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मारवाड़ के रण बांकुरों के शौर्य का साक्षी रहा है सुमेल गिरी

शेरशाहसूरी को ‘एक मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की सल्तनत खो देता’ कहने के लिए मजबूर करने वाले मारवाड़ के रण...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 05, 2018, 07:10 AM IST

शेरशाहसूरी को ‘एक मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की सल्तनत खो देता’ कहने के लिए मजबूर करने वाले मारवाड़ के रण बांकुरों के शौर्य की साक्षी रही सुमेल गिरी रणभूमि इतिहास के पन्नों में अपने गौरव के लिए जानी जाती है।

पहाड़ी दर्रों के बीच हुए हल्दी घाटी युद्ध से भी 32 साल पूर्व मारवाड़ के पहाड़ी मैदान में लड़ी गई इस लड़ाई के जांबाज राव जैता, राव कूंपा, राव खींवकरण, राव पंचायण, राव अखैराज सोनगरा, राव अखैराज देवड़ा, राव सूजा, मान चारण, लुंबा भाट अलदाद कायमखानी सहित 36 कौम के लगभग 6000 (कुछ किताबों में 12000) सैनिकों ने शेरशाह की 80 हजार सैनिकों की सेना का डटकर मुकाबला किया। शासक मालदेव के प्रति विश्वास और जन भावना से उपजे जोश के बूते इन जांबाजों ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपना रण कौशल दिखाया। इससे शेरशाह के सैनिकों में भगदड़ मच गई। छोटी सेना के बड़े पराक्रम को भांप कर शेरशाह के सैनिकों ने उनको गिरी-सुमेल छोड़ने की सलाह तक दे दी। हालांकि बौखलाए शेरशाह को तब यह कहना पड़ा कि ‘एक मुट्ठी बाजरे के लिए वह दिल्ली की सल्तनत खो देता।’

^सुमेल गिरी के युद्ध में चारों ओर से घेर कर भोज्य सामग्री रोकने की नीति का उपयोग किया गया। इस युद्ध में कुटनीति पराक्रम का जूनुन देखने को मिलता है। इतिहास के इन स्वर्णिम पृष्ठों को उचित महत्व मिलना चाहिए। -जसवंतसिंह, व्याख्याता बांगड़ कॉलेज, पाली

^शासकके प्रति विश्वास भाव बरकरार रखने के लिए कर्तव्य दायित्व कुछ दिखाने का जोश यह युद्ध दर्शाता है। इस प्रेरणा स्थल को इतिहास पटल पर पुरातत्व सर्वे, इतिहास पर्यटन पेनोरमा के रूप में महत्व मिलना चाहिए। -समंदरसिंह बांता, संयोजक, अखिल भारतीय क्षत्रिय श्रीसंघ, पाली

रणस्थली के विकास के लिए प्रयास

गिरीबलिदान दिवस समारोह समिति के संयोजक कानसिंह राठौड़ उदेशी कुआं मारवाड़ महिला शिक्षण संस्थान खिमेल के अध्यक्ष नारायणसिंह आकड़ावास ने बताया कि युद्ध स्थली के साथ-साथ पराक्रमियों को इतिहास में उचित स्थान दिलाने के लिए 5 जनवरी को यहां बलिदान दिवस मनाया जा रहा है। रणस्थली के विकास के लिए भी प्रयास किया जा रहे हैं। इसको लेकर भगवतीसिंह निंबाज, रामसिंह राठौड़ हाजीवास, अमरजीतसिंह राठौड़ निमाज, भगवतसिंह मोहरा, मानवजीतसिंह, हनुमानसिंह भैसाणा, नारायणसिंह चौकडिया, चैनसिंह बलाड़ा, रसाल कंवर, शोभा चौहान, गिरिजा राठौड़, रश्मि सिंह, सुमेरसिंह कुंपावत राजेंद्रसिंह देवड़ा सहित कई लोग जुटे हैं।

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Web Title: maarvaade ke rn baankuron ke shaury ka sakshi raha hai sumel gairi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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