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शिखर वार्ता: मोदी 4 साल में चौथी बार पुतिन के बुलावे पर रूस पहुंचेंगे

मोदी की रूस यात्रा से उम्मीदें: कूटनीति, रणनीति, अर्थनीति न्यूक्लियर पावर| रूस 2030 तक भारत में 18 प्लांट लगाएगा...

Dainik Bhaskar

May 21, 2018, 06:40 AM IST
शिखर वार्ता: मोदी 4 साल में चौथी बार पुतिन के बुलावे पर रूस पहुंचेंगे
मोदी की रूस यात्रा से उम्मीदें: कूटनीति, रणनीति, अर्थनीति

न्यूक्लियर पावर| रूस 2030 तक भारत में 18 प्लांट लगाएगा

भारत विश्व के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में से एक है। रूस तेल और प्राकृतिक गैस के मामले में बहुत समृद्ध है। अमेरिका और चीन के बाद भारत तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करता है। 2030 तक रूस, भारत में 16 से 18 नए न्यूक्लियर पावर रिएक्टर लगाने वाला है। इसमें एक की क्षमता 1000 मेगावाट है। एक रिएक्टर की कीमत 17 हजार करोड़ रु. है।

मोदी की अनौपचारिक कूटनीति, अमेरिका और यूरोपीय देशों को देंगे दोस्ती का संदेश

मोदी ने अनौपचारिक बैठकों का ट्रेंड शुरू किया है। इसकी शुरूआत उन्होंने हाल ही में चीन दौरे पर राष्ट्रपति जिनपिंग के साथ मुलाकात कर की थी। मोदी और पुतिन के बीच अनौपचारिक शिखर वार्ता का उद्देश्य दोनों देशों की दोस्ती और विश्वास का इस्तेमाल प्रमुख वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों पर समझ कायम करना है। दोनों अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों को पुरानी दोस्ती की ताकत का एहसास कराना भी चाहेंगे।

भारत और रूस के बीच हार साल शिखर सम्मेलन होता है, क्योंकि दोनों ही एक-दूसरे को अहम रणनीतिक साझीदार मानते हैं। शीत युद्ध की समाप्ति के बाद पिछले कुछ सालों में रूस और अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी देशों के बीच एक नए शीत युद्ध की शुरुआत हुई है। एक सर्वे के मुताबिक 45% रूसी जनता भारत को लेकर अभी भी हमेशा सकारात्मक रहती है। सिर्फ 9% लोग निगेटिव हैं। हालांकि पिछले कुछ साल में भारत, अमेरिका के ज्यादा करीब आया है। इसके चलते रूस, चीन और पाकिस्तान के करीब अाया है। पर भारत और रूस का मानना है कि पुराने दोस्त नए दोस्त से बेहतर होते हैं।

रक्षा सौदे| रूस, भारत को वायु प्रतिरक्षा मिसाइल प्रणाली दे रहा

भारत, रूस से परमाणु पनडुब्बी लीज पर लेना चाह रहा है। रूस से 40,000 करोड़ रुपए की लागत पर वायु प्रतिरक्षा मिसाइल प्रणाली भी खरीदने का करार किया है। रूस, भारत को कम कीमत में ही सुखोई टी-50 लड़ाकू जेट देने की पेशकश कर चुका है। भारत, रूस का सबसे बड़ा हथियार खरीदार है। 68% सैन्य हॉर्डवेयर भारत, रूस से ही खरीदता है।

आर्थिक सहयोग|2025 तक ट्रेड 2 लाख करोड़ रु. पहुंचाना है

भारत और रूस के बीच मौजूदा वक्त में सालाना 80 हजार करोड़ रु. से ज्यादा का द्विपक्षीय व्यापार हो रहा है। दोनों ने इसे 2025 तक 2 लाख करोड़ करने का लक्ष्य रखा है। इस पर भी भारत और रूस के बीच बातचीत हो सकती है। इनमें परमाणु, रक्षा, व्यापार और पर्यटन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 2012 में दोनों देशों के बीच कारोबार में 24% की वृद्धि हुई थी।


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