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चमगादड़ से फैलने वाले निपाह वायरस से केरल में 11 लोगों की मौत, 6 गंभीर

Bhaskar News Network | Last Modified - May 22, 2018, 06:25 AM IST

एनआईवी वायरस की पहचान सबसे पहले मलेशिया के कामपुंग सुंगाई निपाह में हुई थी। तब वहां सूअरों से फैला था।

2001 में प. बंगाल के सिलिगुड़ी में भी इस वायरस का संक्रमण फैला था। तब सामने आए 66 केसों में से 45 की माैत हुई थी।

केरल सरकार के 2 मंत्रियों का कोझिकोड में डेरा

एजेंसी | कोझिकोड (केरल)

केरल के कोझिकोड में निपाह वायरस (एनआईवी) से संक्रमित होकर 11 लोगों की मौत हो चुकी है। इस जानलेवा वायरस से पीड़ित छह लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है, जबकि 25 प्रभावित सघन निगरानी में रखे गए हैं। जानवरों से फैलने वाला यह वायरस कोझिकोड में चमगादड़ के जरिये फैला है। फ्रूट बैट कहा जाने वाला चमगादड़ मुख्यत: खजूर जैसे फल या फल के रस का सेवन करता है। निपाह से मौतों के बाद पूरा केरल हाई अलर्ट पर रखा गया है। पहली मौत 19 मई को हुई थी। राज्य के स्वास्थ्य व श्रम मंत्री ने कोझिकोड में डेरा डाले हैं। दो कंट्रोल रूम भी बने। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‌डा ने डॉक्टरों की हाई लेवल टीम भेजी है।

निपाह वायरस के बारे में वो सब, जो आप जानना चाहते हैं

संक्रमण से फैलता है निपाह

फ्रूट बैट या सूअर जैसे जानवर इसके वाहक हैं। संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने या इनके संपर्क में आई वस्तुओं के सेवन से निपाह वायरस का संक्रमण होता है। निपाह वायरस से संक्रमित इंसान भी संक्रमण को आगे बढ़ाता है।

लक्षण : 24 घंटे में कोमा में मरीज

सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार, जलन, सिरदर्द, चक्कर आना और बेहाेशी इस बीमारी के लक्षण हैं। डाक्टरों के अनुसार यह वायरस बहुत तेजी से असर करता है। मरीज को तुरंत इलाज न मिले तो 48 घंटे के अंदर वह कोमा में जा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इस वायरस का अभी तक वैक्सीन विकसित नहीं हुआ है। इलाज के नाम पर मरीजों को इंटेंसिव सपोर्टिव केयर ही दी जाती है।

सबसे पहले मलेशिया के निपाह प्रांत में मिला था यह वायरस, संक्रमित खजूर खाने से बांग्लादेश में फैल चुकी है यह बीमारी

एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत, उनके कुएं में मिला था फ्रूट बैट, कुआं सील, इलाज करने वाली नर्स की भी जान गई

निपाह वायरस के कारण कोझिकोड में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो चुकी है। वायरस की चपेट में आए परिवार के मुखिया का भी इलाज चल रहा है। उनके घर के कुएं में फ्रूट बैट मिला है।

स्वास्थ्य मंत्री केके शिलाजा ने कहा कि अब कुआं बंद कर दिया गया है। इन लाेगों का उपचार करने वाली लिनी नाम की नर्स की भी तेज बुखार के बाद मौत हो गई। इस बीमारी की वजह से अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है।

स्वास्थ्य सचिव राजीव सदानंदन ने अभी तीन मौतें ही निपाह से होने की पुष्टि की है।

2004 में फ्रूट बैट द्वारा संक्रमित किए गए खजूर खाने से बांग्लादेश में भी लोग इस बीमारी की चपेट में आ गए थे।

2007 में पश्चिम बंगाल के नदिया में भी निपाह के संक्रमण से पांच लोगों की मौत हो चुकी है।

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