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कूलर में पानी भरने की समस्या से जूझ रहा है युवा

गर्मियों का समय आ गया है। ये वो समय है जब क्रैश कोर्स कराने वाले सेंटर, कोल्ड ड्रिंक की कैन्स, मच्छर, काले चश्मे और...

Danik Bhaskar | Apr 28, 2018, 06:20 AM IST
गर्मियों का समय आ गया है। ये वो समय है जब क्रैश कोर्स कराने वाले सेंटर, कोल्ड ड्रिंक की कैन्स, मच्छर, काले चश्मे और विदेशी क्रिकेटर देश में अचानक से बढ़ जाते हैं। जंगल से ज्यादा लकड़ियां आइसक्रीम के ठेलों पर डंडी और चम्मच के रूप में मिलने लगती हैं। अपना भविष्य बर्बाद कर चुके लोग परिचितों के घर बैठते हैं और राय दे-देकर टीनएजर्स के भविष्य के साथ खेलते हैं। खलिहर से खलिहर आदमी व्यस्त हो जाता है क्योंकि हर शाम उसे तीन जगह शादियों में जाना होता है।

लेकिन एक कौम अब भी है जो गर्मी से परेशान होती है। ये ये हर घर में पाए जाने वाले लड़के होते हैं। मन मान लिया जाता है कि अगर ये लड़के हैं तो बलिष्ठ भी होंगे और कूलर में पानी भर ही सकते हैं। इसलिए ये सुनिश्चित किया जाता है कि इनसे बाल्टियों में भरवा-भरवाकर कूलर में पानी डलवाया जाए। कई जगह ऐसी प्रथा भी है कि अगर कूलर तक पाइप पहुंच सकती है तो कूलर को जान-बूझकर ऐसी जगह पर रख दिया जाता है, जहां बाल्टी लेकर ही पहुंचा जा सके। कहा जाता है कि एक बार एक लड़के ने जुगाड़ से कूलर तक पाइप पहुंचा दी थी, इस अनहोनी घटना के बाद उसके घरवालों ने कूलर को बाहरी खिड़की पर ऐसी जगह पर फिट करा दिया, जहां पहुंचने मात्र के लिए घर का आधा चक्कर लगाना पड़ता था।

इस बात का विशेष ध्यान दिया जाता है कि कूलर के आसपास ढेर से मच्छर हों। आठ साल की उम्र से कूलर में पानी भर रहे कूलेंद्र बताते हैं कि उनके घर वाले तो कूलर के पानी में ही मच्छर पाल लेते हैं ताकि कूलर खोलते ही वो उन्हें काट सकें। मच्छरों के काटने पर लड़कों के हाथ से अक्सर पानी छलक जाया करता है। ऐसे मौकों पर "एक काम ढंग से नहीं कर सकता नालायक' कहने के लिए विशेष तौर पर बड़ी बहन या मां वहीं कहीं खड़ी रहती हैं। प्रताड़ना का दौर यहीं ख़त्म नहीं होता, इस प्लास्टिक युग में लड़कों से जान-बूझकर स्टील या लोहे की बाल्टी में पानी भरवाया जाता है। जिन बाल्टियों का वजन, उनमें आने वाले कुल पानी के वजन से भी दुगुना होता है। नाम न बताने की शर्त पर एक युवक ने हमें ये बताया कि कई बार घर वाले और क्रूर हो जाते हैं- बजाय कूलर में सीधे पानी उड़ेलवाने के वो मग्गे से एक-एक मग्गा पानी जाली पर बने सुराख से डालने को कहते हैं। बदले में घरवालों की ये दलील होती है कि बार-बार साइड से खोलने से कूलर में लगी जाली झड़ने लगती है। ऐसी परिस्थिति में उन्हें कूलर के पास देर तक झुककर खड़े रहना पड़ता है और कमरदर्द के अलावा देर तक मच्छर उन्हें काट पाते हैं।

कुछ लड़कों का अनुभव और भी बुरा है, वो बताते हैं कि मुश्किल तब होती है जब एक तरफ आप कूलर भर रहे हों और दूसरी तरफ बाथरूम में भरने को दूसरी बाल्टी लगा आए हों। समय के साथ न चल पाने पर अगर एक चुल्लू पानी भी बाल्टी से बह जाए तो वैश्विक जल संकट पर आधे घंटे का भाषण सुनने को अलग मिल जाता है। हमारी आत्मा तो ये जानकर कांप गई कि इतना सब करने के बाद भी अगर कभी कूलर जल गया तो लड़कों को ये सुनने को मिलता है कि तुमने ही मोटर पर पानी उड़ेल दिया होगा। अभी इस मुद्दे पर किसी नेता का ध्यान नहीं गया, न मीडिया या मानवाधिकार संगठनों ने ही इस शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। युवावर्ग खुद इसके खिलाफ आगे नहीं आ पा रहा है क्योंकि जैसे ही वो कूलर में पानी भर कर ठंडी हवा में सांस लेना चाहता है, उसे फ्रिज की बोतलें भरने में लगा दिया जाता है।



