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पीएनबी की ऑडिटिंग करने वाले दर्जन भर सीए से सतर्कता आयुक्त करेगा पूछताछ

नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के 13,000 करोड़ रुपए के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले में पंजाब नेशनल बैंक के ऑडिटरों की मुश्किलें...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 09, 2018, 06:35 AM IST

नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के 13,000 करोड़ रुपए के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले में पंजाब नेशनल बैंक के ऑडिटरों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग ने बैंक के ऑडिटरों को पूछताछ के लिए बुलाया है। मुख्य सतर्कता आयुक्त के.वी. चौधरी ने बताया कि करीब दर्जन भर सीए ने बैंक के खातों की ऑडिटिंग की। इन सबसे बैंक में हुए वित्तीय लेनदेन के बारे में पूछा जाएगा। बैंक के मुख्य सतर्कता अधिकारी से भी रिपोर्ट मांगी गई है। गौरतलब है कि पीएनबी की तरफ से 2011 से 2017 के दौरान नीरव मोदी की कंपनियों को 1,213 और मेहुल चौकसी की कंपनियों को 377 फर्जी एलओयू जारी किए गए थे। छह साल तक न तो बैंक के ऑडिटर इसे पकड़ सके, न ही यह बैंक प्रबंधन की नजरों में आया।

चौधरी ने कहा, ‘हम नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहते हैं। पीएनबी मामले में मैनेजर, सर्किल मैनेजर, जोनल मैनेजर सबको समय-समय पर सर्टिफिकेट देना था कि उन्होंने ‘स्विफ्ट’ मैसेज को वेरीफाई कर लिया है। अधिकारी या तो बिना वेरिफिकेशन के रिपोर्ट दे रहे थे या घोटाले में वे भी संलिप्त थे।’ स्विफ्ट एक ग्लोबल मैसेजिंग नेटवर्क है। दुनियाभर के बैंक कोड के जरिए इसमें सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। सीवीसी के अनुसार अगर इस सिस्टम से इतनी आसानी से छेड़छाड़ की जा सकती है, तो साफ है कि इसे मजबूत बनाया जाना चाहिए।

नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के खिलाफ गैरजमानती वारंट

बुरा वक्त बीत चुका, सबकुछ नियंत्रण में: पीएनबी प्रमुख

सुनील मेहता

एमडी, पीएनबी

सीबीआई की विशेष अदालत ने नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया है। दोनों जनवरी में ही देश छोड़कर जा चुके थे। जांच एजेंसी इन दोनों को कई बार पूछताछ के लिए बुला चुकी है। अब सीबीआई इंटरपोल से इनके नाम रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने को कह सकती है। दोनों के खिलाफ यह दूसरा गैरजमानती वारंट है। मार्च में ईडी के आग्रह पर कोर्ट ने इनके नाम वारंट जारी किया था।

पीएनबी के एमडी सुनील मेहता ने कहा कि नीरव मोदी प्रकरण से बैंक छह महीने में उबर जाएगा। उन्होंने कहा, बुरा वक्त बीत चुका है। सबकुछ नियंत्रण में है और हम रिकवरी के चरण में हैं। यह साफ है कि नीरव मोदी-मेहुल चौकसी प्रकरण अकेला ऐसा है। हमें इससे सीख भी मिली है। अब हमने लोन को चार वर्टिकल में बांट दिया है- सोर्सिंग, प्रोसेसिंग, मॉनिटरिंग और रिकवरी। सब एक दूसरे से अलग होंगे। इससे बेहतर निगरानी होगी। 30 अप्रैल तक स्विफ्ट सिस्टम को कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (सीबीएस) से पूरी तरह जोड़ दिया जाएगा। ऑफलाइन मॉनिटरिंग की भी व्यवस्था की गई है। नीरव मोदी की कंपनी फायरस्टार डायमंड ने खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए फरवरी में अमेरिका में याचिका दायर की थी। उसमें अपनी बात रखने के लिए पीएनबी ने वकील नियुक्त किया है।



हालांकि मेहता ने वकील का नाम नहीं बताया।

बड़े एनपीए में भी 35 से 40 सीए की भूमिका पर संदेह, आरबीआई कर रहा है जांच

प्रमोटरों और बैंकरों के साथ मिलकर सीए द्वारा लोन की रिस्ट्रक्चरिंग कराने की है आशंका

एनपीए के खिलाफ कार्रवाई में रिजर्व बैंक को 35-40 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) की भूमिका संदिग्ध मिली है। डिफॉल्ट करने वाले प्रमोटरों के साथ इनकी सांठगांठ थी। बैंकिंग रेगुलेटर यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि कहीं ये चार्टर्ड अकाउंटेंट्स मिलीभगत से पहले लोन डिफॉल्ट और फिर उनकी रिस्ट्रक्चरिंग तो नहीं करा रहे थे। सीए की संस्था आईसीएआई भी रिजर्व बैंक के साथ छानबीन कर रही है।

सेबी की भी सीए-सीएस पर जुर्माने की तैयारी

पीएनबी के अलावा फोर्टिस, सत्यम और किंगफिशर मामले में भी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका संदेह के घेरे में आई थी। हाल में कई कंपनियों के नतीजे वाट्सएप पर लीक होने में भी इनकी भूमिका पकड़ी गई। लिस्टेड कंपनियों में ऐसी धोखाधड़ी रोकने के लिए पूंजी बाजार नियामक सेबी सीए, कंपनी सेक्रेटरी, कॉस्ट अकाउंटेंट और वैलुअर्स की जवाबदेही तय करेगा। सेबी ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। जल्दी ही नियम जारी किए जाएंगे।

गड़बड़ी पाए जाने पर इन पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

सीए, सीएस, वैलुअर की फीस जब्त की जा सकती है। जुर्माने के रूप में ब्याज भी लिया जा सकता है।

रेगुलेटर इन प्रोफेशनल्स के द्वारा किसी कंपनी को सर्टिफिकेट देने पर रोक लगा सकता है।

आगे की कार्रवाई के लिए इनके नाम आईसीएआई/आईसीएसआई को भेजे जा सकते हैं।

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