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एक मटका पानी के खातिर....

गांव में पानी सप्लाई का समय शाम 4 बजे का है। गर्मी में इस वक्त भी कड़ी धूप रहती है। लेकिन इसके लिए करीब दो घंटे पहले...

Danik Bhaskar | May 17, 2018, 06:45 AM IST
गांव में पानी सप्लाई का समय शाम 4 बजे का है। गर्मी में इस वक्त भी कड़ी धूप रहती है। लेकिन इसके लिए करीब दो घंटे पहले से कतारें लग जाती हैं। पहले आओ-पहले आओ के आधार पर। फिर भी कोई गड़बड़ी नहीं कर दे इसके लिए बुजुर्ग महिलाएं ड्यूटी पर तैनात रहती हैं। निगरानी रखती हैं।

गांव में एक ही सरकारी नल, 4 दिन के अंतराल से आता है पानी, वह भी कभी आधा घंटा तो कभी 10 मिनट

पानी की किल्लत और बर्बादी की यह तस्वीरें शहर से महज 40 किमी के दायरे की

1. कड़ी धूप में गांव की बुजुर्ग महिलाओं की निगरानी, कोई लाइन तोड़कर आगे-पीछे नहीं कर दे मटका

कई गांव - शहरों में हम व्यर्थ बहा रहे पीने का हजारों लीटर पानी, सेपटावास में दो घंटे पहले लगती है मटकों की लाइन, 10 मिनट बाद ही नल से पानी बंद

2. पानी आया तो टूट गई कतारें, एक मटके के लिए जद्दोजहद, लेकिन 10 मिनट बाद नल बंद, ज्यादातर महिलाएं लौटी खाली हाथ

बुधवार को भास्कर टीम सेपटावास गांव पहुंची। टीम की मौजूदगी के दौरान ही पानी सप्लाई शुरू हुई। कतारें टूट चुकी थीं और सब महिलाएं व बच्चे एक मटका भरने की जद्दोजहद में शामिल हो चुके थे। लेकिन करीब 10 मिनट बाद ही नल बंद हो गया। बलाया गया कि कहीं लाइन लीकेज हो गई। कहने को 11 हैंडपंप लगे हुए है, पर एक में ही मीठा पानी मिल पाता है। बाकी सभी हैंडपंप में खारा पानी निकलता है। गांव में पूर्व जिला प्रमुख ने 2008 में घर-घर पाइपलाइन लगवाई थी। पर एक बार भी पाइपलाइन में पानी सप्लाई नहीं हो पाई है। गांव में 250 परिवारों के 3 हजार से अधिक लोग निवासरत हैं।

इधर, जाडन के पास व्यर्थ बह रहा पानी

जाडन से सरदारसमंद मार्ग पर सीताराम भाट की ढाणी में जवाई पाइपलाइन पर लगे वाल्व से काफी पानी व्यर्थ बह रहा है। बुधवार को दैनिक भास्कर के जल मित्र पुष्पेंद्र डाबी ने यहां हो रही पानी की बर्बादी अपने कैमरे में कैद की। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद ग्रामीणों से भी पानी की बर्बादी रोकने के लिए समझाइश की। उन्होंने ग्रामीणों से व्यर्थ बह रहे पानी का सदुपयोग करने को कहा