अफवाह








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अमित तिवारी

कटाक्ष




-ये अकेले देवता हैं जो बॉडीगार्ड ले कर चलते हैं।


-कॉमेडी पर कॉन्फिडेंस के मामले में राजू श्रीवास्तव अब दूसरे नम्बर पर हैं।


-मोदी-आडवाणी ने नहीं सुना होगा ये वरना इनके तो कान के बाल तक नोंच लिए जाते।


-ऐसा हुआ तो न्यूज़ चैनल्स पर 23 घंटे एलियन्स और चिप्स खाने वाली चिड़िया ही दिखेगी।



प्रतीक गौतम

अब तक खिलाड़ी था, अब पूरा खेल हूं बाईचुंग भूटिया ने बनाई पार्टी

क्या तुम्हें यकीन है ? -मोदी जी का चीन दौरा

गंभीर के भरोसे मत बैठिए हो सकता है वो आपको श्रेयस के भरोसे छोड़ दे -गंभीर का दिल्ली की कप्तानी से इस्तीफ़ा

व्यंग्य

रोचक | केट मिडलटन, ब्रिटिश राजघराने की पुत्रवधु

राजकुमारों की मां, अपने आगे राजकुमारी नहीं लिख सकती

2011 में प्रिंस विलियम से शादी करने के बाद ही एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की केट शाही खानदान की पुत्रवधु बन गई। हाल ही में उन्होंने खानदान के तीसरे वारिस को जन्म दिया है, लेकिन वे खुद के आगे राजकुमारी नहीं लिख सकती। उन्हें इतना ही अधिकार है कि वे प्रिंसेस विलियम ऑफ वेल्स कहलाए। वे प्रिंसेस केट नहीं लिख सकती। जब तक महारानी या महाराज उन्हें इसका अधिकार नहीं देते हैं, तब तक वे इस उपाधि का अपने नाम के आगे प्रयोग नहीं कर सकती हैं।

ब्रिटिश एयरवेज में फ्लाइट डिस्पेचर पिता और फ्लाइट अटेंडेंट मां के घर पैदा हुई सबसे बड़ी बेटी कैथरीन का शिक्षण बर्कशायर में हुआ। भले ही वे ब्रिटिश मूल की हैं, लेकिन वे अमेरिका के संस्थापक रहे जॉर्ज वॉशिंगटन की वंशज हैं। उनके साथ पढ़ने वाले लोग उन्हें ‘स्क्वीक’ के नाम से संबोधित करते थे। 2001 में वे पढ़ाई के दौरान ही स्कॉटलैंड में प्रिंस विलियम के संपर्क में आई। दोनों में प्रेम हुआ। 2010 में दोनों ने शादी कर ली। ब्रिटेन के इतिहास में शाही परिवार में ब्याही जाने वाली वे सबसे अधिक उम्र की युवती हैं। शादी के वक्त इनकी आयु 29 थी।

जन्म- 28 फरवरी 1924

शिक्षा- पेशावर से बीए, बीएससी लाहौर से, कनाडा से बीएससी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में, एमआईटी से एमएस इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में।

परिवार- प|ी स्वर्ण (गृहिणी), बेटा संजीव- सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ

क्यों चर्चा में- 100 अरब डॉलर की टीसीएस के पहले सीईओ थे।

जन्म- 9 जनवरी 1982

पिता-माइकल, मां केरोल

शिक्षा- स्कॉटलैंड यूनि. से एमए

परिवार- पति प्रिंस विलियम, दो बेटे, एक बेटी।

क्यों चर्चा में है- तीसरी बार मां बनी।

प्रेरक | फकीरचंद कोहली, सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ



ये हैं फादर ऑफ सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री

बात 1960 के दशक की है। जिस समय लोग टीवी को नहीं जानते थे और प्रधानमंत्री कार्यालय तक में कंप्यूटर नहीं थे, तब कोहली मुंबई में बिजली की आपूर्ति करने वाली टाटा इलेक्ट्रिक कंपनीज़ की पावर ग्रिड के कंप्यूटराइजेशन करने की तैयारी में थे।

