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पुरानी गलती से नहीं सीखा सबक, सत्र शुरू लेकिन नहीं छपीं किताबें

राजस्थान बोर्ड से जुड़े स्कूलों के 9वीं से बारहवीं कक्षाओं की इंग्लिश मीडियम की किताबों की अब तक छपाई ही शुरू नहीं...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 22, 2018, 06:25 AM IST

राजस्थान बोर्ड से जुड़े स्कूलों के 9वीं से बारहवीं कक्षाओं की इंग्लिश मीडियम की किताबों की अब तक छपाई ही शुरू नहीं हो पाई है। यूं तो नया सत्र बिना किताबों के अप्रैल में शुरू हो चुका है, लेकिन आशंका यही है कि जुलाई में जब ग्रीष्मावकाश के बाद शुरू होंगे तब तीन लाख विद्यार्थिर्यों को बिना किताब ही पढ़ाई करनी पड़ सकती है। हैरानी की बात यह है कि पिछले शिक्षा सत्र की अधूरी तैयारियों पर मचे बवाल के बावजूद इस बार भी इंग्लिश मीडियम की किताबों को लेकर सबक नहीं लिया गया। उधर, बच्चों को उपलब्ध करवाई जाने वाली हिंदी मीडियम की निशुल्क किताबों का प्रदेशभर के डिपो में पहुंचने का दौर जारी है। करीब 60-70 फीसदी किताबें प्रदेशभर के डिपो में पहुंच गई हैं। बड़ी परेशानी पिछली बार की तरह इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई कर रहे बच्चों के सामने आने वाली है। 9वीं और बारहवीं के बदले पाठ्यक्रम से कई किताबें पिछले सत्र में छप ही नहीं पाई और ज्यादातर बच्चों ने तो पुराने पाठ्यक्रम की तैयारियों के आधार पर ही परीक्षा दी।





राज्य पाठ्य-पुस्तक मंडल का कहना है कि इंग्लिश मीडियम की किताबों की स्थिति हिंदी जैसी तो नहीं है, लेकिन समय पर उपलब्ध हो जाएंगी। हालांकि, इनकी अब तक छपाई नहीं हो पाई है।

पाठ्य-पुस्तक मंडल को 3.9 करोड़ किताबों का ऑर्डर

शिक्षा सत्र (2017-18) में राज्य पाठ्य-पुस्तक मंडल के जरिए 3.77 करोड़ किताबों का वितरण हुआ था। सरकारी स्कूलों में किताबों का निशुल्क वितरण राज्य पाठ्य-पुस्तक मंडल की ओर से प्रकाशित करवाई जा रही किताबों के माध्यम से होता है। इस बार शिक्षा निदेशालय से आई डिमांड के अनुसार पिछले सत्र की तुलना में कक्षा 1-8 और कक्षा 9-12 तक के दोनों वर्गों में पिछली बार की तुलना में कमी आई है। दोनों की सेक्शन में मिलाकर पाठ्य-पुस्तक मंडल को 3 करोड़ 9 लाख 15 हजार 865 किताबों का ऑर्डर मिला है।





शिक्षा विभाग के अफसरों के मुताबिक कक्षा पांच तक की शत फीसदी किताबों के नए ऑर्डर होते हैं जबकि शेष कक्षाओं के लिए 50 फीसदी की डिमांड को आधार माना जाता है।

इंग्लिश मीडियम किताबें भी प्रकाशन के लिए जा रही हैं, समय पर उपलब्ध कराने की पूरी कोशिश है। - नरेंद्र सिंह, मुख्य लेखाधिकारी, राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल

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Web Title: पुरानी गलती से नहीं सीखा सबक, सत्र शुरू लेकिन नहीं छपीं किताबें
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