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बड़े मुद्‌दे हों तो अच्छे विचारों की नकल में कोई हर्ज नहीं

हम सब जानते हैं कि देश के हर राज्य ने इतने वर्षों में विभिन्न कदम उठाकर लड़के और लड़कियों को स्कूल उपलब्ध कराने में...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 26, 2018, 06:20 AM IST

बड़े मुद्‌दे हों तो अच्छे विचारों की नकल में कोई हर्ज नहीं
हम सब जानते हैं कि देश के हर राज्य ने इतने वर्षों में विभिन्न कदम उठाकर लड़के और लड़कियों को स्कूल उपलब्ध कराने में अच्छी-खासी तरक्की की है। लेकिन, वे क्लासरूम में पहुंचकर भी कितना सीख पाते हैं? हम उन्हें चौथे औद्योगिक युग के लिए कैसे तैयार करें? ये ऐसे मौलिक प्रश्न हैं, जो न सिर्फ पैरेंट्स और ग्रैड पेरेंट्स को परेशान करते हैं बल्कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी इनसे विचलित हैं। इस हफ्ते अपने परिवार के साथ हिमाचल प्रदेश के चाराब्रा में छु्टि्टयां व्यतीत करते हुए लिखे लेख में उन्होंने लिखा कि भारतीय के रूप में हमने करुणा और परस्पर गरिमा का सबक सीखा ताकि भावी पीढ़ी के लिए बेहदर भविष्य निर्मित किया जा सके। उन्होंने पूछा है, ‘जैसे स्कूल दूर-दूर तक फैल गए हैं, उसी तरह क्या स्वास्थ्य रक्षा भी बुनियादी सुविधा नहीं है, जो हम अपने सभी लोगों को उपलब्ध कराएं।’ उन्होंने कहा कि यह पड़ताल करने योग्य मुद्‌दे हैं और हमें उन्हें हर भारतीय के लिए उनका समाधान खोजना चाहिए।

जब राष्ट्रपति अपने विचारों को कागज पर उतार रहे होंगे तब इस बुधवार और गुरुवार को एक खबर ‘करजत आइडिया’ के नाम से वायरल हो गई। जो लोग नहीं जानते कि करजत कहां है तो उन्हें बता दें कि यह मुंबई व पुणे से दो घंटे की ड्राइव पर है। प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध यह जगह महाराष्ट्र के एकमात्र हिल स्टेशन माथेरान के समीप है, जहां किसी वाहन को नहीं जाने दिया जाता। लेकिन, इसकी 2.20 लाख की आबादी किसी भी बढ़ते शहर जैसी है और वहां स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का हमेशा अभाव बना रहता है। रोगियों को मुंबई भेजने तक बहुत देर हो जाती है और उनकी मौत हो जाती है।

बुधवार को 1823 से निकाली जा रही दुनिया की सबसे पुरानी और जानी-मनी मेडिकल पत्रिका ‘द लान्सेट’ ने भारत को स्वास्थ्य रक्षा सुविधा और गुणवत्ता के मामले में 195 देशों में 145वें स्थान पर रखा है। भारत में डॉक्टर-रोगी का अनुपात प्रति 1000 आबादी पर 0.62 डॉक्टर का है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इतनी आबादी के लिए 1 डॉक्टर की सिफारिश से कम है। ‘करजत आइडिया’ इसलिए वायरल हुआ, क्योंकि यह कॉपी करने योग्य आइडिया है। रायगढ़ के कलेक्टर विजय सूर्यवंशी, जिनके अधिकार क्षेत्र में करजत व माथेरान हिल स्टेशन है, मुंबई और पुणे से डॉक्टरों को समूह में आकर करजत के उप-जिला अस्पतालों में शनिवार-रविवार को कैम्प लगाने के लिए आकर्षित कर रहे हैं। बदले में इन ‘वीकेंड डॉक्टरों’ को वहां के होटलों में मुफ्त ठहरने की सुविधा मिलेगी।

उन्होंने इसे छोटे पैमाने पर माथेरान में आजमाया और उन्हें सफलता मिली। माथेरान और करजत के होटल एसोसिएशन डॉक्टरों को वीकेंड पर ठहरने के लिए मुफ्त में रूम्स देने को खुशी से राजी है, इस तथ्य के बावजूद कि आमतौर पर वीकेंड पर रूम्स फुल रहते हैं खासतौर पर तब जब इन प्राकृतिक स्थलों पर बारिश होने लगती है। उसी वक्त बीमारियां भी फैलने लगती हैं। इस आडिया की अन्य जगहों पर नकल करने में कुछ भी गलत नहीं है, यदि इसके कारण सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर क्षेत्र के रोगियों तक पहुंचते हों। इसी तरह पालिका स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए बेस्ट ट्रेनर्स आमंत्रित किए जा सकते हैं, क्योंकि इन शिक्षकों को शायद ही कभी अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता का प्रशिक्षण मिल पाता है। इसका सीधा परिणाम युवा छात्रों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के रूप में होगा।

फंडा यह है कि  जब राष्ट्रीय मुद्दे हों तो बेस्ट आइडिया की नकल करने में हर्ज नहीं। फिर वे राष्ट्रीय, क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय ही क्यों न हो।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें FUNDA और SMS भेजें 9200001164 पर

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

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