Hindi News »Rajasthan »Rani» डिजिटल पेमेंट पर कंज्यूमर को इन्सेंटिव का फैसला टला, समिति करेगी विचार

डिजिटल पेमेंट पर कंज्यूमर को इन्सेंटिव का फैसला टला, समिति करेगी विचार

जीएसटी काउंसिल ने शुक्रवार को हर डिजिटल ट्रांजैक्शन पर कंज्यूमर को 100 रुपए तक इन्सेंटिव देने के प्रस्ताव पर विचार...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 05, 2018, 06:25 AM IST

डिजिटल पेमेंट पर कंज्यूमर को इन्सेंटिव का फैसला टला, समिति करेगी विचार
जीएसटी काउंसिल ने शुक्रवार को हर डिजिटल ट्रांजैक्शन पर कंज्यूमर को 100 रुपए तक इन्सेंटिव देने के प्रस्ताव पर विचार किया। हालांकि इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका। शुगर सेस लगाने पर भी कोई फैसला नहीं हुआ। इन पर विचार के लिए दो समितियां बनाई जाएंगी। काउंसिल के अध्यक्ष वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि दो दिन में समितियों का गठन हो जाएगा। शुगर सेस की समिति दो हफ्ते में रिपोर्ट देगी। डिजिटल ट्रांजैक्शन की समिति को अगली बैठक तक सिफारिशें देनी होंगी। काउंसिल की यह 27वीं बैठक थी।

जेटली के अनुसार डिजिटल ट्रांजैक्शन करने वालों को जीएसटी रेट में 2% छूट का प्रस्ताव है। सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी, दोनों में 1-1% छूट मिलेगी। यह उन प्रोडक्ट पर लागू होगा जिन पर टैक्स 3% या ज्यादा है। चेक से पेमेंट करने वाले कंज्यूमर को भी छूट मिलेगी। हालांकि प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम 100 रुपए छूट का ही प्रावधान है। जेटली ने बताया कि कुछ राज्य इसमें निगेटिव लिस्ट यानी ऐसे प्रोडक्ट की लिस्ट चाहते हैं, जिन पर छूट नहीं मिलेगी। इस पर विचार के लिए 5 सदस्यों वाली समिति बनाने का फैसला हुआ।

बैठक में चीनी पर 5% जीएसटी के अलावा शुगर सेस लगाने और एथनॉल पर 18% रेट को घटाने का भी प्रस्ताव रखा गया। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने बताया कि ज्यादातर राज्य अलग सेस के खिलाफ हैं, क्योंकि इससे सिर्फ गन्ना उत्पादन करने वाले 5 राज्यों को फायदा होगा। अगर इसे मंजूरी मिली तो दूसरे राज्य भी अपनी जरूरत के हिसाब से सेस लगाने की मांग करेंगे।

चीनी की उत्पादन लागत अभी 35 रुपए जबकि एक्स-मिल कीमत 26-28 रुपए किलो है। इसलिए मिलों पर गन्ना किसानों का 20,000 करोड़ रुपए बकाया हो गया है। बुधवार को कैबिनेट ने गन्ना किसानों को 5.5 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 1,540 करोड़ रुपए सब्सिडी देने का फैसला किया था। शुगर सेस से इसकी भरपाई होगी। राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने बताया कि अगर काउंसिल ने सेस लगाने का फैसला किया तो इसके लिए अध्यादेश लाया जाएगा।

ये प्रस्ताव मंजूर

6 महीने में लागू होगा सिंगल रिटर्न फॉर्म

टर्नओवर के हिसाब से रिटर्न फाइलिंग की तारीख अलग

हर महीने 3 की जगह एक रिटर्न को मंजूरी मिल गई। पर इसे लागू होने में 6 महीने लगेंगे। तब तक जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-3बी की व्यवस्था जारी रहेगी। नेटवर्क पर लोड कम रहे, इसलिए टर्नओवर के हिसाब से फाइलिंग की तारीख अलग होगी। कंपोजीशन और निल ट्रांजैक्शन वाले तिमाही रिटर्न जमा कर सकेंगे।

सप्लायर के इनवॉयस से ही टैक्स क्रेडिट क्लेम कर सकेंगे

बी2बी ट्रांजैक्शन में विक्रेता या सप्लायर को इनवॉयस अपलोड करना पड़ेगा। इसी के आधार पर खरीदार इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम कर सकता है।

खरीदार ऑनलाइन देख सकेगा कि सप्लायर ने कितने इनवॉयस अपलोड किए हैं।

सप्लायर के इनवॉयस के आधार पर सिस्टम बता देगा कि उसे कितना टैक्स देना है। इसमें कम से कम चार अंकों का एचएसएन कोड लिखना होगा।

जीएसटी नेटवर्क 100% सरकारी कंपनी बनेगी

अभी जीएसटी नेटवर्क में केंद्र की 24.5% हिस्सेदारी है। राज्यों की हिस्सेदारी भी इतनी ही है। बाकी 51% निजी कंपनियों के पास है। सरकार कंपनियों की इक्विटी खरीदेगी। इसके बाद केंद्र और राज्य दोनों की 50-50% हिस्सेदारी रहेगी। राज्यों की होल्डिंग जीएसटी कलेक्शन के अनुपात में होगी। इसके मौजूदा कर्मचारी पुरानी शर्तों पर 5 साल तक काम कर सकते हैं।

शुक्रवार को जीएसटी काउंसिल की 27वीं बैठक की अध्यक्षता करते वित्त मंत्री अरुण जेटली।

इनपुट टैक्स क्रेडिट का ऑटोमेटिक रिवर्सल नहीं

सप्लायर ने टैक्स नहीं जमा किया तो खरीदार से टैक्स क्रेडिट का ऑटोमेटिक रिवर्सल नहीं होगा। पहले विक्रेता से रिकवरी की कोशिश होगी।

अगर टैक्स अधिकारी उसे ढूंढ़ने में विफल रहते हैं या उसने बिजनेस बंद कर दिया है तभी खरीदार से टैक्स जमा करने को कहा जाएगा।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Rani News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: डिजिटल पेमेंट पर कंज्यूमर को इन्सेंटिव का फैसला टला, समिति करेगी विचार
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Rani

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×