25 वर्ष की आयु में कनाडा की जनरल इलेक्ट्रिक में काम करने के बाद वे 1951 में भारत आ गए और टाटा इलेक्ट्रिकल में काम करने लगे। उसी दौरान उन्हें आईआईटी कानपुर में चयन समिति में भी रखा गया। इनके प्रयासों से ही आईआईटी कानपुर में देश में कंप्यूटर साइंस में पहला एमटैक प्रोग्राम शुरू हो सका।

एशिया के तीसरे सबसे पुराने तकनीकी संस्थान पुणे के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को फिर से पटरी पर लाने का काम भी इन्होंने ही किया।

सेहत के लिए हर दिन 5 किमी. चलने वाले कोहली पहले भारतीय हैं, जिन्हें अमेरिका के इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में 1973 में डायरेक्टर मनोनीत किया था। तब तक नारायण मूर्ति और अजीम प्रेमजी भी आज की तरह प्रसिद्ध नाम नहीं थे।

1975 में कंप्यूटर सोसायटी ऑफ इंडिया के एक कार्यक्रम में फकीरचंद ने कहा था कि भारत में पहली औद्योगिक क्रांति इतनी सफल नहीं रही, लेकिन दूसरी आईटी क्रांति होने को है। उनकी इस भविष्यवाणी के बाद 90 के दशक में देश में सॉफ्टवेयर क्रांति हुई। जिस समय सॉफ्टवेयर क्रांति हुई तब 1999 में 40 वर्ष की सेवाएं देने के बाद कोहली टाटा समूह से रिटायर हो रहे थे। फिर भी वे टाटा के सलाहकार बने रहे।

देश के लिए योगदान वर्ष 2000 की बात है। कोहली ने एक खबर पढ़ी, जिसमें पता लगा कि 15 करोड़ से अधिक वयस्क, जो देश के 5 लाख गांवों में बसते हैं, वे पढ़ नहीं सकते। तब उन्होंने इसके लिए एक सॉफ्टवेयर बनाया, जो बारहखड़ी और अल्फाबेट को चित्रों में समझा सकता था। सबसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे तेलंगाना के बीरमगुडा गांव में लागू किया। 10 हफ्ते में गांव के वयस्क समझ चुके थे कि अखबार किस तरह से पढ़ा जा सकता है। इसके लिए उन्होंने सेकंड हैंड कंप्यूटर का इस्तेमाल किया। 2002 में कोहली को पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। इन्हें ‘फादर ऑफ आईटी इंडस्ट्री’ कहा जाता है। इनका बेटा संजीव कोहली भी सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ हैं।

विवादास्पद | हसन अली, क्रिकेटर

स्कूल में एक लड़की के पीछे जाते थे तो बाल मुंडवा दिए थे

पाकिस्तान के तेज गदि के गेंदबाज हसन अली को संयोग से जीवन में सब अच्छा मिला है। उद्दंडता और अभद्रता हसन में बचपन से है। मां के मुताबिक हसन बेहद जिद्दी स्वभाव का है। बचपन से क्रिकेट खेलने का शौक था तो परिवार ने पूरा सहयोग किया। 10 साल की आयु से ही उसे खेलने दिया गया। बड़े भाई अता उर रहमान ने तो इसका पूरा खर्च उठाया।

इसी भाई ने हसन के लिए एक पिच बनाया, उसी के पास एक कमरा बनाया, जिसमें हसन रहता था और एक जिम भी था। आत्मविश्वास कब अहंकार में बदल गया, पता ही नहीं चला, क्योंकि इस तरह की सुविधाएं पाकिस्तान में बहुत कम लोगों के पास है। भाई को हसन पर निगाह रखना होता था। स्कूल के दौर की बात है, हसन एक लड़की के लिए बेसब्री से इंतजार करता था। बालों का स्टाइल भी आधुनिक बना रखा था। ये बात बड़े भाई को ठीक नहीं लगी, उन्होंने कुछ दिनों तक हसन की हरकतों पर निगाह रखने के लिए अपने दोस्तों को बोला और फिर भी हसन बाज नहीं आए, तो उनका सिर मुंडवा दिया, ताकि वह सिर्फ खेल पर ध्यान दे सके।

जन्म- 7 फरवरी 1994

पिता- अब्दुल अजीज माली, भाई, अता उर रहमान

शिक्षा- कॉलेज ड्रॉपआउट

क्यों चर्चा में- इस शख्स ने वाघा बॉर्डर पर अभद्र की हरकतें की।