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जनप्रतिनिधि को शिलान्यास, लोकार्पण व उद्घाटन में नहीं बुलाया तो अफसरों पर गाज

हैल्थ मिनिस्टर कालीचरण सराफ एवं भाजपा पार्षद अशोक गर्ग के विवाद ने राज्य सरकार को एक महीने पुरानी विधानसभा में...

Dainik Bhaskar

Apr 09, 2018, 06:35 AM IST
जनप्रतिनिधि को शिलान्यास, लोकार्पण व उद्घाटन में नहीं बुलाया तो अफसरों पर गाज
हैल्थ मिनिस्टर कालीचरण सराफ एवं भाजपा पार्षद अशोक गर्ग के विवाद ने राज्य सरकार को एक महीने पुरानी विधानसभा में उपाध्यक्ष की ओर से दी गई व्यवस्था की याद दिला दी। बस्सी विधायक अंजू धानका ने विधानसभा में सरकार पर कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को नहीं बुलाए जाने का मामला उठाया था। विपक्षी सदस्यों ने भी सरकार पर जमकर आरोप लगाए थे। विवाद को चलते ही उपाध्यक्ष राव राजेंद्र सिंह ने व्यवस्था दी थी कि सरकारी कार्यक्रमों में न केवल जनप्रतिनिधियों को बुलाया जाए बल्कि, कार्यक्रम का निर्धारण करते समय उनकी राय भी ली जाए। सरकार ने कहा है कि जो भी अफसर इन आदेशों की अवहेलना करेंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

विधानसभा में गत 6 मार्च को दी गई व्यवस्था की पालना के आदेश एक महीने बाद निकाले गए। मुख्य सचिव एनसी गोयल ने राजकीय भवनों के शिलान्यास, उद्घाटन एवं लोकार्पण कार्यक्रम जनप्रतिनिधियों से संपन्न करवाने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश सभी राजकीय विभागों, राजकीय उपक्रमों, बोर्ड, निगमों एवं स्वायत्तशासी संस्थाओं में पदस्थापित अधिकारियों को दिए गए हैं। कार्यक्रमों में सांसद, विधायक, जिला प्रमुख, प्रधान, नगर निकायों के मेयर, सभापति, अध्यक्ष, सरपंच एवं अन्य जन प्रतिनिधियों, विशेषकर स्थानीय जनप्रतिनिधि को आमंत्रित करना आवश्यक होगा।इन दिशा-निर्देशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध राजस्थान सिविल सेवाएं (आचरण) नियम 1971 के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए अनुशासनिक कार्यवाही की जा सकती है। उन्हें विधान सभा विशेषाधिकार हनन का दोषी भी माना जा सकता है।

सराफ-गर्ग विवाद ने सरकार को याद दिलाई विधानसभा उपाध्यक्ष की व्यवस्था

23 साल पहले से आदेश फिर भी शिकायतें

राज्य सरकार की ओर से किए गए विकास कार्यों के उद्घाटन एवं शिलान्यास कार्यक्रम जनप्रतिनिधियों द्वारा कराए जाने के निर्देश नंवबर 1995, अप्रैल 2007 व अक्टूबर 2015 को भी जारी किए गए थे। बावजूद कार्यक्रमों में नहीं बुलाए जाने के मामले लगातार जनप्रतिनिधियों के ओर से उठाए जाते रहे हैं।

विधानसभा सत्र के दौरान 6 मार्च को उठा था विवाद

विधायक धानका का कहना था कि बस्सी क्षेत्र में जितने भी लोकार्पण या शिलान्यास होते हैं वह भाजपा पार्षद से करवाए जाते हैं। उन्हें सूचना तक नहीं दी जाती। इसको लेकर विधानसभा में बड़ा विवाद हो गया था। गृह मंत्री व संसदीय कार्य मंत्री तक को जबाव देना पड़ा था। उपाध्यक्ष ने सरकारी कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को बुलाए जाने को लेकर सरकार को दिशा-निर्देश दिए थे।

मंत्री-पार्षद भिड़े तो अगले दिन निकाल दिए आदेश

तीन दिन पहले मालवीयनगर में एक कार्यक्रम के दौरान विवाद हो गया। हैल्थ मिनिस्टर इस कार्यक्रम में पहुंचे थे शिलापट्टिका पर पार्षद अशोक गर्ग का नाम नहीं था। इसे लेकर विवाद हो गया। मामला थाने तक पहुंच गया है। सीएस ने मसले में अधिकारियों को अब निर्देश जारी किए हैं।

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