नाडोल कस्बे के प्राचीन जूनाखेड़ा स्थल की पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा 118 दिनों की खुदाई के बाद 30 अप्रैल से खुदाई कार्य विभाग द्वारा बंद कर दिया। यह छह से सात माह बाद दुबारा शुरू किया जाएगा। अब तक हुई खुदाई में खोज उत्खनन कार्य में 300 से अधिक विभिन्न प्रकार के अवशेष मिले हैं।

इस बार की खुदाई में यह जानकारी पुराविदों को मिल गई की यह सभ्यता एक हजार नहीं पंद्रह सौ वर्ष पुरानी थी। उल्लेखनीय है कि नाडोल कस्बे की भारमल नदी के किनारे स्थित जूनाखेड़ा प्राचीन स्थल 9वीं व 10वीं शताब्दी ई.में चौहान वंशीय शासकों की राजस्थानी था। जिनका साम्राज्य बाड़मेर,जालोर तक फैला हुआ था। यह प्राचीन स्थल 1990 में चर्चा में आया था। उस समय कुछ अवशेष स्थान पर मिलने के बाद पुरातत्व व संग्रहालय विभाग ने इस पर कब्जा कर इसकी खुदाई कार्य शुरू किया गया। इस दौरान खुदाई में अनेक अवशेष मिले थे। जिनमें मृदंड टेराकोटा एवं प्राचीन पाषाण प्रतिमाएं, ताम्रपत्र , सिक्के एवं मंदिर के अवशेष प्राप्त हुए थे।

देसूरी. नाडोल जूनाखेड़ा प्राचीन स्थल, जहां पर खुदाई कार्य बंद हो गया है।

चंद्रावती से अधिक जूनाखेड़ा नाडोल में मिले अवशेष

जोधपुर वृत में दो संरक्षित स्थल है। जिसमें चंद्रावती सिरोही और जूनाखेड़ा नाडोल पाली है। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा चंद्रावती में तीन वर्षों तक खुदाई का कार्य किया। जिसमें 250 के करीब अवशेष मिले, जबकि खुदाई जूनाखेड़ा नाडोल की 118 दिनों की खुदाई में 300 अधिक अवशेष मिले हैं।

जूनाखेड़ा में 30 अप्रैल के बाद खुदाई कार्य बंद, अब छह-सात माह बाद दुबारा शुरू होगा

20 वर्ष बाद शुरू हुआ था खुदाई कार्य

वहीं 20 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद 7 फरवरी, 2017 को इस प्राचीन जूनाखेड़ा स्थल की खुदाई करने को लेकर पुरातत्व और संग्रहालय विभाग की टीम पहुंची और खोज उत्खनन का कार्य शुरू किया। खुदाई कार्य में कई अवशेष मिले। खोज उत्खनन करने के लिए जूनाखेड़ा नाडोल में 75 दिनों तक पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा खुदाई कार्य किया गया था। जिसमें 250 से अधिक अवशेष मिले थे। उसके बाद 30 अप्रैल 2017 को जूनाखेड़ा में खुदाई कार्य अधिकारियों ने बंद कर दिया। करीब आठ माह के बाद पुरातत्व व संग्रहालय विभाग द्वारा 3 जनवरी, 2018 को दुबारा खुदाई कार्य पुराविदों द्वारा शुरू किया गया। जो 118 दिनों तक चला, जिसमें 300 से अधिक विभिन्न प्रकार के अवशेष इस बार भी खुदाई में मिले।

2019 में फिर से होगा खुदाई कार्य खुदाई कार्य अब विभाग की स्वीकृति के बाद 2019 में शुरू होगा। तब तक खुदाई में मिले अवशेषों में पुराविदों द्वारा अध्ययन कर प्रगति रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को प्रस्तुत की जाएगी। वहीं खुदाई कार्य में वरिष्ठ प्रारूपकार रजनीकांत वर्मा,कनिष्ठ प्रारूपकार सुनील सांखला, पॉटरी सहायक जगदीशचंद चंदुल, रतनसिंह बेड़ा, किस्तूरचंद, मानाराम सीरवी, सकाराम चौधरी जुटे रहे।

जूनाखेड़ा प्राचीन स्थान से नाडोल की मिली नई पहचान

नाडोल ऐतिहासिक कस्बा है। जिसमें कई ऐतिहासिक धरोहर आज भी मौजूद है। मगर जूनाखेड़ा प्राचीन स्थल का खुदाई कार्य शुरू होने के बाद इस स्थान से नाडोल की पहचान बन रही है। इसलिए इस स्थान पर संग्रहालय का निर्माण जरूरी हो गया है। -यशोदा वैष्णव, सरपंच, नाडोल

जूनाखेड़ा नाडोल में 118 दिनों तक किया गया खुदाई कार्य

नाडोल के जूनाखेड़ा प्राचीन स्थल पर पुरातत्व व संग्रहालय विभाग द्वारा खोज उत्खनन कार्य शुरू किया गया था। जो 118 दिनों तक जारी रहा। इस दौरान 300 से अधिक अवशेष मिले हैं। -विनित गोधल, खोज उत्खनन अधिकारी

4 कंकालों का अवशेष एवं पूर्ण कंकाल मिला जूनाखेड़ा नाडोल की खुदाई में अब तक खोज उत्खनन टीम को चार कंकाल के अवशेष तो अलग-अलग मिले। वहीं एक पूर्ण कंकाल मिला है। इतना ही नहीं एक कंकाल खुदाई के दौरान मिट्टी की दीवार में मौजूद है। मगर उसकाे अभी तक नहीं निकाला गया है।

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Web Title: जूनाखेड़ा नाडोल में खुदाई कार्य बंद, 118 दिनों में 300 से अधिक मिले अवशेष
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